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लाडनूं क्षेत्र में अब तक 100 मोरों की मौत, वन व पशुपालन विभाग के जिम्मेदार बता रहे तेज गर्मी में डिहाइड्रेशन को वजह

तहसील के विभिन्न गांवों में लगातार राष्ट्रीय पक्षी मोरों के मरने का सिलसिला लगातार जारी है और इसे रोकने के लिए वन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 05:10 AM IST

तहसील के विभिन्न गांवों में लगातार राष्ट्रीय पक्षी मोरों के मरने का सिलसिला लगातार जारी है और इसे रोकने के लिए वन विभाग कोई कदम नहीं उठा रहा है। मोरों के मरने के संबंध में कोई भी सरकारी विभाग जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है। वन विभाग इसे पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी बता रहा है तो पशुपालन विभाग की तरफ से इसे वन विभाग का दायित्व बताया जा रहा है। अब तक तहसील भर में करीब 100 मोर मर चुके हैं। जानकारी अनुसार कसूंबी गांव में पिछले एक पखवाड़े में करीब 70 मोर, गांव झेकरिया में 8 मोर, ढींगसरी में 8 मोर और सांडास में 10 मोर मौत का शिकार हो चुके हैं। गांव झेकरिया के गोपाल सिंह ने बताया कि उनके गांव में मोर को सब परिवार के सदस्य के रूप में समझते हैं तथा मोरों को अपने घर-आंगन या छत-गुवाड़ में दाना-पानी डालते हैं। शुक्रवार से अब तक दो दिनों में यहां 8 मोरों की मौत हो चुकी है। उन्होंने वन विभाग से संपर्क किया। लेकिन उन्होंने केवल गर्मी से मोरों के मरने की बात कह अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली।

पशुपालन विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. धर्मेंद्र चौधरी का कहना है कि उनका विभाग घायल या बीमार मोरों का इलाज कर सकता है और मृत मोरों का पोस्टमार्टम कर बता सकता है कि उनकी मौत कैसे हुई। मोरों को बचाने का जिम्मा वन विभाग का है। वन विभाग को पता है कि मोरों की संख्या कहां ज्यादा है। इसलिए जहां अधिक मोर हैं, वहां उनके बचाव के उचित प्रयास वन विभाग को करने चाहिए। डाॅ. चौधरी ने बताया कि कुछ मोरों का पोस्टमार्टम उन्होंने किया था। इन मोरों की मांसपेशियां तक पिघल चुकी थी। निश्चित रूप से यह उच्च तापमान के कारण हुआ डिहाइड्रेशन ही था, जो 40 डिग्री से अधिक तापमान और पानी की कमी के कारण हुआ था।

दाबड़िया में 4 मोर मृत मिले

बोरावड़ | वन विभाग की लापरवाही के चलते मकराना उपखंड क्षेत्र में मोरों के मरने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। वन विभाग के पास इतनी बड़ी संख्या में मोरों के मरने के कारण को लेकर कोई संतुष्टिजनक जवाब भी नहीं है। ग्राम पंचायत हुड़िया के राजस्व ग्राम दाबड़िया में स्थित दुजोट की नाडी में 2 जून को 4 मृत तथा 1 घायल मोर मिलने के बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने क्षेत्रीय वन अधिकारी के मौखिक आदेश पर घायल मोर का उपचार करवा मृत मोरों का अंतिम संस्कार कर दिया। जिसके बाद 4 जून को उसी स्थान पर 40 से अधिक मोरों के मरने के बाद घटना स्थल पर बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रेमियों के आ जाने पर हरकत में आए विभाग ने आनन-फानन में मेडिकल बोर्ड का गठन करवा मोरों का पोस्टमार्टम करवाया तथा जांच के लिए विसरा तथा मोरों के भोजन के लिए डाले जाने वाले अनाज का सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया। 4 जून को स्वयं जिला वन अधिकारी मोहित गुप्ता ने घटना स्थल पर आकर पूछताछ की तथा ग्रामीणों को मोर के मरने के कारण की तह तक जाकर शिकार करने की स्थिति में शिकारियों पर सक्त कार्रवाई करने की बात कही। मगर उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद 9 जून को पुनः उसी स्थान के पास 4 मोर मृत पाए गए। जिसे लेकर ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यशैली को लेकर रोष व्याप्त है। गौरतलब है कि आए दिन वन्य जीवों का शिकार किया जा रहा है। इसके बाद भी वन विभाग व पुलिस ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है।

पशुपालन विभाग को करने चाहिए बचाव के उपाय

राष्ट्रीय पक्षी मोरों की मौत के संबंध में वन विभाग के रेंजर रामकरण गुसाईंवाल से बात करने पर बताया कि इन मोरों की मौत ज्यादा गर्मी के कारण उनमें डिहाइड्रेशन होने के कारण हुई है। वन विभाग के पास इस संबंध में कोई उपाय करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। पशुपालन विभाग इस संबंध में कुछ कर सकता है, उन्हें मोरों को बचाने के लिए प्रयास करने चाहिए। हम पशुपालन विभाग से इस संबंध मेंं चर्चा करेंगे और उनकी सलाह को वन विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार ही आगे कार्रवाई की जाएगी।

गर्मी से बचाव के लिए पिलाया जाएगा ग्लूकोज

वन विभाग के रेंजर रामकरण गुसांइवाल ने सलाह दी है कि अगर मोरों के पीने के पानी में ग्लूकोज मिला दिया जाए तो उन्हें डिहाइड्रेशन से काफी हद तक बचाया जा सकता है। दैनिक भास्कर ने यहां युवा वर्ग को इस बात के लिए तैयार किया है कि वे मोरों के लिए परिंडों में भरे जाने वाले पानी में ग्लूकोज मिलाने का अभियान चला कर राष्ट्रीय पक्षी मोर का अस्तित्व बचाने के लिए आगे आएं। दैनिक भास्कर के तत्वावधान में रविवार से इस अभियान की शुरुआत की जाएगी। जिसमें क्षेत्र के अनेक युवा भी शामिल होंगे।

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Web Title: लाडनूं क्षेत्र में अब तक 100 मोरों की मौत, वन व पशुपालन विभाग के जिम्मेदार बता रहे तेज गर्मी में डिहाइड्रेशन को वजह
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