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अभिनंदन समारोह में मुनिश्री बोले - मनुष्य के शीतल रहने से बढ़ती है उसकी सोचने की शक्ति

जैन विश्व भारती संस्थान में शनिवार को अभिनंदन एवं मंगलभावना समारोह आयोजित किया। मुनिश्री जयकुमार ने कहा है कि हर...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 05:10 AM IST
जैन विश्व भारती संस्थान में शनिवार को अभिनंदन एवं मंगलभावना समारोह आयोजित किया। मुनिश्री जयकुमार ने कहा है कि हर व्यक्ति विकास की दौड़ में लगा हुआ है, लेकिन विकास के पैमाने के बारे में भी सोचा जाना चाहिए। चेतना को पतन की ओर नहीं ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान प्राप्त करने को केवल जानकारी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखें। भीतर की प्रज्ञा का जागरूक बनना आवश्यक है। व्यक्ति चन्द्रमा की तरह शीतल और शांत होना चाहिए। व्यक्ति भीतर से शीतल होगा व भावनाएं शांत होंगी तो उसके सोचने की शक्ति दोगुनी हो जाती है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने मुनिश्री जयकुमार का स्वागत करते हुए बताया कि वे ऐसे तपस्वी व साधक संत हैं, जिन्होंने अपने साधना-काल में बरसों तक लेट कर शयन नहीं किया। वे आराम के लिए केवल बैठ कर ही विश्राम करते रहे हैं।

आयोजन

मुनि मुदित कुमार व मुनि सुपारस कुमार ने व्यक्ति को सदैव गतिशील रहने की जरूरत बताई

प्रोफेसर : मानवता के लिए समर्पित होते हैं संत

मुनि मुदित कुमार व मुनि सुपारस कुमार ने व्यक्ति को सदैव गतिशील रहने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में जैन विश्व भारती के ट्रस्टी भागचंद बरड़िया, जीवन मल मालू, निदेशक राजेन्द्र खटेड़, विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद कुमार, प्रो. दामोदर शास्त्री, वित्ताधिकारी आरके जैन, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी आदि ने सं‍बोधित किया तथा संतों को सदैव चलने वाला और संपूर्ण मानवता के लिए समर्पित बताया। कार्यक्रम में डॉ. जसबीर सिंह, डॉ. सत्यनारायण भारद्वाज, प्रगति भटनागर, सोनिका जैन, दीपक माथुर, नुपूर जैन आदि उपस्थित थे।

मुनिश्री स्वस्तिक कुमार का विहार आज: मुनिश्री स्वस्तिक कुमार के 14 माह के लाडनूं प्रवास के बाद 1 अप्रेल रविवार सुबह 8 बजे जैन विश्व भारती स्थित सेवा केन्द्र भिक्षु विहार से उनका विहार होगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने बताया कि इस अवसर पर जैन विश्व भारती एवं विश्वविद्यालय के समस्त सदस्यगण उपस्थित रहेंगे। इस दौरान उन्हें भावभीनी विदाई दी जाएगी।

मुनि मुदित कुमार व मुनि सुपारस कुमार ने व्यक्ति को सदैव गतिशील रहने की जरूरत बताई। कार्यक्रम में जैन विश्व भारती के ट्रस्टी भागचंद बरड़िया, जीवन मल मालू, निदेशक राजेन्द्र खटेड़, विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद कुमार, प्रो. दामोदर शास्त्री, वित्ताधिकारी आरके जैन, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी आदि ने सं‍बोधित किया तथा संतों को सदैव चलने वाला और संपूर्ण मानवता के लिए समर्पित बताया। कार्यक्रम में डॉ. जसबीर सिंह, डॉ. सत्यनारायण भारद्वाज, प्रगति भटनागर, सोनिका जैन, दीपक माथुर, नुपूर जैन आदि उपस्थित थे।

मुनिश्री स्वस्तिक कुमार का विहार आज: मुनिश्री स्वस्तिक कुमार के 14 माह के लाडनूं प्रवास के बाद 1 अप्रेल रविवार सुबह 8 बजे जैन विश्व भारती स्थित सेवा केन्द्र भिक्षु विहार से उनका विहार होगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने बताया कि इस अवसर पर जैन विश्व भारती एवं विश्वविद्यालय के समस्त सदस्यगण उपस्थित रहेंगे। इस दौरान उन्हें भावभीनी विदाई दी जाएगी।