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2 शहर, 399 गांव व 801 ढाणियों में जलापूर्ति की मॉनिटरिंग के लिए 2 एईएन, 5 जेईएन के पद रिक्त, नतीजा:जलसंकट

गर्मी का दौर शुरू होते ही एक बार फिर क्षेत्र में जलसंकट ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। हालात ये हैं कि गर्मी आ चुकी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 05:15 AM IST

गर्मी का दौर शुरू होते ही एक बार फिर क्षेत्र में जलसंकट ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। हालात ये हैं कि गर्मी आ चुकी है मगर अभी तक ग्रामीण क्षेत्र में खराब पड़े हैंडपंपों तक की जलदाय विभाग ने सुध नहीं ली है। हर छह माह बाद जलस्रोतों पर नलकूपों के जलस्तर में गिरावट आती रहती है मगर न तो इन नलकूपों को गहरा कराया जा रहा है और न ही नए नलकूपों की स्वीकृतियां समय पर मांगी जा रही हैं। दूसरी ओर जलदाय विभाग में अधिकारियों व कार्मिकों के काफी पद रिक्त हैं।

जिसके चलते मांग के अनुरूप पानी भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में शहरों सहित गांवों व ढाणियों में जलसंकट की स्थिति बनी हुई है। मेड़ता अधिशाषी वृत क्षेत्र में मेड़ता शहर, डेगाना व रियांबड़ी उपखंड मुख्यालय सहित 399 गांव व 801 ढाणियों की जलापूर्ति सुचारू करने का जिम्मा है। इन क्षेत्रों में सुचारू जलापूर्ति करने को लेकर जलदाय विभाग के कार्मिक तो तैनात हैं। मगर सुचारू जलापूर्ति व कार्मिकों की मॉनिटरिंग करने वाले 2 एईएन व 5 जेईएन के पद रिक्त हैं। ऐसे में भीषण गर्मी से पहले गांवों में जलापूर्ति गड़बड़ा गई है। यही कारण है कि अब लोग पानी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने लगे हैं।

आकेली व लांबा गांव में जलस्रोतों में जल उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। प्रमुख शासन सचिव व मंत्री की बैठक में नहरी विभाग को मेड़ता क्षेत्र के लिए अधिक पानी देने के निर्देश दिए थे। अभी हमें 20 लाख लीटर नहरी पानी मिल रहा है। जबकि 60 लाख लीटर पानी की मांग की गई है। गांवों में टैंकरों से जलापूर्ति कर जलसंकट कम करेंगे। -धन्ना राम चौहान, एक्सईएन, जलदाय विभाग, मेड़ता खण्ड

दिक्कत

1. अधिकारियों के पद रिक्त

शहरों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में जलापूर्ति की मॉनिटरिंग करने में सबसे बड़ी भूमिका एईएन व जेईएन की होती है। यही वे अधिकारी होते है जो फील्ड में जाकर आमजन व कार्मिकों से जुड़कर कार्य करते हैं। मगर मेड़ता ग्रामीण व मॉनिटरिंग खंड मेड़ता में लगे दोनों एईएन के पद रिक्त हैं। इसके साथ ही मेड़ता सिटी, मेड़ता रोड, गोटन, बुटाटी व भैरूंदा में लगे 5 जेईएन के पद रिक्त हैं। ऐसे में क्षेत्र में जलापूर्ति की प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में जलसंकट की समस्या बढ़ गई है।

2. सेवानिवृत्ति वाले पदों को समाप्त करने से बिगड़ी व्यवस्था

जानकारों की माने तो विभाग ने 1985 के बाद तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती ही नहीं निकाली। इसके साथ ही विभाग ग्रामीण जलयोजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों की सेवानिवृति हो जाने पर उनके स्थान पर भर्ती करने के बजाय पद ही समाप्त कर रहा है। यही कारण है कि मेड़ता अधिशाषी वृत में 20-25 साल पूर्व 850 कर्मचारी तैनात थे। मगर पद समाप्त करने के चलते अब मात्र 318 कर्मचारी बचे हैं। कर्मचारियों के अभाव में जलापूर्ति सुचारू रखना विभाग के लिए परेशानी बनी हुई है।

टेलीफोन कंपनी केबल बिछाने तोड़ दी पेयजल पाइप, दो दिन से व्यर्थ बह रहा पानी, जिम्मेदार मौन

मेड़ता रोड| मेड़ता रोड में एक टेलीफोन कंपनी द्वारा बिछाई जा रही अंडरग्राउंड केबल ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। जेसीबी से जलदाय विभाग की पेयजल पाइप लाइन को क्षतिग्रस्त करने से पेट्रोल पंप के पास में दो दिन से पानी सड़कों पर बह रहा है। इसके बावजूद जलदाय विभाग के कर्मचारियों द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत के द्वारा बनाई गई सड़कों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया तो दूसरी ओर नागौर सड़क पर पेट्रोल पंप के पास में जलदाय विभाग की पाइप लाइनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। इस कारण दो दिन से पानी सड़कों पर बह रहा है। इस क्षेत्र के वाशिंदों द्वारा जलदाय विभाग के कर्मचारियों को सूचना देने के बावजूद भी किसी ने यहां आकर क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को दुरस्त नहीं करवाया है। एक ओर पानी की समस्या को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर लाखों लीटर पानी सड़कों पर व्यर्थ बह रहा है। जलदाय विभाग के प्रति क्षेत्र के लोगों में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि वैसे तो क्षेत्र में लोगों को पीने तक के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है और यहा व्यर्थ पानी बह रहा है।

इन तीन कारणों से जाने क्यों है पानी की समस्या

3. रोजाना 70 लाख 88 हजार लीटर पानी की मांग, मिल रहा है 45 लाख 34 हजार लीटर पानी

मेड़ता व डेगाना को मिलाएं तो दोनों शहरों की आबादी एक लाख के आस-पास है। दोनों शहरों में रोजाना 70 लाख 88 हजार लीटर पानी की मांग है। मगर जलदाय विभाग को रोजाना महज 45 लाख 34 हजार लीटर पानी ही मिल रहा है। 2011 की जनगणना में मेड़ता शहर की जनसंख्या 46070 थी। जो अब आठ साल बाद खासी बढ़ गई। जिसके बाद अब यहां प्रतिदिन 50 लाख 85 हजार लीटर पानी की मांग। मगर जलदाय विभाग को नहरी परियोजना से प्रतिदिन मात्र दो लाख लीटर व लांबा व आकेली के नलकूपों से कुल एक लाख 54 हजार लीटर पानी का उत्पादन हो रहा है। दूसरी ओर 2011 की जनगणना में डेगाना की आबादी 20035 थी। चार साल पूर्व डेगाना नगर पालिका घोषित होने से कई गांवों को भी डेगाना शहर में जोड़ दिया गया। ऐसे में इसकी आबादी भी बढ़ गई है। यहां अभी प्रतिदिन 20 लाख 3 हजार लीटर पानी की मांग है। मगर जलदाय विभाग को जलस्रोतों से महज 12 लाख 80 हजार लीटर पानी ही रोजाना मिल रहा है।

मेड़ता रोड. पेट्रोल पंप के पास में बहता हुआ पानी व क्षतिग्रस्त पाइप लाइन।

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