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ये है पन्ना टाइगर रिजर्व की दादी वत्सला

मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व का दावा है कि यहां के हिनौता कैंप में रह रही वत्सला दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 05:30 AM IST

ये है पन्ना टाइगर रिजर्व की दादी वत्सला
मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व का दावा है कि यहां के हिनौता कैंप में रह रही वत्सला दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी है। उसकी उम्र करीब 95 साल है, पर उसका जन्म प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण सबसे बुजुर्ग हथिनी होने का दावा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकाॅर्ड्स में दर्ज नहीं हो पा रहा है। गिनीज बुक में सर्वाधिक उम्रदराज हाथी होने का रिकाॅर्ड 86 साल जीने वाले ताइवन के लिन वांग के नाम पर है। वत्सला 2003 में रिटायर हो चुकी है। फिलहाल वह कैंप में रहकर पार्क के दूसरे हाथियों के बच्चों के लालन-पालन में एक बुजुर्ग दादी की तरह काम कर रही है। अभयाण्य की जब अन्य हथिनी जंगल में काम पर चली जाती हैं। तब उस दशा में वत्सला दादी की भूमिका निभाती है और बच्चों की देखरेख के साथ उनके साथ खेलती भी है। इतना ही नहीं वह अभयारण्य में आने वाले पर्यटकों के बीच खासी लोकप्रिय भी है। अभयारण्य के फील्ड डायरेक्टर रविकांत मिश्रा का कहना है कि वत्सला के जन्म का कोई लिखित दस्तावेज हमारे पास नहीं है। केरल में नीलांबुज वन मंडल अब उत्तर और दक्षिण दो भागों में विभाजित हो गया है। वहां से वत्सला के संबंध में दस्तावेज हासिल करने के लिए पत्राचार के साथ ही दोनों वनमंडलों में टीमें भेजी गई थीं। वहां वत्सला के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं मिला। इस कारण हम वत्सला का सबसे बुजुर्ग हथिनी होने का रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। उसका नाम गिनीज बुक में दर्ज कराने के लिए उसके जन्म के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।

अधिकारियों का दावा- 95 साल उम्र और दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी है; गिनीज रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज कराने के लिए सबूत जुटाने शुरू किए

86 साल जिंदा रहे ताइवान के हाथी लिन वांग के नाम पर दर्ज है वर्ल्ड रिकाॅर्ड वत्सला का जन्म प्रमाण पत्र नहीं होने से दर्ज नहीं हो पा रहा है गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

केरल में हुआ जन्म, 1971 में होशंगाबाद लाया गया

वत्सला का जन्म केरल के जंगल में हुआ था। यहां के नीलांबुज जंगल से उसे पकड़ा गया था। शुरुआत में उससे यहां लकड़ियां उठवाई जाती थीं। 1971 में उसे केरल से मध्य प्रदेश के होशंगाबाद लाया गया। इसके बाद वत्सला को 1993 में पन्ना टाइगर रिजर्व में लाया गया। यहां बाघों की ट्रैकिंग का काम वत्सला बखूबी करती रही। 10 साल नियमित सेवा के बाद ढलती उम्र के कारण उसे 2003 में रिटायर कर दिया। पिछले 25 सालों से वत्सला पन्ना में ही है। तब से वह अन्य हाथियों के बच्चों की देखरेख बखूबी करती है।

दांतों से किया है उम्र का आकलन |वत्सला की पिछले 15 सालों से नियमित देखरेख करने वाले पन्ना टाइगर रिजर्व के डाॅ. संजीव गुप्ता ने बताया कि वन्य प्राणियों की उम्र का आकलन उनके दांतों के घिसने और गिरने से किया जाता है। एशियाई हाथी के दांत 60 से 70 साल की उम्र के बीच गिर जाते हैं। वत्सला के दांत 1990 से 95 के बीच घिसने के बाद पूरी तरह से गिर गए थे। इस आधार पर दावा है कि वत्सला की दुनिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी है।

वत्सला के दांत गिर चुके हैं, इसलिए दलिया और गुड़ खाती है

डॉॅ. संजीव गुप्ता ने बताया कि वत्सला के दांत गिर चुके हैं। पेट के दो ऑपरेशन होने से पाचन तंत्र भी कमजोर हो गया है। वह घास कम खा पाती है। ‌टाइगर रिजर्व में उसके खाने की अलग से व्यवस्था की गई है। उसे सुबह दलिया, गुड़, नमक-तेल और शाम को आटा, चावल, गुड़, नमक, तेल, नारियल गोला और चने के लड्‌डू बनाकर खिलाए जाते हैं।

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