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गंगापुर | पर्युषण पर्व का छठा दिन बुधवार को जप

गंगापुर | पर्युषण पर्व का छठा दिन बुधवार को जप दिवस के रूप में मनाया जाएगा। शाम को पॉवर ऑफ पॉजिटिविटी पर कार्यशाला...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 05:10 AM IST
गंगापुर | पर्युषण पर्व का छठा दिन बुधवार को जप दिवस के रूप में मनाया जाएगा। शाम को पॉवर ऑफ पॉजिटिविटी पर कार्यशाला होगी। पांचवें दिन 70 वर्षीय प्रवीण नौलखा ने 8 दिन निराहार तपस्या की। आमली निवासी 80 वर्षीय जतन चपलोत ने 5 की तपस्या की। श्रावक-श्राविकाओं ने उपवास व तेले की तपस्या की। मुनि सुरेश कुमार हरनावां ने पर्युषण पर्व के पांचवें दिन अणुव्रत चेतना दिवस पर कहा कि आचार्य तुलसी ने देश की आजादी के साथ गरीब की झोपड़ी से राष्ट्रपति भवन तक इंसान को सही मायने में इंसान बनाने के महाअभियान अणुव्रत का शंखनाद किया। अणुव्रत ने सांप्रदायिक फसादों के बीच एक एेसे धर्म को जन्म दिया जो फिरकापरस्ती की दीवारों को तोड़कर मानवता की हिफाजत के लिए संकल्पबद्घ हैं। मुनि आचार्य तुलसी चौक स्थित कालू कल्याण कुंज में अणुव्रत से क्या मिलेगा विषय पर बोल रहे थे।

पर्युषण पर्व विशेष

महापर्व पर्युषण के प्रत्येक दिन का विशेष महत्व है। दैनिक भास्कर के आग्रह पर साध्वी डॉ. सुशील ‘शशि’ ने पर्व का महात्म्य बताया।

साध्वी परिचय

जन्म: देवगढ़ (राजसमंद)

संवत: 2016

माता-पिता: गट्टू देवी-हस्तीमलजी

दीक्षा आयु: 7 साल

स्थान: रतलाम

अंतर यात्रा का आह्वान है प्रतिक्रमण

यात्री-जो निरंतर गतिशील है। वह जिस पथ की ओर बढ़ता है। चलता है। हम उसे यात्रा करते हैं। यात्रा प्रमुखत: दो रूपों में होकर गुजरती है। बहिर्यात्रा और अंतरयात्रा। बहिर्यात्रा के लिए आवश्यक है कि चलना और अंतरयात्रा के लिए ठीक इसके विपरीत-ठहर जाना। प्रतिक्रमण अंतरयात्रा का आव्हान है, अविवेक के पैबंद लगी अज्ञान की स्याह चादर ओढ़कर सोने वाली पावन चेतना के मन द्वार पर दी जाने वाली दस्तक है। स्वभाव के गेह से दूर खड़े देह को चेतना का आमंत्रण है। कषाय के उलझे तारों को सुलझाने और राग द्वेष के तंतुओं को समटने की प्रक्रिया है।

प्रतिक्रमण: क्षितिज के आलोकित होने पर पंछी का अनंत आकाश में उड़ना, आनंद विहार करना एवं सूर्य के अस्ताचल की ओर लौट आना, पंछी की उड़ान और थकान ही चेतना का अतिक्रमण से प्रतिक्रमण है। प्रतिक्रमण वर्तमान की वेदी पर अतीत की आलोचना और भविष्य की अभ्यर्थना है। जब अतीत के दुष्कृत्यों का आलोचना रूप स्नान होता है तब प्रतिक्रमण का भाव साधना का आकार ग्रहण करता है। कांत दृष्टा तीर्थंकर महावीर की जन कल्याणी वाणी अंतरयात्रा के अंतर्गत प्रतिकमण के माध्यम से पीछे लौटने का नियंत्रण देती है।

संकेत: प्रत्येक बहिर्यात्रा का अर्थ आगे बढ़ना होता है। लेकिन इस अंतरयात्रा का संकेत पीछे लौटना है। यहां पीछे लौटना मंजिल से दूर होना नहीं है। मंजिल से दूर होने का अर्थ आगे बढऩा, लक्ष्य के अनुसंधान का पीछे छूट जाना। तीस मुहूर्त में से अट्ठाइस मुहूर्त तक नेह, देह, गेह में उलझे रहे। पर एक मुहूर्त सुबह एक मुहूर्त सांझ का स्व भाग केंद्र में प्रवेश करें। इसलिए ही प्रतिक्रमण साधना का द्रिकालिक विधान हुआ है। रात का अतीत प्रात: के एवं दिन का अतीत सांझ के अतिक्रमण का प्रतिक्रमण में ले जाता है।

(साध्वी ने जैसा प्रहलाद तिवारी को बताया)

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वाणी में सत्य न व मार्धुय न हो तो जहर: सौभाग्य मुनि

