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मांडलगढ़ उपचुनाव

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 05:50 AM IST

भाजपा; इस्तीफे शुरू, चुनाव संचालन समिति अध्यक्ष गुरुजी ने जिला परिषद सदस्य पद छोड़ा कांग्रेस; कोटड़ी पंचायत...
भाजपा; इस्तीफे शुरू, चुनाव संचालन समिति अध्यक्ष गुरुजी ने जिला परिषद सदस्य पद छोड़ा

कांग्रेस; कोटड़ी पंचायत क्षेत्र में हुई हार की जिम्मेदारी तय होते ही शुरू होगी पार्टी में कलह


मांडलगढ़ उपचुनाव के नतीजे आ चुके हैं। कांग्रेस जीत से जोश में है तो भाजपा हार के कारणों पर मंथन में जुट गई है। यह तय है कि राजनीतिक समीकरण से ज्यादा नुकसान फिलहाल भाजपा को है। क्योंकि नतीजों के साथ ही विवादों की शुरूआत भी हो गई है। लेकिन कांग्रेस में भी आंतरिक संतुलन की चुनौती तो है ही बल्कि कोटड़ी क्षेत्र में हुई हार की समीक्षा रिपोर्ट सामने आने पर कलह होने की पूरी संभावना है।

राजनीितक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस की जीत और बीजेपी की हार के लिए जिला स्तर पर पार्टी में भीतरघात, जिला व प्रदेश स्तर पर प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वालों में ओवर कॉन्फिडेंस और निर्दलीय प्रत्याशी गोपाल मालवीय द्वारा दोनों ही पार्टियों के वोटों के समीकरण प्रभावित करना मुख्य कारण रहे हैं। इस चुनाव में कांग्रेस-बीजेपी की हार का अंतर 7.31% रहा जबकि निर्दलीय प्रत्याशी 22.79% वोट लाकर जीत-हार के अंतर से तीन गुना वोट लाकर दोनों ही संगठनों का गणित प्रभावित किया है। विधायक सीट के अलावा मांडलगढ़ व बिजौलिया के प्रधान और मांडलगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष भाजपा से होते हुए भाजपा चुनाव हार गई। इस विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक कीर्ति कुमारी की जीत से पहले ये कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती थी। ऐसे में कांग्रेस की झोली में दोबारा ये सीट आई है। भाजपा जिलाध्यक्ष दामोदर अग्रवाल और जिले के विधायकों में कई समय से विवाद है। उप चुनाव से ठीक पहले मांडलगढ़ में मंडल प्रभारी व अध्यक्ष बदलना व डीएमएफटी का आधे से ज्यादा बजट मांडलगढ़ में ही खर्च करना भी विषय हो सकता है।

कांग्रेस में बनेंगे नए समीकरण: कांग्रेस को इस जीत ने एकबारगी ताकत दी है। अब जिले में कांग्रेस के दो विधायक होने से अाधार बढ़ेगा। लेकिन राजनीतिक संतुलन भी चुनौती है। कांग्रेस कार्यालय में गुरुवार को कई समय बाद ऐसी भीड़ देखी गई।

धाकड़ को 10 माह में साबित करना होगा, हाड़़ा के लिए फिर टिकट पाना चुनौती

विकास के लिए मिलेंगे सिर्फ 2.25 करोड़... विधानसभा का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है। धाकड़ का कार्यकाल करीब 10 महीने होगा। अपने क्षेत्र में विकास कार्य करवाने के लिए फिलहाल बजट का इंतजार करना पड़ेगा। विधायक को क्षेत्र के लिए हर साल 2.25 करोड़ रुपए का बजट मिलता है। दिवंगत विधायक कीर्ति कुमारी 850 लाख रुपए के बजट की पहले ही अनुशंषा कर चुकी थीं। ऐसे में विकास के लिए अप्रैल तक इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि वित्तीय वर्ष 2018-19 का नया बजट मिलने तक किसी भी काम की अनुशंषा नहीं कर पाएंगे।

अब जनाधार बनाए रखने का संघर्ष ... जिला प्रमुख के तौर पर शक्तिसिंह हाड़ा का कार्यकाल अभी काफी बाकी है। इसलिए उनके पास जनाधार बनाए रखने का मौका भी होगा। जािहर सी बात है कि अब भी उनकी नजरें दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मांडलगढ़ पर टिकी रहेंगी। उपचुनाव की हार और पार्टी के भविष्य में बनने वाले समीकरण उनके टिकट में चुनौती बन सकते हैं। इसलिए अब हाड़ा को जनाधार और टिकट दोनों के लिए राजनीतिक संतुलन बनाने की जद्दोजदह करनी होगी।

चार साल में वोट की बदली गणित

प्रत्याशी पार्टी मत मिले प्रतिशत

कीर्ति कुमारी भाजपा 83084 50.07

विवेक धाकड़ कांग्रेस 64544 38.90

नोटा: 4893 2.95

2018 उप चुनाव की स्थिति फायदा/नुकसान

विवेक धाकड़ कांग्रेस 70146 39.50 +0.60

शक्ति सिंह भाजपा 57170 32.19 -17.88

नोटा 4350 2.39

परिणाम बताते हैं कि जनता को भाजपा सरकार पसंद नहीं है। जनता ने सेवा का मौका दिया है। पूरी निष्ठा से सेवा करेंगे। जीत में बूथ स्तर के कार्यकर्ता से प्रदेश स्तर के हर नेता का सहयोग रहा।

