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लहसुन की बुवाई का रकबा चौगुना पर उत्पादन आधा, दाम ने भी रुलाया

उत्पादन में कमी, गुणवत्ता में कमी और दामों में भी भारी कमी। संपूर्ण बातें इस समय लहसुन की फसल पर लागू हो रही हैं।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:20 AM IST

उत्पादन में कमी, गुणवत्ता में कमी और दामों में भी भारी कमी। संपूर्ण बातें इस समय लहसुन की फसल पर लागू हो रही हैं। किसान सदमे में चले गए हैं। किसान से अगर लहुसन के बारे में किसी भी प्रकार का कोई सवाल किया जा रहा है तो किसान जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वाले पर आग बबूला हो रहा है। लहसुन उत्पादक किसान के पास कोई जवाब नहीं है। सिर्फ लाचारी और बेबसी उसके चेहरे पर दिखाई दे रही है।

फसल के दाम नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में किसानों के अरमानों पानी फिर गया। किसानों की बेटियों के हाथ पीले नहीं होंगे, किसानों द्वारा सरकार और साहूकारों से लिया गया ऋण नहीं चुक पाएगा। ऐसे हालात में किसानों की सरकार कोई खबर नहीं ले रही है। इसके चलते किसान के मुंह से यही निकल रहा है कि रामजी भी रूठा साथ में राज भी रूठ गया है।

मोड़क स्टेशन. खेतों में लहुसन की फसल की छटाई शुरू हो गई है।

इस वर्ष क्षेत्र में चार गुना रकबा

क्षेत्र में पिछले वर्ष 20 हेक्टेयर में लहसुन की बुआई की गई थी। इस वर्ष बुआई का रकबा 80 हेक्टेयर से भी अधिक का है। मौसम में नमी नहीं रहने से लहसुन का आकार भी बढ़ा नहीं। आकार छोटा रहने से उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है। उपज प्रति बीघा इस वर्ष 10 क्विंटल के लगभग हुई है। पिछले वर्ष से काफी कम है। पिछले वर्ष आकार भी बड़ा था और उपज भी 15 क्विंटल से लेकर 18 क्विंटल से अधिक हुई थी।

गर्मी अधिक, अभी से भंडारण में भी खराब होगा लहुसन

इस वर्ष अधिक मात्रा में किसान लहुसन का भंडारण कर रहे हैं। कृषि पर्यवेक्षक के अनुसार इस वर्ष मार्च में जिस तरह से तापमान में तेज़ी है उसके चलते आगामी माह में तापमान में और भी तेजी होगी। जिसके कारण लहसुन के खराब होने की काफी ज्यादा संभावना रहेगी।

खेतों से निकलवाने में भी पसोपेश की स्थिति

किसानों ने खेतों से लहुसन की खुदाई तो कर ली है। किसान पशोपेश में पड़ा हुआ है। कटाई करे या सीधे तने के साथ जुड़ा रहने दे। जिन किसानों के पास भंडारण करने की जगह है वो किसान भंडारण कर रहे हैं। जो किसान ऐसी स्थिति में नहीं है वो कटाई करके सीधे मंडियों का रुख तो कर रहे हैं, पर उचित दाम नहीं मिलने के कारण अभी मंडियों में भी आवक में तेज़ी नहीं है।

सरकार की ओर आस लगाए बैठे किसान

क्षेत्र के किसान अमरलाल ने बताया कि इस वर्ष खेत 10 बीघा खेत एक लाख बीस हजार में खेती के लिए किराए पर लिया और उसमें फसल की बुआई की फसल को नीमच मध्यप्रदेश की मण्डी ले गया। जहां से सिर्फ 12 रुपये प्रति किलो के दाम मिले। इसके चलते 2 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है।

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