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जिसके पास प्रेम रूपी धन है, वह कभी निर्धन नहीं हाे सकता

लक्ष्मणगढ़ | मुरली मनोहरजी मंदिर में भागवत कथा का समापन हुआ। अंतिम दिन व्यासपीठ से कथावाचक आचार्य डॉ. महेंद्र जोशी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 23, 2018, 05:15 AM IST

जिसके पास प्रेम रूपी धन है, वह कभी निर्धन नहीं हाे सकता
लक्ष्मणगढ़ | मुरली मनोहरजी मंदिर में भागवत कथा का समापन हुआ। अंतिम दिन व्यासपीठ से कथावाचक आचार्य डॉ. महेंद्र जोशी ने कृष्ण सुदामा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कृष्ण और सुदामा मित्रता का पर्याय है। मित्रता ही एकमात्र रिश्ता है, जिसमें सिर्फ भावनाएं व समर्पण देखा जाता है। सुदामा की निर्धनता पर आचार्य ने कहा कि शंकावश सुदामा अपने परम मित्र कन्हैया से मिलने से कतराते थे, लेकिन भगवान ने अपने मित्र के आगमन का समाचार सुन सिंहासन छोड़कर उत्साह से उनकी अगवानी करने स्वयं ओर दौड़े। भगवान कृष्ण ने दृष्टांत प्रस्तुत किया कि जिसके पास प्रेम रूपी धन है, वह कैसे निर्धन है। कथा विराम के बाद यज्ञ हुआ। आध्यात्मिक उत्थान मंडल के आचार्य नटवरलाल जोशी, कार्यक्रम संयोजक हर्षनाथ नाहरिया व शशिप्रकाश जोशी ने आभार जताया।

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