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पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत व जगन्नाथ पहाड़िया को खाली करना होगा सरकारी बंगला

पॉलिटिकल रिपोर्टर. जयपुर | उत्तरप्रदेश के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब प्रदेश में भी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 08, 2018, 05:45 AM IST

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    पॉलिटिकल रिपोर्टर. जयपुर | उत्तरप्रदेश के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब प्रदेश में भी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व जगन्नाथ पहाड़िया को अपने सरकारी बंगले खाली करने होंगे। एक पीआईएल का निस्तारण कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भी आम आदमी है इसलिए उन्हें सरकारी बंगले की सुविधा नहीं दी जा सकती। इसके लिए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस एक्ट को भी खारिज कर दिया जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला देने का प्रावधान था। प्रदेश में भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला देने के लिए सरकार अप्रेल 2017 में राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन विधेयक लाई थी। इसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर आजीवन सरकारी बंगले दिए जाने का प्रावधान किया गया। इससे पहले सिर्फ एक्जीक्यूटिव ऑर्डर से ही पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला आवंटित किया जाता था। गहलोत को फरवरी 2014 में सिविल लाइंस में बंगला नंबर 49 व जगन्नाथ पहाड़िया को जनवरी 1999 में अस्पताल रोड पर बंगला नंबर 5 आवंटित किया गया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट 2017 में भी उत्तर प्रदेश के आवास आवंटन नियम को गलत बताकर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करवाने के निर्देश दे चुका था। इसके बाद यूपी ने आवास आवंटन एक्ट बना लिया। यूपी को देख राजस्थान में भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास आवंटन के लिए विधेयक पारित करवा लिया गया।

    पूर्व सीएम अशोक गहलोत का सिविल लाइंस स्थित बंगला।

    पूर्व सीएम जगन्नाथ पहाड़िया का बंगला अस्पताल रोड पर।

    प्रदेश में कैबिनेट करती है आवंटन

    हालांकि प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए तो आवास आवंटन के नियम बने हुए हैं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास आवंटन के लिए नियमों में कोई प्रावधान नहीं है, बल्कि कैबिनेट के फैसले के जरिए ही पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास एवं सुविधाएं दी जाती हैं। प्रदेश में भी पूर्व मुख्यमंत्री को सरकारी बंगला आवंटित करने के लिए 2010 में मंत्रिमंडल की आज्ञा जारी हुई। इसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास के साथ मंत्री स्तर का प्रोटोकॉल, एक निजी सचिव, दो लिपिक, दो चतुर्थश्रेणी कर्मचारी, एक राजकीय वाहन की सुविधा दी गई।

    13 नंबर बंगला खाली करें मुख्यमंत्री : तिवाड़ी

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए भाजपा के विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिविल लाइंस बंगला नंबर 13 को खाली करें और बंगला नंबर 8 सिविल लाइंस के आधिकारिक आवास में जाएं। तिवाड़ी ने कहा 26 अप्रैल 2017 को राजस्थान में भी बड़ी चालाकी के साथ ‘राजस्थान मंत्री वेतन विधेयक’ लाया गया। इस विधेयक में मुख्यमंत्री न रहने पर भी जीवन भर के लिए कैबिनेट मंत्री का दर्जा तथा अपनी सुख-सुविधा के लिए जनता की गाढ़ी कमाई में से आजन्म लगभग एक करोड़ रुपए साल की सुविधाओं का इंतजाम करने का था।

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