भीलवाड़ा | शांतिभवन में पर्युषण पर्व के छठे दिन श्रमण संघ के महामंत्री सौभाग्य मुनि ‘कुमुद’ ने सत्य दिवस पर प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि धर्म की किताबों को पढ़ने व रटने मात्र से सत्य का ज्ञान नहीं हो सकता। सत्य की महिमा इतनी विराट है कि उसका ठीक-ठीक शाब्दिक विवेचन करना संभव नहीं। आसन बात यह है कि सत्य बोलने में हमें कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता। मन को सत्य में बांधकर रखने पर जीवन पवित्र बन सकता है। मन को साधकर रखना चाहिए। हम असत्य के अंधेरे को सत्य से प्रकाशित कर परम सत्य का ज्ञान पा सकते हैं। धर्मसभा में मदन मुनि ने अतंसूत्र का वाचन किया। साध्वी रवि रश्मि, विद्याश्री, संभव मुनि, कोमल मुनि ने भी उद्बोधन दिया। श्री संघ शांतिभवन के मंत्री नवरतनमल संचेती ने बताया कि अर्पित कोठरी ने 11 उपवास, निर्मला जैन ने 8, टीना सुराणा ने 6 उपवास के पचखाण लिए। दोपहर में शांति जैन महिला मंडल की ओर से अंतगढ़ सूत्र पर प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता हुई।

प्राज्ञ भवन: आज मनाएंगे दया दिवस

रोटी की भूख मिटाना सरल लेकिन पद की भूख मिटाना मुश्किल: प्रियदर्शन

योग्य व्यक्ति को पद दिया जाना उचित है, लेकिन अयोग्य व्यक्ति के हाथ पद लग जाए तो वह दुरुपयोग ही करेगा। पानी की प्यास को मिटाना आसान है, रोटी की भूख मिटाना भी सरल है, लेकिन पद की भूख मिटाना काफी मुश्किल है। यह कहना है संत र| प्रियदर्शन मुनि का।

मुनि मंगलवार को प्राज्ञ भवन में चातुर्मास धर्मसभा में पर्युषण के छठे दिन प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में व्यक्ति पद और नाम के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। इसका परिणाम चाहे गलत हो अथवा सही। पद की चाह में आदमी को अच्छाई बुराई का ध्यान नहीं रहता है। कोई भी गलत कार्य आसानी से कर बैठता है, ऐसा करना खुद के लिए तो परेशानी का सबब है साथ ही समाज को भी उससे तकलीफ उठानी पड़ती है। सौम्यदर्शन मुनि ने कहा कि जिसके साथ धर्म है वह कभी नहीं घबराता है।

पर्युषण के छठे दिन एकासन दिवस के रूप में मनाया। श्रावक-श्राविकाओं ने एकासन तप किए। बुधवार को दया दिवस मनाया जाएगा।

महावीर भवन में प्रवचन; आत्मा के भीतर झांकने की प्रक्रिया का पर्व पर्युषण

महावीर भवन में डॉ. सुशील कंवर ने कहा कि बाहर से अंदर झांकने का नाम ही पर्व पर्युषण की सार्थकता है। दूसरों की बुराई करना सरल है किंतु अपने आप को देखना कठिन है। सच्चा सुख अपने अंतर मे झांकने में है। जो खोजना है, अपने अंतर में खोजो। दूसरों के दोष खोजने के बजाय स्व दोषों को खोज कर चिंतन करो। प्रवचन से पूर्व साध्वी श्रद्धा ने अंतकृत सूत्र का वाचन किया। बुधवार को पन्नालाल महाराज की जयंती मनाई जाएगी।

शांति भवन में पर्युषण महापर्व के छठे दिन अंतगढ़ सूत्र पर हुई प्रश्नोत्तरी

प्रज्ञा भारती: तेरापंथ धर्मसंघ में पर्युषण का पांचवा दिन

अणुव्रत स्वस्थ भारत के निर्माण में सहयोगी

प्रज्ञा भारती में मंगलवार को पर्युषण का पांचवा दिन अणुव्रत दिवस के रूप में मुनि सुखलाल के सान्निध्य में मनाया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में सभी 24 तीर्थंकरों में सबसे ज्यादा कष्ट भगवान महावीर ने सहन किए। महल और अट्टालिकाओं का वैभव त्यागकर गांव, दुर्गम जंगल और गुफाओं में उन्होंने साधना की। भगवान महावीर ने साधना से शरीर को ऐसा तपाया कि पूर्वजन्म के सब कर्म बंध टूट गए। वर्तमान में भारत में आंतकवाद, भ्रष्टाचार अादि जहरीले तत्व उग्र हैं। ऐसे में अणुव्रत ही है जो व्यक्ति को सही पथ दिखाकर सुदृढ़ और स्वस्थ भारत के निर्माण में सहयोगी बन सकता है। मुनि मोहजीतकुमार ने कहा कि अणुव्रत आंतरिक शुद्धि के साथ जुड़ी भाव धारा है जो व्यक्ति के जीवन की हर समस्या का समाधान कर देती है। मुनि भव्यकुमार ने 12 व्रत और आगम आधारित प्रवचन शैली से समाज को लाभान्वित किया। बाल मुनि जयेशकुमार ने तीर्थंकर चरित्र के वर्णन में 19वें तीर्थंकर मल्लीकुमारी के जीवन के बारे में बताया। मुनिश्री के सान्निध्य में 70 तेले हुए। नवकार मंत्र का अखंड जाप, ध्यान स्वाध्याय आदि हुए।

