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गुरु बनने से पहले शिष्य बनना जरूरी: मुनि

मेड़ता सिटी (आंचलिक)| यहां स्थानीय वीर भवन में प्रवचन करते हुए महेन्द्र मुनि ने कहा कि ज्येष्ठ एवं श्रेष्ठ गुरु वह...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 13, 2018, 05:50 AM IST

मेड़ता सिटी (आंचलिक)| यहां स्थानीय वीर भवन में प्रवचन करते हुए महेन्द्र मुनि ने कहा कि ज्येष्ठ एवं श्रेष्ठ गुरु वह होता है, जो शिष्य को गुरु बना देता है। भक्तों को भगवान बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन की विशेषता है कि हर किसी शिष्य को गुरु बनाने का अधिकार है। लेकिन गुरु बनने से पहले शिष्य बनना जरूरी है। पिता बनने से पहले पुत्र बनना होता है। हम सभी अनुशासन करना चाहते हैं। लेकिन हम स्वयं अनुशासन में नहीं रह पाते हैं। मनीष मुनि ने कहा कि सच्चा साधू वह जो एकांत में जीवन जीता है और रहता है। सिद्धांत में एवं सोचता है। साधू वही जो नमन व मनन से चलता है। मंच का संचालन हस्तीमल डोसी ने किया।

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