Hindi News »Rajasthan »Maniya» समाज में व्याप्त कुरीतियों को एकजुट होकर ही मिटा सकते हैं: संत रामपाल

समाज में व्याप्त कुरीतियों को एकजुट होकर ही मिटा सकते हैं: संत रामपाल

कस्बा स्थित अग्रवाल धर्मशाला में रविवार को संत रामपाल महाराज द्वारा प्रोजेक्टर के माध्यम से सत्संग किया गया।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 05, 2018, 05:25 AM IST

कस्बा स्थित अग्रवाल धर्मशाला में रविवार को संत रामपाल महाराज द्वारा प्रोजेक्टर के माध्यम से सत्संग किया गया। जिसमें उन्होंने कहा कि हमें समाज की उन्नति के लिए सर्वप्रथम समाज में व्याप्त कुरीतियों को मिटाना होगा, तभी कोई समाज उन्नति कर पाएगा। दहेज प्रथा व नशा जैसी बुराइयों को नष्ट करने की प्रेरणा दी। साथ ही कहा कि हमें बेटियों को शिक्षा से वंचित नहीं रखना चाहिए। क्योंकि एक शिक्षित बेटी दो परिवारों का नाम रोशन करती है। साथ ही कहा कि हमें अपने जीवन मे अच्छे कार्य करने चाहिए जिससे लोग मरने के बाद भी याद करें। दीन-दुखियों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। इसके लिए सभी को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्संग सुनने से मन को शांति तो मिलती ही है लेकिन हमें उनकी बातों पर अमल भी करना चाहिए। जिससे मनुष्य का जीवन सफल हो सके। जो होना है वह होकर रहेगा उसे प्रभु के सिवाय कोई नहीं रोक सकता है, इसलिए मनुष्य को व्यर्थ की चिंता नहीं करनी चाहिए। हमें प्रभु का स्मरण प्रतिदिन करना चाहिए। इंसान सुख में तो प्रभु को भूल जाता है लेकिन दुख आने पर प्रभु को याद करता है। इसलिए सुख हो या दुख इंसान को प्रभु का स्मरण करते रहना चाहिए। इस दौरान सत्संग में बड़ी संख्या में श्रोता सहित कबीर भक्त मण्डल के सूरजदास राकेश दास मौजूद रहे।

बसेड़ी कस्बे की अग्रवाल धर्मशाला में हुआ सत्संग

बसेड़ी. कस्बे की अग्रवाल धर्मशाला में हुए सत्संग में मौजूद श्रोता।

प्रेम और भाईचारे के मार्ग पर चलने वाले सच्चे धार्मिक: संत श्रीपति

मनियां। संत निरंकारी मंडल की ओर से रविवार को कस्बे के एक निजी मैरिज होम में सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान संत श्रीपति ने कहा कि प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूती दें। उन्होंने कहा कि तन-मन-धन सब कुछ निराकार का है, इसे निराकार का ही समझना है। लोग समझ लेते हैं कि यह सब देन हमें गुजारे के लिए दी गई है। मालिक जब चाहे तो किसी चीज को ले भी सकता है दे भी सकता है। इस बात को हृदय में बसा लेने के कारण भक्त दुख के समय में बहुत दुःखी नहीं होते और सुख के समय ज्यादा फूले नहीं समाते। दोनों हालातों में वे दातार का शुक्रिया ही अदा करते हैं। इसी तरह सन्तों ने समाज में गृहस्थमय रहकर जीवन व्यतीत करना है। उन्होंने कहा कि गृस्थमय रहकर ही हम दातार की वास्तविक भक्ति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम और भाइचारे की भावना को आगे बढ़ाने वाला ही सबसे बड़ा धार्मिक कहा जाता है। इस लिए सभी को एक दूसरे के प्रति प्रेम भाव के साथ बर्ताव करना चाहिए। इस अवसर पर निरंकारी मंडल के पदाधिकारी एवं भक्तजन मौजूद रहे।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Maniya

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×