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साधु के वेश का महत्व नहीं: जैन संत

मेड़ता सिटी (आंचलिक)| जैन मुनि मनीष मसा ने कहा कि मोक्ष में जाने का चौदहवां बोल सुपात्र दान है। मोक्ष के चार द्वार...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 09, 2018, 06:05 AM IST

मेड़ता सिटी (आंचलिक)| जैन मुनि मनीष मसा ने कहा कि मोक्ष में जाने का चौदहवां बोल सुपात्र दान है। मोक्ष के चार द्वार है। दान, शील, तप व भाव है। जिसमें धन को प्रथम स्थान दिया गया है। मनीष मुनि बुधवार को यहां वीर भवन में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दान, शील, तप व भाव बताया है। नाम दान का पहले आया। साधु का जीवन निर्दोष होना चाहिए। साधु के जीवन में वेश का महत्व नहीं होता है। बल्कि साधु के गुणा का महत्व होता है। हर कोई व्यक्ति आदरणीय तो हो सकता है। लेकिन वंदनीय नहीं हो सकता है। वस्तु शुद्ध होनी चाहिए। दान करने की विधि भी सही होनी चाहिए। इस अवसर पर महेन्द्र मुनि ने कहा कि जिस प्रकार पानी को जिसमें डालेंगे उसी के रूप ग्रहण कर लेगा। इसी प्रकार व्यक्ति को जैसा संग मिलता है उसी के अनुरूप ढल जाता है। धर्मसभा में अनेक श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।

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