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भास्कर जलमित्र के साथ लोगों ने की बावड़ी की सफाई, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया

भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए जहां सरकार अपने स्तर पर विभिन्न प्रयास कर रही है, वहीं कुछ सजग आमजन भी इसमें पीछे नहीं हैं।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 05:00 AM IST

भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए जहां सरकार अपने स्तर पर विभिन्न प्रयास कर रही है, वहीं कुछ सजग आमजन भी इसमें पीछे नहीं हैं। परंपरागत प्राचीन जलस्रोतों का बेहतरीन उपयोग ग्राम कसूम्बी के युवाओं द्वारा किया जा रहा है। कसूम्बी में 485 वर्ष प्राचीन बावड़ी का उपयोग अब भूगर्भ में वर्षाजल पूरक के रूप में किया जा रहा है। दैनिक भास्कर के जलमित्र रजनीश शर्मा ने इस बावड़ी में शुद्ध जल से वाटर हार्वेस्टिंग के लिए बावड़ी की सफाई का जिम्मा उठाया और युवा साथियों के साथ मिलकर श्रमदान करके इसकी पूरी सफाई की। सोमवार को इस बावड़ी के लिए चलाए गए सफाई अभियान में रजनीश शर्मा के साथ कमल किशोर, छगन स्वामी, विशाल शर्मा, संजय, रामू मेघवाल, धर्मेंद्र, गुलाब स्वामी, श्याम माटोलिया और अन्य युवाओं ने श्रमदान किया। भास्कर जलमित्र रजनीश ने बताया कि यह बावड़ी कभी उपेक्षा के कारण कचराघर के रूप में तब्दील हो गई थी।

देखरेख के अभाव में बावड़ी बन गई थी कचरा स्थल, अब लोगों ने ली सुध

भास्कर जलमित्र रजनीश शर्मा ने बताया कि बावड़ी परिसर में लगे शिलालेख और पुरातत्व रिकार्ड के अनुसार यह बावड़ी 485 वर्ष पुरानी है, जो अपने समय में पानी का मुख्य स्रोत रही है। गांव के बुजुर्ग परस राम और रामनिवास पीपलवा के अनुसार 80 वर्ष पूर्व तक इसका पानी पीने और खेती के उपयोग में आता था। बाद में इसकी उपेक्षा होने से यह कचरे से भर गई थी। अब इस बावड़ी का उपयोग फिर से बरसाती पानी से भरने के काम में लिया जाने लगा है। यहांं पास ही स्थित राजकीय बालिका विद्यालय भवन की छत के बरसाती पानी को इन्हीं युवाओं ने दो वर्ष पूर्व पाइप लगाकर एवं चैम्बर व नाले का निर्माण करके इस बावड़ी में उतार कर इसे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का रूप दिया था, ताकि इससे बरसात के दिनों में छत का सारा पानी बावड़ी में जा सके। साथ ही इस बरसाती पानी से जो गलियों में कीचड़ और जल भराव की स्थिति बनती थी, उससे भी लोगों को मुक्ति मिली है।

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