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यूआईटी के पूर्व चेयरमैन शर्मा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष, गुटबाजी-चुनाव जिताना चुनौती

मभास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा यूआईटी के पूर्व चेयरमैन रामपाल शर्मा कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष होंगे। शनिवार को...

Dainik Bhaskar

May 06, 2018, 05:30 AM IST
यूआईटी के पूर्व चेयरमैन शर्मा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष, गुटबाजी-चुनाव जिताना चुनौती
मभास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

यूआईटी के पूर्व चेयरमैन रामपाल शर्मा कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष होंगे। शनिवार को कांग्रेस ने आठ जिलों के नए जिलाध्यक्षों को घोषणा की, जिसमें भीलवाड़ा का नाम आया। इनसे पहले 2011 से अनिल डांगी कांग्रेस की जिम्मेदारी संभाले हुए थे। संगठन में लंबे समय से बदलाव की कवायद चल रही थी, जो अब पूरी हुई है।

जिलाध्यक्ष के नए नाम की घोषणा होते ही बधाई देने के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व पदाधिकारी उनके निवास पर पहुंचे। इनमें पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश व्यास, नगर परिषद नेता प्रतिपक्ष समदु देवी, ब्लॉक कार्यकारी अध्यक्ष शिव राम खटीक, महेश सोनी, अनिल राठी एवं हेमराज आचार्य आदि शामिल रहे। जिलाध्यक्ष नियुक्त होने के बाद शर्मा ने कहा कि संगठन को मजबूत बनाएंगे। सभी नेताओं को एकजुट करके इस साल होने वाले चुनाव में जीत हासिल करना एकमात्र लक्ष्य है। भाजपा के साढ़े चार साल के कार्यकाल की नाकामयाबी जनता के सामने लाएंगे। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इनकी नियुक्ति पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी की वजह से हुई है। कांग्रेस ने जिले के ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी की तरफ खींचने की कवायद की है।

राजनीितक जानकारों का कहना है कि शर्मा की नियुक्ति में सीपी जोशी की भूमिका होने का एक और कारण यह है कि जनवरी 2018 में हुए मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव के दौरान शर्मा की सक्रिय भूमिका रही थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने के लिए काफी प्रयास किए थे। चूंिक पहले इनकी चर्चा आरसीए चुनाव लड़ने की थी। बाद में सीपी जोशी ने वह चुनाव लड़ा। इस वजह से एक पद मिलना तय माना जा रहा था।

एआईसीसी महासचिव अशोक गहलोत ने की घोषणा


चुनौती : कमजोर कांग्रेस में जान फूंकना और खेमों में बंटी पार्टी को एक साथ लाना... इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा चुनाव से पहले कमजोर पड़ी कांग्रेस में जान डालना है। सभी नेताओं को साथ लेकर चलना चुनौती है क्योंकि पार्टी अलग-अगल खेमों में बंटी हुई है, जिसे खत्म करना होगा। पिछले विधानसभा चुनाव में सात में से केवल एक ही जगह विधायक जीत सका। हालांकि मांडलगढ़ उपचुनाव के बाद यह संख्या दो हो गई है। 2018 के अंत में होने वाले चुनाव में टिकट वितरण में इनकी भूमिका होगी, जिसमें खेमों में बंटे नेताओं से तालमेल बनाने के लिए संघर्ष भी एक चुनौती मानी जा रही है।

रामपाल शर्मा युवक कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष, पूर्व कार्यकारी जिलाध्यक्ष, सीसीबी चेयरमेन और यूआईटी चेयरमैन रहे चुके हैं। 2013 में मांडल से विधानसभा चुनाव लड़ा, जिसमें हार गए थे। अभी पीसीसी मेंबर भी हैं। आरसीए अध्यक्ष का भी चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। अभी आरसीए में वेन्यू मैनेजर हैं। इनकी कार्यकर्ताओं में पकड़ और प्रदेश व केंद्रीय नेताओं से अच्छे संपर्क माने जाते हैं। यूआईटी चेयरमैन के कार्यकाल में शहर में कई विकास कार्य करवाए तो सफल चुनाव संचालक व रणनीतिकार भी माने जाते हैं। इन्हें सभी विधानसभाओं का जातिगत और क्षेत्र के अनुसार अच्छी जानकारी है।

आगे क्या : क्या मांडल से चुनाव लड़ेंगे...क्योंकि यहां से चार दावेदार और इसी सीट पर सबसे ज्यादा द्वंद्व... शर्मा मांडल क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन सवाल यह है कि जिला अध्यक्ष बनने के बाद क्या अब वे विधानसभा चुनाव लड़ेंगे? कांग्रेस में सबसे ज्यादा पेचीदगी भी मांडल विधानसभा सीट को लेकर हैं क्योंकि यहां पर कांग्रेस के चार-चार उम्मीदवार तैयारी में हैं| इनमें से एक डेयरी चेयरमैन रामलाल जाट भी हैं| टिकट को लेकर कांग्रेस में सबसे ज्यादा द्वंद इसी सीट पर माना जा रहा है।

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