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85 साल पहले महात्मा गांधी ने हरिजन आंदोलन करते हुए 21 दिन तक उपवास किया था

85 साल पहले महात्मा गांधी ने हरिजन आंदोलन करते हुए 21 दिन तक उपवास किया था 1933 - आज ही के दिन महात्मा गांधी ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 08, 2018, 05:45 AM IST

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    85 साल पहले महात्मा गांधी ने हरिजन आंदोलन करते हुए 21 दिन तक उपवास किया था

    1933 - आज ही के दिन महात्मा गांधी ने आत्म-शुद्धि के लिए 21 दिन का उपवास किया और हरिजन आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए एक-वर्षीय अभियान की शुरुआत की। उपवास के दौरान गांधी जी ने कहा - या तो छुआछूत को जड़ से समाप्त करो या मुझे अपने बीच से हटा दो। यह मेरी अंतरात्मा की पुकार है, चेतना का निर्देश है। गांधी जी ने ‘हरिजन’ नामक साप्ताहिक पत्र का भी प्रकाशन किया। उन्हें एमसी राजा जैसे हरिजनों का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने हरिजन के लिए जगहों के आरक्षण के साथ एक ही निर्वाचक मंडल की इच्छा जाहिर की। लेकिन इस नेतृत्व को दलित नेता भीमराव आंबेडकर ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने ऐसी प्रणाली मानने से इनकार कर दिया, जिनमें हरिजनों को हिन्दू तो कहा जाता था, पर उन्हें अस्पृश्य माना जाता था।

    खास गांधीजी ने द. अफ्रीका में 1899 के एंग्लो बोएर युद्ध में स्वास्थ्यकर्मी के तौर पर मदद की थी। वहां उन्होंने युद्ध की वि‍भिषिका देखी और अहिंसा के रास्ते पर चल पड़े थे।

    नाव से 18 हजार मील की दूरी तय कर देश लौटने वाली हैं नेवी की 6 महिला अफसर, 9 महीने पहले दुनिया की परिक्रमा पर गई थीं

    एजेंसी | नई दिल्ली

    समुद्र के रास्ते दुनिया की परिक्रमा पर निकलीं इंडियन नेवी की छह महिला अफसरों का सफर अब पूरा हो चुका है। वे 55 फीट की आईएनएस तारिणी नौका से आखिरी पड़ाव पूरा कर देश लौटने की दिशा में बढ़ चुकी हैं। सोमवार को उनकी नाव ने भूमध्य रेखा को पार कर उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश किया। इंडियन नेवी ने ट्वीट किया- तमाम मुश्कलों से पार पाते हुए हमारी अफसरों ने सफर पूरा कर लिया है। आईएनएस तारिणी गोवा से अब मात्र 1012 नॉटिकल दूर है। वे कुछ दिन में देश पहुंच जाएंगी। नेवी के मुताबिक- नाव का स्टीयरिंग गियर सही ढंग से काम नहीं कर रहा था। इसीलिए आखिरी पड़ाव में 26 अप्रैल को मॉरीशस के पोर्ट लुईस में तारिणी को इमरजेंसी में रुकना पड़ा। हालांकि उस खामी को मॉरीशस के नेशनल कोस्ट गार्ड की तत्काल मदद मिलने से दूर कर लिया गया। अब टीम अपने मिशन पर बढ़ गईं।

    6 महिलाओं की टीम बीते साल 10 सितंबर को गोवा से समुद्र के रास्ते धरती की परिक्रमा करने निकली थी। आईएनएस तारिणी से सफर में टीम को चार जगह ऑस्ट्रेलिया के फ्रेमेंटले, न्यूजीलैंड के लीटेल्टन, फाकलैंड आईलैंड के पोर्ट स्टेनली और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में ठहरना था। 2 मार्च को महिलाओं की टीम कैप टाउन पहुंची, तब तक योजना के मुताबिक सफर चला। आखिर में मॉरीशस पहुंची तो नाव खराब हो गई और टीम को मजबूरन वहां ठहरना पड़ गया। टीम ने गोवा से उत्तरी गोलार्ध तक 18 हजार नॉटिकल मील का सफर किया।

    यह आईएनएस तारिणी देश में बनी आधुनिक नाव है। इसे 2017 में नेवी में शामिल किया गया था। मिशन पर रवाना होने से पहले महिलाओं ने बकायदा ट्रेनिंग ली थी। मिशन में उन्हें जमा देने वाले हालात मिले। एक बार तो उनकी नाव तूफान में फंस गई और 7 मीटर ऊंची लहरों से सामना हुआ। हालांकि टीम ने धैर्य रखा और इससे पार पा लिया।

    आईएनएस तारिणी से समुद्र के रास्ते चक्कर लगा रही टीम का मिशन पूरा, 7 मी. ऊंची लहरों से पार पाया

    छह महिला अफसरों को चुना गया था...

    नेशनल पॉलिसी में महिला सशक्तिकरण के तहत नाविक सागर परिक्रमा रखी गई, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर महिलाएं नेतृत्व कर सकें। इसीके तहत 6 महिला अफसरों की एक टीम इस चुनी गई। परिक्रमा पथ पर उनके साथ कोई पुरुष नहीं था। टीम का नेतृत्व लेफ्टि.कमांडर वर्तिका जोशी कर रही हैं। उनके साथ लेफ्टि.कमांडर प्रतिभा जामवाल, लेफ्टि. कमांडर पी स्वाति, लेफ्टि. विजया देवी, लेफ्टि. बी एश्वर्या और लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता भी हैं।

    नेवी टीम 6 मार्च को केपटाउन में थी।

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