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जारोड़ा में गोली मारकर एक हिरण की हत्या लाडनूं क्षेत्र में अब तक100 मोरों की मौत

जिले भर में शिकारियों द्वारा की जा रही वन्य जीवों की हत्या की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कभी शिकारियों द्वारा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 05:15 AM IST

जारोड़ा में गोली मारकर एक हिरण की हत्या लाडनूं क्षेत्र में अब तक100 मोरों की मौत
जिले भर में शिकारियों द्वारा की जा रही वन्य जीवों की हत्या की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कभी शिकारियों द्वारा गोली मारकर हिरणों की हत्या की जा रही है तो कभी नील गायों को निशाना बनाया जा रहा है। शिकारियों पर वन विभाग, पुलिस व प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण इनकेे हौसले बुलंद हैं। ऐसी ही दो घटना शनिवार को हुईं। शुक्रवार व शनिवार तक बोरावड़ के दाबड़िया और लाडनूं क्षेत्र में गत दिनों से लेकर अब तक कुल 100 मोरों के शव मिले हैं। जबकि जारोड़ा में शनिवार सुबह कस्बे के तालाब के अंगोर में भी हिरण की गोली मारकर हत्या करने की घटना सामने आई है। यहां पर किसी अज्ञात शिकारी द्वारा गोली मारकर एक हिरण की हत्या कर दी गई। जबकि शिकारी की गोली से तीन नीलगाय घायल हो गईं। गोली की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए। जिसके चलते शिकारी वहां से भाग गया।

सूचना मिलने पर सैकड़ों वन्य जीव प्रेमी व ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने वन विभाग व पुलिस को घटना की सूचना दी। जिस पर वनविभाग के अधिकारी और मेड़तारोड थानाधिकारी पूरणमल मीणा, नरेश पारीक, रामकुवार, दिनेश, नेमाराम, कंवरीलाल, जगमाल मय जाप्ता मौके पर पहुंचे। घटना के संबंध में पूछताछ की। इस दौरान वन्यजीव प्रेमियों ने रोष व्यक्त करते हुए वन्य जीवों की हत्याओं पर रोक लगाने व शिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने आस-पास के वनबागरियों के डेरे पर दी दबिश, नहीं मिला सुराग

घटना पर पहुंची पुलिस व लोगों ने हिरण की मौत पेट में छर्रे लगने से होनी बताई। घटना के बाद पुलिस व वन विभाग के अधिकारी हिरण को पोस्टमार्टम के लिए जारोड़ा स्थित पशु चिकित्सालय लेकर पहुंचे। जहां पशु चिकित्साधिकारी तुलसीराम घटेला व अन्य चिकित्सकों के सहयोग से पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद विश्नोई समाज व पुलिस की उपस्थिति मे हिरण को दफना दिया गया। मेड़तारोड थानाधिकारी पूरणमल मीणा ने मय जाप्ता आस-पास के कई वनबागरियों के डेरे पर दबिश देकर पूछताछ की, लेकिन शिकारियों का कोई सुराग नहीं लग सका। इधर, क्षेत्रीय वनाधिकारी दौलतराम गोदारा का कहना है कि पोस्टमार्टम रिर्पोट मिलते ही सुबह अज्ञात शिकारियों के खिलाफ शिकार करने का मामला मेड़तारोड थाने में दर्ज करवा दिया जाएगा। वहीं वन्य जीवप्रेमी घासीराम मुण्डेल, राजाराम विश्नोई, जगदीश विश्नोई, गोविंद जाजड़ा, सीपी विश्नोई, सहदेव डारा, रामेश्वर डारा, सुशील, बुधाराम, हेतराम, शेरूराम, रामदेव, सुरेश सहित व विश्नोई समाज के लोगों ने शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हालात

लाठी से बंदूकधारी शिकारी का सामना

शिकारियों द्वारा आए दिन की जा रही वन्य जीवों की हत्याओं को लेकर जब पड़ताल की तो सामने आया कि वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं है। हालात ये हैं कि यदि किसी क्षेत्र में वन्य जीव का शिकार होने की जानकारी मिल भी जाती है तो मौके पर पहुंचने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों कई घंटों का समय तो वाहन की व्यवस्था करने में ही लग जाता है। विभाग के पास खुद का कोई वाहन नहीं है। इसके अलावा विभाग ने वन्य जीवों की देखभाल के लिए जो कर्मचारी लगा रखे हैं उनको सिर्फ एक लाठी दी गई है। ऐसे में यदि शिकारी उनके सामने भी शिकार करे तो कर्मचारियों की हिम्मत नहीं बनती की वो बंदूकधारी शिकारी को रोक सके।

जारोड़ा. घटना स्थल पर साक्ष्य जुटाते पुलिसकर्मी।

4 जून को दाबड़िया मिले थे 22 मोरों के शव

मकराना-परबतसर क्षेत्र में 7 दर्जन से ज्यादा मोरों की मौत के बाद 4 जून को दाबड़िया के दुजोट की नाडी में सोमवार को मोरों के 22 शव बरामद किए गए थे। इससे पहले खोखर, बांसड़ा, हुड़िया में भी करीब 3 दर्जन से ज्यादा मोर मृत मिले थे। मोरों की मौत जहरीले दाने से होने बताया गया। वन्य जीवों की हत्या की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए करीब 4-5 साल पहले एक साथ कई वन्य जीवों की हत्या किए जाने के बाद वन्यजीव प्रेमियों ने बुटाटी और रेण के बीच में वन विभाग की चौकी स्थापित की जाने की मांग की थी। वन विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में सरकार को प्रस्ताव भिजवाकर चौकी स्थापित करने की बात कही थी। लेकिन 5 साल बाद भी चौकी के लिए भेजा प्रस्ताव कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। यदि चौकी खुल जाए तो यहां पर स्थाई रूप से इस क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारी वन्य जीवों पर व शिकारियों पर ध्यान रख सकेंगे। जिससे घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

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