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बेहोश पैंथर को पिंजरे में कैद करती टीम

धनवाड़ा क्षेत्र में मेज नदी के पास सुबह 6:30 बजे दिखा पैंथर, कोटा से आई टीम ने शाम 6:30 बजे ट्रंकुलाइज कर पकड़ा, पैंथर को...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 05, 2018, 05:40 AM IST

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    धनवाड़ा क्षेत्र में मेज नदी के पास सुबह 6:30 बजे दिखा पैंथर, कोटा से आई टीम ने शाम 6:30 बजे ट्रंकुलाइज कर पकड़ा, पैंथर को कोटा ले गए


    बेहोश पैंथर को पिंजरे में कैद करती टीम

    मांडलगढ़. धनवाड़ा में मेज नदी के पास युवकों पर हमला करने वाले पैंथर को ट्रंकुलाइज करने के बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने पिंजरे में रखा।

    पानी की तलाश में आया पैंथर, ग्रामीणों ने पत्थर फेंके तो पेड़ पर चढ़ा, दो युवकों पर झपट्टा मार घायल किया, 12 घंटे बाद पकड़ा

    एक बार पकड़ा तो भागा, दुबारा 3 किमी पीछा करके पकड़ा

    वन अधिकारी का आरोप- हमें मांगने पर भी नहीं मिला जाब्ता

    भास्कर संवाददाता | खटवाड़ा/मांडलगढ़

    मांडलगढ़ रेंज के वन क्षेत्र माल का खेड़ा पंचायत क्षेत्र से 2 किलोमीटर दूर मेज नदी किनारे शुक्रवार सुबह 6:30 बजे ग्रामीणों ने पैंथर देखा। धनवाड़ा के आबादी क्षेत्र में पैंथर के घुसने की आशंका पर ग्रामीणों ने उसका पीछा कर जंगल में भगाने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने पैंथर पर पत्थर बरसाए। घबराए पैंथर ने एक युवक पर झपट्टा मारकर घायल कर दिया। इससे ग्रामीण सहम गए। मांडलगढ़ से वन विभाग की टीम पहुंची। टीम ने पैंथर को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों की भीड़ देखकर पैंथर नदी के पास स्थित पेड़ पर चढ़ गया। कुछ देर बाद पैंथर पेड़ से उतरा तो ग्रामीणों ने फिर उसका पीछा शुरू कर दिया। लोगों को पीछे आता देखकर पैंथर एक चट्टान के पीछे छुप गया। वन अधिकारियों ने पैंथर को ट्रंकुलाइज करने के लिए कोटा से टीम बुलाई। टीम ने पैंथर को पकड़ने का प्रयास किया। इस दौरान पैंथर ने एक अन्य युवक पर झपट्टा मारकर घायल कर दिया। कोटा की टीम ने शाम 6:30 बजे पैंथर को ट्रंकुलाइज कर पकड़ लिया। पैंथर के हमले से घायल एक युवक को मांडलगढ़ जबकि दूसरे युवक को श्यामपुरा अस्पताल में भर्ती कराया।

    धनवाड़ा के जंगल में पैंथर दिखने की सूचना पर मांडलगढ़ से अतिरिक्त जिला वन अधिकारी आशीष व्यास, रेंजर राजेंद्र शर्मा, वनपाल रामअवतार शर्मा, गणपत सिंह, योगेंद्र सिंह, लोकेंद्र सिंह, सुरेश जाट आदि मौके पर पहुंचे। रेंजर राजेंद्र शर्मा ने बताया कि पैंथर पानी की तलाश में मेज नदी के पास पहुंचा। ग्रामीणों को देखकर पैंथर खेतों में घुस गया। धनवाड़ा व ऊखली खेड़ा के ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। ग्रामीणों ने पैंथर को भगाने के लिए पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। जिससे पैंथर घबरा गया। उसने लक्ष्मीपुरा निवासी भैरूलाल पुत्र चतराराम मीणा पर झपट्टा मार दिया। भैरू की पीठ पर पैंथर के नाखून लगने से वह लहूलुहान हो गया। जिसे मांडलगढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया। ग्रामीणों ने पैंथर का पीछा किया तो वह पेड़ पर चढ़ गया। करीब आधा घंटे तक वह पेड़ पर बैठा रहा। मौका पाकर पैंथर पेड़ से उतरा और मेज नदी के किनारे खजूर के पेड़ एवं झाड़ियों में चट्टान के पीछे छुप गया। ग्रामीण चिल्लाने लगे तो सहमा पैंथर दौड़ता हुआ वापस ऊंखली का खेड़ा की ओर भागा। छीतर गुर्जर के कुएं के पेड़ एवं दीवार के पीछे जा बैठा। यहां करीब साढ़े तीन घंटे बैठा रहा।

