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बाबाओं के भंडारे में चेले खाते काजू

Malpura News - मालपुरा| साहित्यालोक संस्था मालपुरा के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय कवि सुरेंद्र दुबे की स्मृति में आयोजित...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 05:30 AM IST
बाबाओं के भंडारे में चेले खाते काजू
मालपुरा| साहित्यालोक संस्था मालपुरा के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय कवि सुरेंद्र दुबे की स्मृति में आयोजित विराट कवि सम्मेलन में शनिवार की देर तक श्रोताओं ने रचनाओं का खूब आनंद लिया। विभिन्न क्षेत्र से आए विभिन्न विधाओं के रचानाकारों द्वारा प्रस्तुत रचनाओं को श्रोताओं द्वारा जमकर दाद मिली। महेश सेवा सदन के मंच पर सरस्वती वंदना के साथ शुरू हुए कवि सम्मेलन में कवि आर एल दीपक ने वर्तमान परीपेक्ष्य के बाबाओं पर छंद प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। श्रोताओं को आर एल दीपक द्वारा - बाबाओं के भंडारे में चेले खाते काजू , छमक छल्लो संन्यासी के चलते आजू बाजू- सुनाई तो समूचा पांडाल तालियों की गडगडाहट से गूंज उठा।

उनकी रचना- चंदा के घूंघट से से देखा पागल पहरेदारों को , जाने कितना रूप लुटा है खबर नहीं बाजारों को , कितने भंवरे कितनी कलियां कितनी गलियां याद नहीं ,अंखियों से अंखियों में बाते अधरों से संवाद नहीं, श्रोताओं को खूब पसंद आई। इसी प्रकार नाथद्वारा से आए कवि कानू पंडित ने जिंदगी में लाख ऊंची हो उड़ान तेी , परिवार के प्रति तूं फर्ज मत भूलना, खुद की जवानी तेरी जिंदगी को दे दी प्यारे ऐसे बूढ़े पिताजी का कर्ज मत भूलना सुनाई कर श्रोताओं को झंझोर दिया । खाटू श्याम सीकर के कवि गजेंद्र सिंह कविया ने अपनी रचना सत्ता के गलियारे में अवधूत घुस गए ,प्रेम के मजबूत धागों में कच्चे सूत घुस गए। क्या दुर्दशा बताऊं अपने हिंदुस्तान की यहां विधानसभा तक में भूत घुस गए सुनाई। विष्णु विश्वास ने राजस्थानी भाषा में थारा हाथां की गूंठ्या गूंठया सूं धन धन अन्न हो गया प्रस्तुत रचना ने खूब वाहवाही लूटी। नई दिल्ली की अंतर्राष्ट्रीय कवयित्री कीर्ति काले ने अपनी रचना- दिल्ली की राजनीति में बवाल आ गया जिसका जवाब ना हो वो सवाल आ गया, अन्ना जो तेल गर्म करने में रह गए सारे पकौड़े आके केजरीवाल खा गया सुनाई तो लोगों जमकर तालियां बजाई। उनकी रचना- मदभरी रात को प्यार की बात को चांदनी रात में निखरने तो दो, मन संभालों संभालो संभालों पिया मेह महुए से गिरकर बिखरने तो दो- सुन कर श्रोताओं को गुदगुदाया। उनकी बिटिया चली ससुराल व सुरेंद्र दुबे की याद में उनकी रचना कुछ कहा भी नहीं कुछ सुना भी नहीं बिन कहे बिन सुने बस यूं ही चल दिए, प्रश्न कितने हृदय में उमड़ते रहे चल दिए सभी का बिना हल किए-सुनाई तो कवि दुबे के प्रशंसकों की आखें नम हो गई। इससे पहले अतिथि डॉ. जी एल शर्मा, मालपुरा के डॉ. राकेश जैन व गोपाल गुर्जर पूर्व उपप्रधान स्थानीय विधायक व दुबे द्वारा सरस्वती के चित्र समक्ष द्वीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संस्था की ओर से अतिथियों व कवियों का स्वागत किया गया।

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