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जनप्रतिनिधियों के ‌सुझाए 249 काम के प्रस्ताव अफसरों ने रोके

भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में अब काम निरस्त होने को लेकर नया...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 05:30 AM IST
भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में अब काम निरस्त होने को लेकर नया विवाद हो गया है। पहले ट्रस्ट में सरकार की ओर से सदस्यों की नियुक्ति और फिर जिले की सात विधानसभाओं के बजाय मांडलगढ़ विधानसभा में ही अधिक काम कराने को लेकर हुए विवाद के बाद अब जनप्रतिनिधियों की ओर से भेजे गए काम निरस्त करने को लेकर विवाद है।

भाजपा समर्थित सरपंच, प्रधान, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की ओर से दिए गए 2,135 प्रस्तावों में से 47.55 करोड़ रुपए के 249 प्रस्तावों को अनुपयोगी बताते हुए संबंधित विभाग के अफसरों ने खारिज कर दिए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जो काम विभागों को भेजे गए थे वे किसी भी तरह से उपयोगी नहीं है। इसलिए इनको खनिज किया जाता है। खारिज किए 249 कामों में से अधिकांश प्रस्ताव गांवों में सामुदायिक भवन, कबूतर खाना, श्मशान घाट का निर्माण एवं मरम्मत एवं धार्मिक स्थलों से संबंधित निर्माण कार्य शामिल थे। इसे लेकर कई जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रमुख व ट्रस्ट के सदस्य सचिव एवं खनि अभियंता के सामने विरोध भी दर्ज कराया है।

सबसे ज्यादा 85 काम शिक्षा विभाग ने खारिज किए, भाजपा जनप्रतिनििधयों ने दिए थे 47.55 करोड़ के प्रस्ताव

जानिए कौनसे विभाग में कितने कार्यों के प्रस्ताव आए और कितने खारिज हुए








भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में अब काम निरस्त होने को लेकर नया विवाद हो गया है। पहले ट्रस्ट में सरकार की ओर से सदस्यों की नियुक्ति और फिर जिले की सात विधानसभाओं के बजाय मांडलगढ़ विधानसभा में ही अधिक काम कराने को लेकर हुए विवाद के बाद अब जनप्रतिनिधियों की ओर से भेजे गए काम निरस्त करने को लेकर विवाद है।

भाजपा समर्थित सरपंच, प्रधान, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की ओर से दिए गए 2,135 प्रस्तावों में से 47.55 करोड़ रुपए के 249 प्रस्तावों को अनुपयोगी बताते हुए संबंधित विभाग के अफसरों ने खारिज कर दिए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जो काम विभागों को भेजे गए थे वे किसी भी तरह से उपयोगी नहीं है। इसलिए इनको खनिज किया जाता है। खारिज किए 249 कामों में से अधिकांश प्रस्ताव गांवों में सामुदायिक भवन, कबूतर खाना, श्मशान घाट का निर्माण एवं मरम्मत एवं धार्मिक स्थलों से संबंधित निर्माण कार्य शामिल थे। इसे लेकर कई जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रमुख व ट्रस्ट के सदस्य सचिव एवं खनि अभियंता के सामने विरोध भी दर्ज कराया है।

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