    वनकर्मियों ने पत्थर बरसाए तो घबराए पैंथर ने झपट्टा मारकर मेरी पीठ लहूलुहान कर दी

    लक्ष्मीपुरा गांव के भैरूलाल पुत्र चतराराम भील ने बताया कि शुक्रवार सुबह वह खदान पर मजदूरी करने पहुंचा। उसेे मेज नदी के किनारे पैंथर होने की जानकारी मिली। इस पर वह भी पैंथर को देखने वहां पहुंचा। वन विभाग के कर्मचारी पैंथर को जंगल में भगाने के लिए पत्थर फेंक रहे थे। ग्रामीणों ने भी पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इससे पैंथर घबरा गया। चारों तरफ से ग्रामीणों की घेराबंदी देखकर पैंथर जान बचाकर भागने लगा। वनकर्मी उस पर पत्थर बरसाते रहे। इस पर पैंथर ने मुझ पर झपट्टा मार दिया। वनकर्मियों व ग्रामीणों के हाथों में पत्थर व लकड़ियां थी। इस कारण पैंथर ने मेरी पीठ पर हमला कर घायल कर दिया। लोगों ने पैंथर को धक्का देखकर मुझे बचाया। वनकर्मियों ने मुझे मांडलगढ़ अस्पताल पहुंचाया। शाम को इलाज के बाद मुझे छुट्टी दे दी गई।

    12 घंटे तक दहशत में रहे ग्रामीण व वन अधिकारी: कोटा की टीम ने पकड़ा पैंथर... मेज नदी में पानी पीने आया पैंथर ग्रामीणों की भीड़ देखकर घबरा गया। चारों तरफ से घेराबंदी होने से पैंथर पेड़ पर चढ़ गया। करीब आधा घंटे तक पेड़ पर बैठा रहा। मौका पाकर पैंथर नीचे उतरा तो ग्रामीणों ने फिर उसका पीछा शुरू किया। इस पर वह कभी खेतों में तो कभी चट्टान के पीछे छुप गया। दौड़ते समय एक बार पैंथर बाइक से भी टकरा गया। मांडलगढ़ वन विभाग की टीम ने पैंथर को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया, लेकिन पैंथर पिंजरे तक नहीं पहुंचा। स्थानीय टीम को पैंथर गच्चा देता रहा। ग्रामीण व वनकर्मी करीब 12 घंटे तक दहशत में रहे। कोटा की टीम ने पैंथर को पकड़ लिया।

    पिंजरा लेकर आए तब तक पैंथर भाग गया, तीन किमी पीछा कर फिर दबोचा... कोटा से आई टीम ने पैंथर को ट्रंकुलाइज कर बेहोश कर दिया। भीलवाड़ा से पिंजरा आने के बाद पैंथर को इसमें डाल रहे थे। इसी बीच पैंथर को होश आया और वह जंगल में भाग गया। यह देखकर वनकर्मियों व ग्रामीणों के होश उड़ गए। कोटा की टीम व एसीएफ आशीष व्यास, वन अधिकारी राजेंद्र शर्मा आदि ने करीब 3 किमी तक जंगल में पैंथर का पीछा किया। पैंथर इतना थक गया कि वह धनवाड़ा गांव के पास झाड़ियों में छुप गया। वन विभाग की टीम ने फिर पैंथर को ट्रंकुलाइज किया। बेहोश होने पर उसे पिंजरे में डालकर कोटा ले गए।

    नर पैंथर की उम्र 8 साल, 9 फीट लंबा... मांडलगढ़ से अतिरिक्त जिला वन अधिकारी आशीष व्यास, रेंजर राजेंद्र शर्मा ने बताया कि धनवाड़ा क्षेत्र से पकड़ा गया पैंथर नर है। पैंथर की उम्र 8 साल और लंबाई 8-9 फीट है। उन्होंने बताया कि हमने मांडलगढ़ प्रशासन से जाब्ता मांगा था, लेकिन नहीं दिया गया। इससे ग्रामीणों को हटाने और रेस्क्यू करने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

    नहीं लगा निशाना...प्रत्यक्षदर्शी हेमराज गुर्जर ने बताया कि कोटा से आई वन विभाग की टीम ने 15 फीट दूरी से पैंथर को ट्रंकुलाइज करने का प्रयास किया, लेकिन निशाना चूक गए। पैंथर वापस नदी किनारे दौड़ा। भागते समय शाम 5:15 बजे पैंथर ने नारायण भील झपट्टा मारकर घायल कर दिया। जिसे पहले श्यामपुरा अस्पताल भेजा। भीड़ ज्यादा होने से वनकर्मियों को परेशानी हुई।

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