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धाकड़ जीत

विधानसभा चुनाव 2018 से महज 10 महीने पहले हुए मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के विवेक धाकड़ ने भाजपा के...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 05:50 AM IST
धाकड़ जीत
विधानसभा चुनाव 2018 से महज 10 महीने पहले हुए मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के विवेक धाकड़ ने भाजपा के शक्तिसिंह हाड़ा को 12,976 वोटों से हरा दिया। कांग्रेस से प्रधान रह चुके गोपाल मालवीय को 40,470 वोट मिले। वे निर्दलीय चुनाव लड़े थे। कांग्रेस के बागी मालवीय को 22.79 प्रतिशत वोट मिले। विवेक के पिता कन्हैयालाल धाकड़ ने वर्ष 1998, 2003 और 2008 में लगातार तीन विधानसभा चुनाव निर्दलीय लड़े। वे तीनों बार तीसरे स्थान पर रहे थे।

2013 में विवेक भाजपा की कीर्तिकुमारी से 18,540 से हारे थे। विवेक मांडलगढ़ के 16वें विधायक बने हैं। यहां दूसरा उपचुनाव है। इससे पहले नवंबर, 1991 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के भंवरलाल जोशी जीते थे। तब शिवचरण माथुर के लोकसभा चुनाव जीतने से सीट खाली हुई थी। इस बार भाजपा की कीर्ति कुमारी के निधन से खाली हुई थी। मांडलगढ़ में 1952 से 2013 तक हुए 14 आम चुनाव व एक उप चुनाव में 10 बार कांग्रेस, 2 बार भाजपा तथा एक-एक बार जनसंघ, जनता पार्टी व निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। इस बार कांग्रेस की 11वीं जीत रही। वर्ष 1990 में हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शिवचरण माथुर केवल 246 वोटों से जीते थे। उन्हें 31,640 वोट मिले थे जबकि भाजपा प्रत्याशी रामस्वरूप गुप्ता को 31, 394 वोट ही मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशियों के रूप में शिवचरण माथुर के बाद इस उप चुनाव में विवेक धाकड़ की दूसरी बड़ी जीत है। माथुर 1998 में 16597 वोट से जीते थे।


विवेक धाकड़

कांग्रेस

70146 वोट मिले

39.50 %

मांडलगढ़ उपचुनाव नतीजे

कुल 181926 वोट

गोपाल मालवीय

निर्दलीय

40470 वोट

22.79%

मांगीलाल भील

निर्दलीय

3040 वोट

1.71%

सीमा पारीक

निर्दलीय

2186 वोट

1.23%

अरविंद व्यास

निर्दलीय

1837 वोट

1.03%

कालूलाल माली

निर्दलीय

1762 वोट

0.99%

महावीर

निर्दलीय

965 वोट

0.54%


भाजपा: 350 करोड़ रुपए की घोषणाएं, दो माह से लगे थे दो मंत्री फिर भी जनता ने नकारा...उप चुनाव से पहले सरकार ने करीब 200 करोड़ की घोषणाएं की थी। जिला प्रमुख शक्तिसिंह हाड़ा ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट(डीएमएफटी) का आधे से ज्यादा बजट मांडलगढ़ में खर्च किया। जिलाध्यक्ष दामोदर अग्रवाल ने वोटर लिस्ट के अनुसार पन्ना प्रभारी बनाए। मतदान से पहले प्रदेश संगठन को एक-एक वोट के माइक्रो प्लान के बारे में बताया। दो माह से ऊर्जा मंत्री पुष्पेंद्र सिंह और यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी को प्रभारी लगा रखा था। सभी मंडलों में एक महीने से पूर्णकालिक विस्तारक काम कर रहे थे। सरकार ने अलग-अलग विभागों की पेंडिंग कई फाइलें भी निपटाई। चुनाव से दो महीने पहले प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी और सीएम यहां दो-दो दिन रुके। हर जाति वर्ग की मीटिंग की। चुनाव प्रचार के लिए सीएम एक सप्ताह में तीन बार दौरे पर आईं, पर सीट नहीं बची।

कांग्रेस: िनर्दलीय बना सबसे बड़ा कारण... कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी की प्रतिष्ठा यहां दांव पर थी। जहाजपुर विधायक धीरज गुर्जर के विरोध के बावजूद धाकड़ को टिकट जोशी के वकालत करने पर ही मिला। डॉ. जोशी स्वयं चुनाव की कमान संभाले रहे। उन्होंने प्रमुख नेताओं को अलग-अलग पंचायत बांट दीं और लगातार मॉनीटरिंग की। विवेक धाकड़ का बूथ मैनेजमेंट भी ठीक रहा। धाकड़ समाज के वोट उनकी जीत का प्रमुख आधार बने। विवेक पर मालवीय से जानबूझकर नामांकन वापस नहीं उठवाने के आरोप भी लगे, लेकिन विवेक शुरू से समझ गए थे कि मालवीय के कारण उन्हें नुकसान नहीं होगा। भाजपा सरकार की एंटी इनकंबेंसी भी इस हार की एक वजह मानी जा रही है। कांग्रेस व निर्दलीय प्रत्याशी को मिले वोटों से माना जा रहा है कि मतदाताओं में भाजपा सरकार के प्रति गुस्सा है।

17.88% चार साल में भाजपा का वोटबैंक कम हुआ

0.60% चार साल में कांग्रेस के वोट बढ़े (5602)

22.79% कांग्रेस के बागी को मिले प्रतिशत वोट

2.39% मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया

12,976 अंतर से जीते विवेक

पूर्व मुख्यमंत्री माथुर के बाद कांग्रेस की दूसरी बड़ी जीत, भाजपा का 17.88% वोट बैंक कम हुआ

3 बार पिता और 4 साल पहले खुद 18,540 वोट से हारकर अब जीते विवेक चौथे राउंड में 7123 से हार रही कांग्रेस ने 11वें में आगे होकर अंतर दोगुना किया

कोटड़ी क्षेत्र

जहां से विवेक पीछे रहे

मांडलगढ़/ काछोला/बीगोद

यहां से हुई थी कांग्रेस को बढ़त की शुरुआत

नोटा में 4350 वोट



शक्तिसिंह हाड़ा

57170 वोट मिले

32.19 %

ऊपरमाल क्षेत्र

जहां से कांग्रेस ने बढ़त बनाई

भाजपा

हाड़ा खुद के क्षेत्र में ही हार गए... भाजपा प्रत्याशी हाड़ा खुद के जिला परिषद वार्ड 15 और जहां उनका नाम मतदाता सूची में हैं वहा भी चुनाव हार गए। हाड़ा जिला परिषद वार्ड में करीब एक हजार वोट से पीछे रहे। यूआईटी चेयरमैन गोपाल खंडेलवाल व पूर्व विधायक बद्रीप्रसाद गुरुजी के क्षेत्र के अलावा और कई नेताओं के क्षेत्र में भी हाड़ा चुनाव हारे हैं। नैतिकता के आधार पर गुरुजी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए जिला परिषद सदस्य से प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को इस्तीफा भेज दिया है। सोशल मीडिया पर अन्य नेताओं के इस्तीफे की भी चर्चा चलती रही।

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