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मनीष व्यास/मनोज व्यास | भीलवाड़ा

10 लाख की मशीन खराब हुई तो 1.80 करोड़ में दिया 30 साल का टेंडर, फिर भी नगरपरिषद की गाड़ी उठा रही कचरा, अजमेर के बजाय यहीं...

Dainik Bhaskar

May 04, 2018, 05:30 AM IST
मनीष व्यास/मनोज व्यास | भीलवाड़ा
10 लाख की मशीन खराब हुई तो 1.80 करोड़ में दिया 30 साल का टेंडर, फिर भी नगरपरिषद की गाड़ी उठा रही कचरा, अजमेर के बजाय यहीं निस्तारण


मनीष व्यास/मनोज व्यास | भीलवाड़ा

महात्मा गांधी अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए अजमेर की सेल्स प्रमोटर कंपनी को 30 साल के लिए 1.80 करोड़ में टेंडर दिया हुआ है। 2006 से कंपनी काम कर रही है। शर्त के अनुसार हर रविवार को अजमेर से वाहन आता है और बायोमेडिकल वेस्ट ले जाता है। उसमें पीली-नीली थैली वाला वेस्ट होता है। प्रबंधन की ओर से कंपनी को प्रति बेड 100 रुपए 10 पैसे में ठेका दिया था। इस तरह औसतन प्रति माह करीब 30 हजार रुपए का भुगतान होना बताया जा रहा है।

भास्कर ने एक माह तक कंपनी के वाहन, अस्पताल के बायो मेडिकल वेस्ट और नगर परिषद के वाहन पर नजर रखी। इसमें चौंकाने वाली सच्चाई सामने आ गई। अस्पताल का बायो मेडिकल वेस्ट तो कागजों में ही अजमेर जा रहा है। हकीकत में नगर परिषद की गाड़ी ही यह वेस्ट उठाकर डिस्पोज करती है। यहां 2010 में इंसीनरेटर मशीन लगाई गई थी। यह मशीन कुछ साल ही चली और बाद में खराब हो गई। अब मशीन पांच साल से खराब पड़ी है। इसी कारण यहां बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण नहीं हो पा रहा। प्रति महीने 30 हजार रुपए का भुगतान किया जा रहा है। इस हिसाब से अब तक 43 लाख रुपए से ज्यादा कंपनी को दिए जा चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक 10 से 15 लाख रुपए में मेडिकल वेस्ट के लिए इंसीनरेटर मशीन आ सकती है। फिर अस्पताल प्रबंधन ने मशीन क्यों नहीं लगवाई?

अब तक Rs.43 लाख का पेमेंट किया कंपनी को

नगर परिषद की गाड़ी में जेसीबी से भरते हैं बायोमेडिकल वेस्ट

अस्पताल

एमजीएच के पीएमओ डॉ. एसपी आगीवाल ने कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए अजमेर की सेल्स प्रमोटर कंपनी को हर माह Rs.30 हजार का भुगतान किया जा रहा है। बायो मेडिकल वेस्ट कंपनी की गाड़ी ले जा रही है। इंसीनरेटर चिमनी खत्म हो गई है। नई खरीदेंगे। इसके लिए अजमेर प्रपोजल भेजा गया है।

भास्कर एक्सपर्ट

इंफेक्शन का खतरा... केशव पोरवाल हॉस्पिटल के एमडी फिजिशियन डाॅ. दिनेश शर्मा ने बताया अस्पताल में वेस्ट को खुले में रखने से जीवाणु सांस के साथ शरीर में जाते हैं। इससे लोगों को टीबी, कैंसर, अस्थमा, हेपेटाइटिस बी-सी, टाइफाइड, हैजा, चर्मरोग एवं आई इंफेक्शन का खतरा है। वेस्ट जलने से जहरीली गैस बनती हैं। हृदय रोग हो सकता है।

भास्कर ने एक माह तक अस्पताल से ले जाने वाले बायोमेडिकल वेस्ट पर नजर रखी तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई... अस्पताल के वेस्ट को परिषद की गाड़ी उठा कर ले जाती है न कि कंपनी की

परिषद

नगर परिषद के एईएन व कार्यवाहक स्वास्थ्य अधिकारी अखेराम बड़ोदिया ने कहा कि एमजीएच के पीछे मोर्चरी में जो भी कचरा बायो मेडिकल वेस्ट है वह हर दिन परिषद की गाड़ी से उठाया जाता है।

कंपनी

सेल्स प्रमोटर कंपनी के अनिल जैन ने कहा, कंपनी को 30 साल के लिए टेंडर दिया है। 2006 में काम प्रारंभ किया। हर रविवार को भीलवाड़ा आकर गाड़ी बायो वेस्ट ले जाती है। हम पीली-नीली थैली वाला वेस्ट ले आते हैं। हमारा नगर परिषद से कोई लेना देना नहीं है। 100 रुपए 10 पैसे प्रति बेड के हिसाब से भुगतान होता है। एमजीएच में कुल 420 बेड हंै।

कार्रवाई करेंगे... प्रदूषण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी राकेश गुप्ता के अनुसार एमजी अस्पताल प्रबंधन हर तीन महीने में रिपोर्ट भेजता है। वहां का बायो वेस्ट अजमेर से निस्तारित हो रहा है। अगर वहां कचरा एवं बायो मेडिकल वेस्ट फेंका और खुले में जलाया जा रहा है, तो जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।

कागजों में फर्म चला रही गाड़ी, अजमेर ले जाया जाता है वेस्ट, प्रबंधन ने आंखें मूंद कर दे दिए लाखों रुपए

एमजीएच प्रबंधन की ओर से बताया जा रहा है कि यहां के बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए हर दिन अजमेर सेल्स प्रमोटर कंपनी की गाड़ी आती है। जिसमें अस्पताल का मेडिकल वेस्ट भरकर अजमेर ले जाकर निस्तारण किया जाता है। इसके लिए कंपनी को हर माह Rs.30 हजार दिए जाते हैं।

मोर्चरी के पास साधारण कचरे के साथ बायोमेडिकल वेस्ट फेंकते हैं - एमजी अस्पताल के पीछे मोर्चरी के पास साधारण कचरा एवं बायोमेडिकल वेस्ट को फेंका का जा रहा है। इसके पास ही मातृ एवं शिशु अस्पताल में एनआइसीयू वार्ड है, जहां हर दिन करीब 25 से 30 गंभीर नवजात बच्चे रेडियम वार्मर मशीन पर रखे जाते है। पास में प्रसूता और शिशु वार्ड भी है। जहां करीब 200 प्रसूताएं एवं 100 से अधिक शिशु भर्ती रहते हैं। उनके साथ परिवार के सदस्य होते है। वही पास में मेल मेडिकल वार्ड, महिला वार्ड, आईसीयू, डायलिसिस वार्ड है। एमजी के पास मोर्चरी में एमजी का मेडिकल वेस्ट फेंकने एवं जलाने से इसका धुआं वार्डों में जाता है।


रोज 1500

मरीज आते हैं एमजीएच के ओपीडी में

700

से अधिक मरीज गांवों से आते हैं

सामान्य बीमारी से लेकर गंभीर मरीजों के साथ उनके परिजन भी आते हंै। रोज यहां से बायोवेस्ट निकलता है, उसे खुले में जलाते हैं। जिससे मरीजों एवं उनके परिजनों में संक्रमण फैलने का का खतरा बना रहता है।

300

से अधिक रोज भर्ती होते हैं

मनीष व्यास/मनोज व्यास | भीलवाड़ा
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