• Hindi News
  • Rajasthan
  • Malsisar
  • झुंझुनूंवासियों मीठा पानी अब एक साल भूल जाइए
--Advertisement--

झुंझुनूंवासियों मीठा पानी अब एक साल भूल जाइए

Malsisar News - लगातार आगे बढ़ते रहने के लिए यह जरूरी है कि हम निरंतर अपने लक्ष्य और बड़े करते जाएं। 8 करोड़ लीटर पानी गांव में...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 05:15 AM IST
झुंझुनूंवासियों मीठा पानी अब एक साल भूल जाइए
लगातार आगे बढ़ते रहने के लिए यह जरूरी है कि हम निरंतर अपने लक्ष्य और बड़े करते जाएं।

8 करोड़ लीटर पानी गांव में घुसा, पूरे झुंझुनूं जिले में अलर्ट घोषित

भास्कर टीम | मलसीसर/झुंझुनूं- सीकर

कुंभाराम आर्य लिफ्ट केनाल परियोजना कwा पानी स्टोरेज करने के लिए मलसीसर में बनाए गए दो रिजरवायर (बांध) में से एक शनिवार को दोपहर करीब एक बजे टूट गया। बांध टूटने से झुंझुनूं और सीकर के 18 शहर और 1473 गांवों का 40 साल पुराना सपना भी टूट गया। बांध टूटने का प्रमुख कारण घटिया निर्माण सामने आया है। बांध टूटने से 8 करोड़ लीटर पानी बह गया। एक्सपर्ट के अनुसार बांध और अन्य कार्यों की मरम्मत भी होती है तो एक साल से ज्यादा का वक्त लगेगा, ऐसे में मीठा पानी काफी दूर हो गया है। पानी से मलसीसर का एक हिस्सा जलमग्न हो गया हालांकि आबादी क्षेत्र इससे बच गया और जनहानि भी नहीं हुई।

बालू मिट्‌टी से खड़ी कर दी बांध की दीवारें, सीमेंट में रेत मिला लेप किया, 3 माह भी नहीं टिकी, पानी में बह गए 588 करोड़

क्यों टूटा : 9 मीटर से ज्यादा पानी नहीं भरना था, 9.5 मी. से भरा

1. घटिया इंजीनियरिंग का कारण ये भी माना जा रहा है कि ये बांध बालू मिट्टी से ही बनाया गया था। इसकी दीवारों पर सीमेंट का घोल लगाकर टाइलें लगा दी गई थी। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि बालू मिट्टी के साथ चिकनी और दोमट मिट्टी भी काम में ली जानी चाहिए थी। इससे बांध की दीवार मजबूत होती।

एक्सपर्ट पैनल :
..क्योंकि घटिया इंजीनियरिंग की चपेट में आ मलसीसर बांध टूट गया, 40 साल पुरानी उम्मीदें भी पानी-पानी

2. 4.5 लाख वर्ग मी. क्षेत्रफल में बने इस बांध में 10 दिन पहले ही ये पूरा भरा गया था। बांध की ऊंचाई 10 मीटर है। गुरुवार शाम तक 9.5 मी. ऊंचाई तक पानी भर दिया था। 9 मीटर ऊंचाई से ज्यादा पानी नहीं भरा जाना था। इसके चलते बांध दवाब झेल नहीं पाया और पानी ज्यादा होने से टूट गया।

झुंझुनूं, रविवार, 1 अप्रैल, 2018

3. बांध से फिल्टर प्लांट में पाइप लाइन के जरिए पानी छोड़ा जाता है। बांध पाइप लाइन के पास से ही टूटा है। बांध तैयार करने के बाद पाइप लाइन डाली गई थी। उस वक्त बांध की सही ढंग से मरम्मत नहीं हुई और ये रिसने लगा। यदि रिसाव को समय रहते देख लिया होता तो बांध को टूटने से बचाया जा सकता था।

4. इस रिजरवायर में इमरजेंसी आउटलेट बनाया जाना था ताकि ऐसी किसी स्थिति में उस तरफ से पानी सुरक्षित तरीके से निकाला जा सके। जहां आउटलेट बनाया गया है, उसके आसपास 3 से 5 फीट तक पक्का निर्माण होना चाहिए ताकि रिसाव की आशंका न रहे। इस रिजरवायर में एेसा नहीं था।

आप पढ़ रहे हैं देश का सबसे विश्वसनीय और नंबर 1 अखबार

वैशाख कृष्ण पक्ष-प्रतिपदा, 2075

देर रात जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ मुकदमा और 2.75 करोड़ की वसूली के निर्देश, जल संसाधन विभाग के 2 एक्सईएन निलंबित

पीएचडी के प्रमुख शासन सचिव रजत मिश्रा ने दैनिक भास्कर को बताया कि मलसीसर में कुंभाराम लिफ्ट परियोजना का बांध टूटने के मामले में निर्माता कंपनी नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनसीसी) के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। घटिया निर्माण के कारण बांध टूटा है, जिससे बड़ी जनहानि हो सकती थी। लाखों लीटर पानी बर्बाद करने पर पौने तीन करोड़ की पैनल्टी भी लगाई जाएगी। कंपनी को ब्लैकलिस्टेड करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। कंपनी ने अभी तक ये प्रोजेक्ट जलदाय विभाग को हैंडओवर नहीं किया है, इसलिए कंपनी को ही मरम्मत करवानी होगी। जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा। कमेटी में स्पेशल प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर महेश करल, रूरल के डीएम जैन व जायका प्रोजेक्ट के सीएस चौहान को शामिल किया गया है।

निर्माण के दौरान जिम्मेदार दो एक्सईएन निलंबित : वर्ष 2013 से लेकर 2015 तक बांध निर्माण की देखरेख के लिए जिन तीन एक्सईएन को जिम्मेदारी दी गई थी, उनमें से दो को सरकार ने निलंबित कर दिया है। एक वीरआरएस ले चुके हैं। उन्होंने बताया कि एक्सईएन हरलाल नेहरा व दिलीप तरंग को निलंबित कर दिया गया है और वीआरएस ले चुके नरसिंह दत्त को नोटिस दिया गया है।

कुल पृष्ठ 22 (अहा! जिंदगी)

मूल्य Rs. 5.00 | वर्ष 1, अंक 180, महानगर

झुंझुनूं. मलसीसर में रिजरवायर से निकला पानी कंकडेऊ कलां की ओर जाता हुआ।


भास्कर विचार

तुरंत गिरफ्तार हो जिम्मेदार,

चले आपराधिक मुकदमा

राजस्थान में पानी की हर बूंद जीवन जितनी ही कीमती है। करोड़ों राज्यवािसयों के टैक्स की कमाई से यह बांध बनाया गया लेकिन निर्माण के तीन माह बाद ही यह टूट गया। बहाव में सिस्टम की शर्म अौर नाकामी तो बही ही, लाखों लोगों को महीनों तक मिलने वाला जल भी बर्बाद हो गया। इसके जिम्मेदारों पर सख्त से सख्त कार्यवाही तो होनी ही चाहिए। सरकार को इन्हें बर्खास्त कर यह मजबूत संदेश देना चाहिए। मांग तो यह भी होनी चाहिए कि इनपर जीवन देने वाले जल की लूट का अापराधिक मुकदमा चलें।

X
झुंझुनूंवासियों मीठा पानी अब एक साल भूल जाइए
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..