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भागवत श्रवण के लिए एकाग्रता जरूरी : रिषभ

उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे गांव जसुपुरा में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन धाम से आए राष्ट्रीय बाल...

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 07:10 AM IST
भागवत श्रवण के लिए एकाग्रता जरूरी : रिषभ
उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे गांव जसुपुरा में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन वृंदावन धाम से आए राष्ट्रीय बाल व्यास रिषभ देव ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा को सुनने के लिए मन की एकाग्रता की जरूरत है, अगर हमारा मन एकाग्र है तो सड़क के किनारे कथा सुनने पर भी गोविंद की कृपा प्राप्त हो जाएगी और मन एकाग्र नहीं है तो हरिद्वार और कुरुक्षेत्र में भी कथा सुनने पर कोई लाभ प्राप्त नहीं होगा।

उन्होंने भक्ति नारद का संवाद का वर्णन करते हुए बताया कि नारद को कहीं भी शांति नहीं मिली लेकिन वृंदावन में नारद को शांति भी मिली और भक्ति माता का भी दर्शन हुआ, लेकिन भक्ति के पुत्र ज्ञान वैराग्य बूढ़े पड़े हुए हैं। बाल व्यास ने भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि अगर कोई पुरुष इस कथा का श्रवण करता है तो उसे मुक्ति अवश्य प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि मरने के बाद अगर कोई भूत-प्रेत बन गया है उसको यह कथा सुना दी जाए तब वह भी मुक्त हो जाता है, तब नारद ने प्रश्न किया कथा से कोई मुक्त हुआ है तब बाल व्यास ने बताया के आत्म देव का पुत्र धुंधकारी जो भयंकर दुष्ट था शराब पीता था जुआ खेलता था पिता की पूरी संपत्ति को बर्बाद कर दिया एक दिन अपने पिता को ही परेशान करने लगा तब पिता घर से बैरागी लेकर चले गए और धुंधकारी पांच वैश्या लेकर घर में रहने लगा एक दिन वेश्याओं ने ही धुंधकारी को मार डाला तब यह भयंकर प्रेत बन गया लेकिन इनके भाई गोकर्ण ने इनको भागवत कथा श्रवण कराई इस धुंधकारी ने बांस में बैठकर कथा श्रवण की और भागवत कथा से यह मुक्त हो गया।

मनियां. प्रवचन देते बाल व्यास रिषभ देव।

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