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शिव भक्त रिषभ कहलाए शिव शक्ति पुत्र, पिता ने दिखाई धर्म प्रचार की राह

मनियां. बाल व्यास रिषभ देव। भास्कर संवाददाता | मनियां वृंदावन में जन्मे राष्ट्रीय बाल व्यास रिषभ देव ने पिता...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 09, 2018, 05:45 AM IST

मनियां. बाल व्यास रिषभ देव।

भास्कर संवाददाता | मनियां

वृंदावन में जन्मे राष्ट्रीय बाल व्यास रिषभ देव ने पिता के सपने को पूरा करने के लिए देश भर में धर्म के प्रचार करने के लिए 10 वर्ष की उम्र में भागवत कथा कहना प्रारंभ कर दिया। आज वह व्यास गद्दी से भागवत कथा कह रहे है जो कि सबसे कम उम्र के कथा वाचक के रूप में देखे जा सकते है। बाल व्यास रिषभ देव ने भास्कर से बात करते हुए बताया कि उनका जन्म वृन्दावन धाम में 10 जून 2007 में हुआ था। उनके पिता ऋषिकेश शास्त्री भी भागवत कथा कहते थे। जिन्होंने देशभर में धर्म का प्रचार करने के लिए काफी प्रयास किए लेकिन उनका सपना पूरा नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि वृंदावन के एक निजी विद्यालय में उन्होंने कक्षा चार तक की पढ़ाई पूरी की जिसमें उन्हें एक दर्जन से अधिक बार पुरस्कृत किया गया। उन्होंने बताया कि शुरू से ही संस्कृत विषय पर उनकी अच्छी पकड़ थी जिसे देखते हुए उनके पिता ने उनसे भागवत पढ़वाई जिसमें संस्कृत के कठिन से कठिन श्लोकों को उच्चारण किया गया तो उनके पिता ने अपनी इच्छा जताई कि यह धर्म के प्रचार का कार्य पूरा कर सकेगा। इसी को लेकर उन्होंने भागवत कथा कहना शुरू कर दिया। बाल व्यास ने बताया कि पिता के सपने को पूरा करने के लिए भागवत कथा के माध्यम से देशभर में धर्म का प्रचार करने का काम पूरा करेंगे।

मनियां. भागवत कथा श्रवण करते श्रद्वालु।

पिता बोले बचपन से ही भोले बाबा के मंदिर में दिखता था रिषभ, इसलिए जुड़ा

10 वर्षीय बाल व्यास रिषभ देव के पिता ने बताया कि जब रिषभ करीब 6 माह का था तभी से वह हमेशा भोले बाबा के मंदिर में ही दिखता था। जहां श्रद्वालु शिव लिंग पर फूल आदि चढ़ाते थे उन्हें साफ करता रहता था। तभी एक दिन रिषभ के पलंग पर माता पूजा ने काला सांप देखा तो वह घबरा गई और मंदिर को खाली करने के लिए तैयार हो गई लेकिन ऐसा नहीं हो सका तो पिता ऋषिकेश ने हाथ में जल लेकर रिषभ का संकल्प कर प्रतिज्ञा की कि आज से मेरा रिषभ के साथ पिता पुत्र का कोई संबंध नहीं है। उसी दिन से बाल व्यास को शिव शक्ति पुत्र के नाम से जाना जाए। तभी से उनका नाम शिव शक्ति पुत्र बाल व्यास रिषभ देव के नाम से ही जाना जाता है।

4 शब्द जीवन में महत्वपूर्ण चिंतन चित्र, चित्त और चरित्र: व्यास

मनियां | गांव जसूपुरा में चल रही संगीतमय श्रीमद भागवत सप्ताह के तीसरे दिन राष्ट्रीय बाल व्यास शिव शक्ति पुत्र ऋषभदेव ने कहा कि जब तक कलयुग में पुराण रहेंगे तब तक धर्म जिंदा रहेगा जिस दिन पुराण समाप्त हो जाएंगे उसी दिन धर्म भी समाप्त हो जाएगा। बाल व्यास ने कहा कि चार शब्द हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं जिसमें चित्र, चित्त, चिंतन और चरित्र। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जैसा चित्र देखेगा वैसा ही आपका चित्र बन जाएगा और चित्त जैसा रहेगा वैसा ही चिंतन चलेगा। लोग मंदिरों में इसीलिए जाते हैं क्योंकि वहां भगवान के सुंदर-सुंदर चित्र हैं मूर्तियां हैं उन्हें देखकर आपका चित्त गदगद हो जाएगा। राजा परीक्षत की कथा सुनाते हुए कहा कि राजा परीक्षत ने सुखदेव महाराज से मुक्ति का उपाय पूछा है, क्योंकि मृत्यु लोक में तो मरना ही पड़ता है जिस लोक में हम और आप बैठे हैं इस लोक का नाम है मृत्यु लोक यानी कि मरने का लोक राजा परीक्षित ने विचार किया अगर मैं यहां मरने से बचने का उपाय पूछूंगा तो भी मुझे मरना ही पड़ेगा। इस अवसर पर बीच बीच में महिलाओं ने भजन एवं कीर्तन किया गया जिसमें महिलाएं थिरकती देखी गई। कथा के समापन पर परीक्षत रामदीन शर्मा ने परिवार के सहित भव्य आरती उतारी। इस अवसर पर हरिओम, रविंद्र, रामेंद्र, हरेंद्र, देवेंद्र, उपेंद्र एवं भागवत के मूल पाठ करता आचार्य लेखराज शास्त्री रहे।

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