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दाबड़िया में 5 मोर और मृत मिले, 8 दिन में संख्या 35 तक पहुंची, वन विभाग कारण जानने रिपोर्ट का कर रहा इंतजार

मकराना क्षेत्र की ग्राम पंचायत हुड़िया के राजस्व ग्राम दाबड़िया के वन्यजीव प्रेमी व ग्रामीण इन दिनों खासे परेशान...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 04:55 AM IST

दाबड़िया में 5 मोर और मृत मिले, 8 दिन में संख्या 35 तक पहुंची, वन विभाग कारण जानने रिपोर्ट का कर रहा इंतजार
मकराना क्षेत्र की ग्राम पंचायत हुड़िया के राजस्व ग्राम दाबड़िया के वन्यजीव प्रेमी व ग्रामीण इन दिनों खासे परेशान है। जिसकी वजह है कि यहां पर पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मोरों की मौत। दरअसल यहां के वन्य जीव प्रेमी व ग्रामीण मोरों को भी दोनों समय का भोजन मुहैया कराते हैं और उनकी पानी-सुरक्षा आदि की आवश्यकता को भी ध्यान में रखते है। लेकिन अज्ञात कारणों से पिछले कुछ समय से यहां लगातार मोर मृत मिल रहे है। दाबड़िया की दूजोट की नाडी के पास रहने वाले करीब 100 से अधिक मोरों पर इन दिनों खतरे के बादल मंडरा रहे है। कभी मोरों से गुलजार रहने वाली इस नाडी पर गत 8 दिनों में 35 मृत मोरों के शव बरामद किए जा चुके है। जिससे वन्यजीव प्रेमियों को मोरों की रक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। हुड़िया के रहने वाले वन्यजीव प्रेमी मनीराम बिश्नोई ने बताया कि पुलिस तथा सेना भर्ती में जाने की तैयारी करने वाले रामनिवास डोंगीवाल, हरिराम, लालाराम रेवाड़, मुकेश गुर्जर, सोहन जुणावा आदि दौड़ के अभ्यास के लिए दूजोट की नाडी क्षेत्र में जाते है। यहां पर 2 जून को 4 मृत तथा 1 घायल मोर देखने पर इन्होंने इसकी सूचना दी। इस पर उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को सूचित किया। वन विभाग कर्मचारियों ने मौके पर पहुंच घायल मोर का उपचार करवाते हुए मृत मोरों का अंतिम संस्कार करवा दिया। उसके 2 दिन बाद 4 जून को इसी स्थान से मोरों के 22 शव मिलने पर वन विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा आस-पास के लोगों से जानकारी जुटा मोरों का पोस्टमार्टम करवाया। मगर इसके बाद भी इसी स्थान से 9 तथा 10 जून को 4 और 5 मोरों को शव और देखे गए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण मोरों की रक्षा करने के लिए पूरा ध्यान रखते हुए उनके भोजन आदि का भी प्रबंध करते है। ऐसे में इस प्रकार आए दिन मोरों के मरने के कारण वे काफी चिंतित है। साथ ही उन्होंने वन विभाग की ओर से शेष माेरों के बचाव के लिए कोई प्रयास नहीं किए जाने से वन विभाग के प्रति रोष जताया।

बोरावड़. दूजोट की नाडी के पास पड़े मृत मोर (फाइल फोटो)।

भास्कर संवाददाता | बोरावड़

मकराना क्षेत्र की ग्राम पंचायत हुड़िया के राजस्व ग्राम दाबड़िया के वन्यजीव प्रेमी व ग्रामीण इन दिनों खासे परेशान है। जिसकी वजह है कि यहां पर पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मोरों की मौत। दरअसल यहां के वन्य जीव प्रेमी व ग्रामीण मोरों को भी दोनों समय का भोजन मुहैया कराते हैं और उनकी पानी-सुरक्षा आदि की आवश्यकता को भी ध्यान में रखते है। लेकिन अज्ञात कारणों से पिछले कुछ समय से यहां लगातार मोर मृत मिल रहे है। दाबड़िया की दूजोट की नाडी के पास रहने वाले करीब 100 से अधिक मोरों पर इन दिनों खतरे के बादल मंडरा रहे है। कभी मोरों से गुलजार रहने वाली इस नाडी पर गत 8 दिनों में 35 मृत मोरों के शव बरामद किए जा चुके है। जिससे वन्यजीव प्रेमियों को मोरों की रक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। हुड़िया के रहने वाले वन्यजीव प्रेमी मनीराम बिश्नोई ने बताया कि पुलिस तथा सेना भर्ती में जाने की तैयारी करने वाले रामनिवास डोंगीवाल, हरिराम, लालाराम रेवाड़, मुकेश गुर्जर, सोहन जुणावा आदि दौड़ के अभ्यास के लिए दूजोट की नाडी क्षेत्र में जाते है। यहां पर 2 जून को 4 मृत तथा 1 घायल मोर देखने पर इन्होंने इसकी सूचना दी। इस पर उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को सूचित किया। वन विभाग कर्मचारियों ने मौके पर पहुंच घायल मोर का उपचार करवाते हुए मृत मोरों का अंतिम संस्कार करवा दिया। उसके 2 दिन बाद 4 जून को इसी स्थान से मोरों के 22 शव मिलने पर वन विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा आस-पास के लोगों से जानकारी जुटा मोरों का पोस्टमार्टम करवाया। मगर इसके बाद भी इसी स्थान से 9 तथा 10 जून को 4 और 5 मोरों को शव और देखे गए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण मोरों की रक्षा करने के लिए पूरा ध्यान रखते हुए उनके भोजन आदि का भी प्रबंध करते है। ऐसे में इस प्रकार आए दिन मोरों के मरने के कारण वे काफी चिंतित है। साथ ही उन्होंने वन विभाग की ओर से शेष माेरों के बचाव के लिए कोई प्रयास नहीं किए जाने से वन विभाग के प्रति रोष जताया।

फोरेंसिक लैबों ने नहीं है पूरा स्टाफ

फोरेंसिक जांच में लगने वाले समय के बारे में राजस्थान राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के असिस्टेंट निदेशक डाॅ. राजेश सिंह का कहना है कि प्रयोगशाला में स्टाफ की कमी के चलते जांच में समय लग रहा है। सोमवार को इस जांच के बारे में अजमेर के चिकित्सकों से बात कर कोई जवाब दिया जा सकता है। वहीं पशु चिकित्सक डाॅ. देवेंद्र गोदारा के अनुसार दूजोट की नाडी के पास मृत मिले मोरों में जहर का असर पाया गया था। जहर किस प्रकार का तथा कितनी मात्रा में है, इसकी जानकारी फोरेंसिक रिपोर्ट से ही हो सकती है। मोर की पाचन शक्ति कमजोर होती है। इस कारण इस पर थोड़े से रासायनिक का प्रभाव बहुत अधिक होता है।

क्षेत्र के कार्मिकों को मोरों पर नजर रखने के निर्देश

जिला वन अधिकारी मोहित गुप्ता के अनुसार 4 जून को मृत मिले मोरों का पोस्टमार्टम करवा कर विसरा अजमेर में फोरेंसिक जांच के लिए भिजवा दी है। जब तक उसकी रिपोर्ट नहीं आ जाती, मोरों के मरने के कारण के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। मकराना क्षेत्र के लिए भी कर्मचारियों को मोरों पर नजर बनाए रखने के लिए आदेश दिए है।

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