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900 करोड़ से बनना है परबतसर-किशनगढ़ रेल मार्ग 2 साल बाद ज्वॉइंट वैंचर कंपनी ही नहीं बना पाए

भास्कर संवाददाता | मेड़ता रोड केन्द्र सरकार की नई नीति के अनुसार राज्य सरकार द्वारा सयुंक्त उपक्रम कंपनी नहीं...

Danik Bhaskar | Jun 09, 2018, 05:20 AM IST
भास्कर संवाददाता | मेड़ता रोड

केन्द्र सरकार की नई नीति के अनुसार राज्य सरकार द्वारा सयुंक्त उपक्रम कंपनी नहीं बनाए जाने के कारण अब तक रेल परियोजनाएं सिरे नहीं चढ़ रही हैं। इस संबंध में पूर्व उत्तर पश्चिम रेलवे परामर्शदात्री सदस्य अनिल कुमार खटेड़ ने राज्य सरकार को एक ज्ञापन भेजकर कंपनी बनाने की मांग की है। रेल बजट 2018 में केन्द्र सरकार ने नई रेल परियोजनाएं केन्द्र व राज्य सरकार की भागीदारी से ही बनाने की घोषणा की थी। इस संबंध में परबतसर-किशनगढ़ रेलमार्ग को 900 करोड़ रुपए की मंजूरी दी थी। मगर यह कार्य ईबीआर पार्टनरशिप से ही होगा। इस कारण दो साल से यह भी मूर्त रूप नहीं पाई है। इसी प्रकार नोखा से सीकर नई रेल लाइन, सरदारशहर से हनुमानगढ़, पुष्कर-मेड़ता, लाडनूं से कुचामन वाया डीडवाना, नागौर से फलौदी, सुजानगढ़ से सीकर, सादुलपुर से तारानगर की योजनाएं भी सिरे नहीं चढ़ पा रही हैं। इधर, उत्तर पश्चिम रेलवे के परामर्शदात्री सदस्य खटेड़ ने सीएम को भेजे ज्ञापन में राज्य सरकार से रेल परियोजनाओं के लिए सयुंक्त उपक्रम कंपनी स्थापित करने की मांग की है। ज्ञापन में बताया कि जनता की आशाओं के अनुरूप जन प्रतिनिधि रेल परियोजनाओं को रेल मंत्रालय तक पहुंचा कर स्वीकृत करवा सके। इसलिए अब शीघ्र ही ज्वॉइंट वैंचर कंपनी बनाई जाए। ताकि रेल परियोजनाएं पूरी हो सकें।

तत्कालीन रेल मंत्री ने भी लिखा था सीएम को पत्र, नहीं निकला हल:

खटेड़ के द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के माध्यम से मांगी सूचना से इस संबंध में खुलासा हुआ है कि तत्कालीन रेल मंत्री ने 20 अप्रैल 2017 को पत्र लिखकर ऐसी कंपनी बनाने काे राज्य सरकार को पत्र लिखा था। जिसमें बताया कि गुजरात, केरल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ ने ऐसी कंपनी बना ली हैं। मगर राजस्थान में ऐसा नहीं किया गया है। इस पर मुख्यमंत्री ने पत्र का जवाब देते हुए बताया कि सयुंक्त उपक्रम कंपनी के स्थान पर पुरानी पद्धति से ही रेल परियोजनाओं को स्वीकृति दी जाए। ताकि राज्य सरकारों पर वित्तीय भार नहीं पड़े। इस पत्र के प्रत्युत्तर में वर्तमान रेल मंत्री पीयूष गाेयल ने 13 नवंबर 2017 को अपने पत्र में इस बात का उल्लेख किया कि इससे राज्य सरकारों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं आएगा। इसलिए सयुंक्त उपक्रम कंपनी बनाई जाए।