विवेक धाकड़, विधायक, मांडलगढ़

जनता ने जो निर्णय दिया है वह स्वीकार है। हार के कारणों की समीक्षा करेंगे। जिला प्रमुख होने के नाते जनता की सेवा मैं कर रहा हूं और करता रहूंगा।

शक्तिसिंह हाड़ा, भाजपा प्रत्याशी

भाजपा सरकार जनता से झूठे वादे करके जीती है। चार साल बाद जनता समझ गई है कि भाजपा के नेता केवल बातें ही करते हैं। अब राजस्थान से भाजपा के जाने का समय आ गया है।

अनिल डांगी, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस,

जीत का जश्न मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता।

जनता का फैसला विनम्रतापूर्वक स्वीकार है। जल्द ही बैठकर हार की समीक्षा करेंगे। जहां सुधार की गुंजाइश है वहां सुधार करेंगे।

दामोदर अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, भाजपा

शैक्षणिक योग्यता: विवेक धाकड़ बीए, एलएलबी व एमबीए हैं। एमडीएस यूनिवर्सिटी से एलएलबी में गोल्ड मैडलिस्ट रहे। विवेक खनन व्यवसायी हैं। मांडलगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक धाकड़ के पास कार नहीं है। वे दुपहिया वाहन ही इस्तेमाल करते हैं। उनके पास एक लोडर भी है। स्वयं के पास 13.15 लाख जबकि प|ी के पास 9.35 लाख रुपए नकद हैं। धाकड़ के पास 21 लाख की और प|ी पद्मिनी के पास 35 लाख रुपए के आभूषण, सोना और चांदी हैं। कृषि भूमि व जयपुर भीलवाड़ा में प्लॉट हैं।

मालवीय को छोड़ सभी की जमानत जब्त : निर्दलीय प्रत्याशी गोपाल मालवीय को छोड़कर उप चुनाव लड़ने वाले पांच अन्य सभी निर्दलीय प्रत्याशियों की भी जमानत जब्त हो गई है। विवेक धाकड़ का डाक मत पत्र की गणना में ही जीत का खाता खुल गया। इन मत पत्रों में तीन कांग्रेस व एक भाजपा को मिला। दो मत रिजेक्ट हो गए थे।

कोटड़ी पंचायत समिति की करीब 14 ग्राम पंचायतों में कांग्रेस प्रत्याशी धाकड़ पीछे रहे। कोटड़ी में धीरज के छोटे भाई नीरज गुर्जर की प|ी सुमन गुर्जर प्रधान हैं। कुछ बूथ ऐसे भी हैं जिनमें निर्दलीय प्रत्याशी गोपाल मालवीय को ज्यादा वोट मिले हैं। इस एरिया के पांच राउंड तक धाकड़ शक्ति सिंह हाड़ा से 6540 वोटों से पीछे चल रहे थे। शुरुआती रुझान में तो धाकड़ तीसरे नंबर पर चल रहे थे। कोटड़ी क्षेत्र के राउंड निकलने के बाद धाकड़ आगे निकल गए। पार्टी के अनुसार अब इसकी जिम्मेदारी तय होगी।

अब मेवाड़ में कांग्रेस के दो विधायक : 2013 में हुए विधानसभा में मेवाड़ क्षेत्र से कांग्रेस में केवल एक विधायक धीरज गुर्जर ही चुनाव जीते थे। अब मेवाड़ क्षेत्र व जिले में भी विवेक धाकड़ को मिलाकर दो विधायक हो जाएंगे। जिले की सात विधानसभा में छह पर भाजपा का कब्जा था लेकिन अब पांच पर ही भाजपा विधायक रह जाएंगे।

विवेक को गोपालपुरा, शक्ति को बीगोद में सर्वाधिक वोट : कांग्रेस प्रत्याशी विवेक धाकड़ को बूथ नंबर 264 गोपालपुरा में सर्वाधिक वोट मिले हैं जबकि कराड़ खेड़ी के बूथ नंबर 171 में उन्हें केवल 9 वोट प्राप्त हुए। भाजपा के शक्तिसिंह हाड़ा को बीगोद में बूथ नंबर 90 पर 565 जबकि मानगढ़ स्थित बूथ नंबर 217 पर महज 2 वोट प्राप्त हुए।

डाक मतपत्र वाली शीट गुम : सुबह 8 बजे डाक मतपत्रों की गिनती सहायक निर्वाचन अधिकारी तहसीलदार विजेंद्रसिंह ने शुरू कराई। कुल छह मतपत्र प्राप्त हुए थे। इनमें से दो रिजेक्ट कर दिए गए। शेष में से तीन कांग्रेस को जबकि 1 भाजपा को मिला। इस गणना के बाद शीट प्रत्याशी के प्रतिनिधियों के साइन करवा लिए गए थे। शीट को निर्वाचन अधिकारी की टेबल पर जमा कराना था लेकिन यह कहीं गुम हो गई। इस पर करीब पौन घंटे तक असमंजस रहा और अधिकारी सकते में आ गए। इसके बाद दूसरी शीट तैयार करनी पड़ी। पता चला कि सहायक कर्मचारी को यह दी थी और वह जेब में रखकर भूल गया।

धाकड़ के पास कार नहीं

पांच की जमानत जब्त

यहां पीछे रही कांग्रेस

किसको कहां ज्यादा वोट

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Web Title: मांडलगढ़ उपचुनाव
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