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मोक्ष मार्ग प्राप्ति के लिए जीवन में सरलता, सजगता और सहिष्णुता जीवन में है बेहद आवश्यक : मुनि

भास्कर संवाददाता |मेड़ता सिटी (आंचलिक) कस्बे में सोमवार को जैन स्थानक में धर्मसभा का आयोजन हुआ। जिसमें जैन मुनि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 07, 2018, 06:15 AM IST

मोक्ष मार्ग प्राप्ति के लिए जीवन में सरलता, सजगता और सहिष्णुता जीवन में है बेहद आवश्यक : मुनि
भास्कर संवाददाता |मेड़ता सिटी (आंचलिक)

कस्बे में सोमवार को जैन स्थानक में धर्मसभा का आयोजन हुआ। जिसमें जैन मुनि मनीष मसा ने कहा कि मोक्ष मार्ग में चरण बढ़ाने के लिए जीवन में 3 गुण सरलता, सजगता एवं सहिष्णुता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की सरलता जीवन में हुई भूलों को स्वीकार करता है। जिसके हृदय में सरलता होगी वही धर्म को ठहराता है। कुटिलता होने पर धर्म जीवन में प्रवेश नहीं करता है। सजगता जीवन में दुबारा भूल नहीं करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि मोक्ष मार्ग में चरण बढ़ाने के लिए तेहरवां बोल आलोचना-जीव पापों के प्रति, दोषों के प्रति गुरू के पास जाकर आलोचना करें। दूसरों के दोष को देखने से स्वयं के दोषों को आमंत्रण देना है। आलोचना करों पर स्वयं के पापों की। महंेंद्र मुनि ने कहा कि आज कलिकाल में तीर्थंकर के मुखारबिंद से धर्म को सुनने का सौभाग्य हर किसी को नहीं है। आज मोक्ष के ताले है। परन्तु नरक के ताले तो खुले है। साधना के भव से एक अवतारी बन सकते है।

मेड़ता रोड| कस्बे में स्थित प्रीतमदास के रामद्वारा में चल रही कथा में संत गोरधनदास रामस्नेही ने कथावाचन करते हुए कहा कि मनुष्य को नियमित रूप से प्रभु की भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने भक्तों को नियमित भगवान की भक्ति से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी गई। ईश्वर की पूजा अर्चना करने वाले महापुरुष कभी भी किसी भी बड़ी से बड़ी घटना से डरते नहीं है। नियमित रूप से भक्ति, आराधना, पूजा-अर्चना करने से जीवन सफल व सुखमय होता है। इस मौके पर महंत मोहनराम रामस्नेही, संत दौलतराम, राधेश्याम शर्मा, जुगलकिशोर, कमल शर्मा, विजयसिंह राजपुरोहित, जवरीलाल जांगिड़, लालदास वैष्णव आदि मौजूद थे।

मनुष्य पैसे कमाकर अगर किसी जरूरतमंद की सेवा के लिए लगाएं तो उसे मिलता है पुण्य : सज्जन महाराज

रेण| कस्बे के लाखा सागर सरोवर स्थित रामधाम देवल में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान दरियाव ट्रस्ट के सचिव व उत्तराधिकारी सज्जन महाराज ने सत्संग भवन में कहा कि जिन्हें अज्ञान अंधकार से मुक्त होने की इच्छा हो उसे सांसारिक विषयों में आसक्त कभी नहीं रहना चाहिए। क्योंकि यह विषयाशक्ति, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधक है। इन चारों पुरुषार्थों में मोक्ष ही श्रेष्ठ माना जाता है। इस दौरान धन एवं विषयों का चिंतन सभी पुरुषार्थों को नष्ट करने वाले है। इनके चिंतन से मानव ज्ञान-विज्ञान से भ्रष्ट होकर, पतन के गर्त में गिर जाता है। यदि मानव सत्य प्रयास से धन कमा कर उसका सदुपयोग दरिद्रनारायण की सेवा में करता है तो इस प्रकार के धन के उपार्जन में नहीं इसकी आसक्ति में दोष है।

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