जप दिवस आज मनाएंगे, नौलखा ने अठाई तप किया, श्रावकों ने उपवास व तेला तपस्या की


आरके कॉलोनी के आदिनाथ मंदिर में हर दिन होंगे धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम

दिगंबर जैन आज मनाएगा रोठ तीज, दशलक्षण पर्व 14 से

दिगंबर जैन समाज में रोठ तीज पर्व बुधवार को मनाया जाएगा। 14 सितंबर से दशलक्षण पर्व प्रारंभ होंगे। आरके कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हर दिन विभिन्न कार्यक्रम होंगे।

ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि रोठ तीज पर्व को त्रैलोक्य तीज भी कहते हैं। इस दिन भूत, भविष्य एवं वर्तमान के 24-24 तीर्थंकरों की पूजा की जाती है। इस दिन जैन परिवारों में रोठ एवं खीर बनाई जाती है। उपाध्यक्ष महेंद्र सेठी ने बताया कि मूलनायक प्रतिमा पर 108 रिद्धि मंत्रों से महामस्ताकाभिषेेक किया जाएगा। सचिव अजय बाकलीवाल ने बताया कि प्रतिदिन सुबह 6.15 बजे अभिषेक, शांतिधारा, पूजन होगा। दिन में 2 से 3 बजे तक स्वाध्याय, शाम 5.45 से 6.45 बजे तक प्रतिक्रमण, भक्तामर आरती तथा 7.45 से 8.45 तक दशलक्षण धर्म पर प्रवचन होगे। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। संयुक्त सचिव सुंदर कोठारी ने बताया कि नागपुर से महावीर जैन एंड पार्टी की ओर से पहले पांच दिन अहिंसा के राही, अनमोल समय, संत समागम का महत्व, स्वार्थी दुनिया, प्यास आदि नाम से नृत्य नाटिकाओं की प्रस्तुति होगी। 19 सितंबर को सुगंध दशमी पर श्री आदिनाथ नवयुवक मंडल की ओर से दिन में 2 बजे से शाकाहार वाहन रैली एवं सायं संगीत एवं नृत्यमय भक्तामर आरती होगी। 20 सितंबर को आदिनाथ महिला मंडल की ओर से धार्मिक विचित्र वेषभूषा, 21 सितंबर को संस्कार पाठशाला की ओर से अध्ययन से आध्यात्म की ओर, 22 सितंबर को नवयुवक मंडल की ओर से धार्मिक कार्यक्रम होंगे।

100 तपस्वियों ने लिए उपवास के प्रत्याख्यान

भीलवाड़ा | जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ के तत्वावधान में सोनी धर्मशाला में पर्युषण पर्व के छठे दिन मंगलवार को आचार्य पद्मभूषण र|सूरीश्वर ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने साधना काल के संदेश में कहा कि जहां अप्रीति हो वहां रहना नहीं। जीव मात्र के प्रति करूणा भाव रखना, जीवन के अंदर उदार बनना, दीन हीन एवं अभावों का उद्धार करना। इससे पूर्व सुबह 7:30 बजे स्नात्र पूजा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर 100 तपस्वियों ने उपवास के प्रत्याख्यान लिए। संघ के अनिल गुगलिया ने बताया कि बुधवार सुबह 9 बजे प्रवचन और शाम को प्रतिक्रमण एवं परमात्मा की भक्ति होगी।

तेरापंथ युवक परिषद शुरू करेगा आचार्य तुलसी मानव सेवा केंद्र

भीलवाड़ा | तेरापंथ युवक परिषद ने प्रज्ञा भारती में मुनि सुखलाल व मोहजीत कुमार के सान्निध्य में मंगलवार को तुलसी मानव सेवा केंद्र एवं नेत्रदान महादान प्रकल्प का आगाज किया। अध्यक्ष गौतम दुगड़ ने बताया कि सेवा केंद्र की स्थापना शीघ्र की जाएगी। केंद्र पर कई सेवा उपकरण जैसे पार्थिव देह के लिए आइस बॉक्स, फ्रीज, अस्पताल बेड, वॉकर, व्हील चेयर इत्यादि सर्वसमाज के लिए उपलब्ध रहेंगे। मंत्री विमल पीतलिया ने बताया कि नेत्रदान- महादान, अंगदान एवं देहदान प्रोजेक्ट का शुभारंभ भी किया गया।