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मेड़ता-पुष्कर रेलमार्ग के लिए अभी इंतजार, रेलवे बोर्ड के निर्णय के बाद ही दादर ट्रेन का ठहराव होगा संभव

भास्कर संवाददाता | मेड़ता रोड मेड़ता-पुष्कर रेलमार्ग के निर्माण को पंच वर्षीय योजना में शामिल किया गया था। जो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 05:05 AM IST

भास्कर संवाददाता | मेड़ता रोड

मेड़ता-पुष्कर रेलमार्ग के निर्माण को पंच वर्षीय योजना में शामिल किया गया था। जो करीब पांच सालों से बहुप्रतिक्षित है। मगर फिलहाल रेलवे मंत्रालय के सीसीईए की अनुमति के बाद ही रेल लाइन संभव हो सकेगी। ट्रेनों के ठहराव, स्टेशनों के सौदर्यीकरण, रेलबस के स्थान पर डीएमयू चलाने आदि के संबंध में सांसद द्वारा उठाए गए मुद्दों पर रेलवे ने अपनी ओर से जवाब देकर प्रगति रिपोर्ट सांसदों को भेजी है।

उत्तर पश्चिम रेलवे जोन की गत दिनों जयपुर में महाप्रबंधक के साथ सांसदों, सदस्यों आदि के साथ एक बैठक हुई थी। जिसमें अपने-अपने क्षेत्र की रेल संबंधी समस्याएं, मुद्दे उठाए गए थे। अब बिंदुवार रेलवे ने रिमार्क लगाते हुए जवाब पुन: सांसदों को दिए हैं। इसमें नागौर जिले के सांसद सीआर चौधरी ने मेड़ता पुष्कर रेल लाइन का मुद्दा उठाया था। जिसमें रेलवे ने जवाब दिया कि रेल लाइन का कार्य वर्ष 2013-14 में स्वीकृत हो चुका है। इस परियोजना में कुल लागत 323 करोड़ रुपए है। इस परियोजना को चालू करने के लिए सीसीईए की अनुमति रेल मंत्रालय से प्रतिक्षित है।

रेलवे बोर्ड को पुन: अनुरोध किया जाएगा। इसी प्रकार सांसद को मेड़ता रोड-मेड़ता सिटी के बीच संचालित रेलबस को बंद कर नियमित रूप से डीएमयू चलाई जाने की समस्या का जवाब दिया गया है कि वर्तमान में 9-9 बार रेलबस टर्न कर रही है। अतिरिक्त डीएमयू के रैक प्राप्त होने पर यह संभव है। कि डीएमयू संचालित किया जा सकेगा। जबकि बीकानेर-जोधपुर से दिल्ली जाने वाली संपर्क क्रांति को प्रतिदिन चलाने के लिए इनकार कर दिया है।

बीकानेर- दादर द्विसाप्ताहिक का मेड़ता रोड में ठहराव के संबंध में पुन: वाणिज्यिक औचित्य के आधार पर सुझाव पर विचार किए जाने की बात कही है। गंगानगर से तिरूचिरापल्ली हमसफर ट्रेन का नागौर मुख्यालय पर ठहराव के संबंध में बताया कि ट्रेन की औसत गति 55 किमी बनाए रखने के लिए प्रस्तावित करने पर ही परिचालनिक दृष्टि से संभव नहीं हो सका है। बाड़मेर से हावड़ा वाया जोधपुर, डेगाना, लाडनूं होकर संचालित के संबंध में नई ट्रेन के संचालन का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा लेकिन मार्गस्थ रेलवे की सहमति नहीं होने के कारण बोर्ड की स्वीकृति नहीं मिल सकी। इसी प्रकार केन्द्रीय राज्यमंत्री सीआर चौधरी ने अन्य ट्रेनों के मुद्दे भी रखे थे।

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