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सड़क और पानी के अभाव में सरकारी स्कूल का नामांकन घटा, ग्रामीणों में रोष

दौसा-मनोहरपुर एनएच 148 पर स्थित पायलों कि ढाणी के पास गुर्जरों कि ढाणी में स्थित राजकिय प्राथमिक विद्यालय में सड़क,...

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 06:15 AM IST
दौसा-मनोहरपुर एनएच 148 पर स्थित पायलों कि ढाणी के पास गुर्जरों कि ढाणी में स्थित राजकिय प्राथमिक विद्यालय में सड़क, पानी सहित कई समस्याओं को लेकर शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने विभाग एवं प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। कहा कि या तो विद्यालय कि समस्याओं का शीघ्र समाधान करे या विद्यालय को दूसरे विद्यालय में मर्ज़ कर दे। गुर्जरों की ढाणी में सन 2010 में बना राजकीय प्राथमिक विद्यालय का हाल कुछ और ही बयां कर रहा है, जहां सरकारी विद्यालयों में हर जगह नामांकन बडता जा रहा हैं, वहीं हमारी विद्यालय में दिनों दिन नामांकन घटता जा रहा हैं क्योंकि विद्यालय में जाने के लिए रास्ता नही ओर विद्यार्थियों को पिने के लिए पानी नही शौचालय में सफाई नहीं ओर तो ओर पौषाहार बनाने के लिए छत नही ऐसी व्यवस्थाओं के चलते विद्यालय का नामांकन घटता जा रहा है।

ग्रामीणों ने नामांकन घटने के ये बताए कारण

ग्रामीणों ने बताया कि सन 2010 में लाखों रुपए की लागत से सरकार द्वारा गुर्जरों की ढाणी में पहाड़ी की तलहटी के पास विद्यालय तो बना दिया मगर विद्यालय पहुंचने के लिए हैं वहां रास्ता तक नही बनाया जिस के कारण नन्हे-मुन्ने बच्चों को गहरे गहरे नले नाखलो से गुजर कर विद्यालय पहुंचना पड़ता है, ऐसे में जानवरों से बच्चों कि जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है ऐसे में विद्यार्थियों के साथ कोई अनहोनी हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी केवल सरकार की होगी, और तो और विद्यालय परिसर में सरकार या विभाग ने बच्चों के पीने के लिए पानी के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं कर रखी हैं ऐसे में करीब 1 किलोमीटर दूर अपने घर से विद्यार्थियों को पानी की बोतल साथ लेकर जाना पड़ता है मजे की बात तो यह है कि देश के प्रधानमंत्री देश को स्वच्छ एवं स्वस्थ रखने में लगे हुए हैं मगर विद्यालय परिसर में बने शौचालय के हालातों को देखकर ऐसा लगता है कि विद्यालय स्टाफ खुलेआम प्रधानमंत्री के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हो एवं जहां बच्चों के लिए पोषाहार बनाया जाता है उस जगह लगे टीन सेट टूटे हुए हैं जिस के कारण खुले मैं ही पोषाहार बनाया जाता हैं जिस के कारण बच्चों मैं बीमारी फैलने का खतरा रहता हैं,ऐसे में कोई मां-बाप अपने बच्चों को ऐसी विद्यालय में पढ़ाना पसंद नही करता हैं। इस कारण से धीरे-धीरे सभी लोग अपने बच्चों को दूसरी विद्यालय में भेज रहे हैं ओर इस विद्यालय का नामांकन घटता जा रहा हैं।

बीच में खातेदारी की जमीन आने के कारण नहीं निकल सकता रास्ता


मौका देख कर ही करेंगे उचित कार्रवाई


लिखित में देने के बाद भी हमारी समस्या सुनने को तैयार नहीं


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