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जेडीए ने 65 कॉलोनियों में 64000 प्लाॅट बेचे, मकान सिर्फ 1300 बने

राजधानी में जेडीए ने 65 योजनाओं में प्लॉट तो 64 हजार से ज्यादा बेच दिए, लेकिन इनमें मकान सिर्फ 1300 लोगों ने ही बनाए हैं।...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 05:40 AM IST
राजधानी में जेडीए ने 65 योजनाओं में प्लॉट तो 64 हजार से ज्यादा बेच दिए, लेकिन इनमें मकान सिर्फ 1300 लोगों ने ही बनाए हैं। यानी सिर्फ दो फीसदी लोगों ने ही अपना घरौंदा बनाया। यह भी कुछेक कॉलोनियों में ही। बाकी, 31 कॉलोनियां ऐसी पाई गईं जिनमें धरातल पर एक भी मकान दिखाई नहीं दिया। एक दर्जन से अधिक क्षेत्रों में कोई इक्का-दुक्का मकान ही बना हुआ है। जेडीए के भौतिक सर्वे में यह खुलासा हुआ है और इसकी रिपोर्ट नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन विभाग ने विधानसभा में पेश की है। यह भी सच है कि शहर से 30 किलोमीटर तक की परिधि में जमीनों पर भूखंड बेचकर जेडीए कमाई करता रहा लेकिन गया। कॉलोनी विकसित या उसमें बसावट पूरी हो या न हो, इससे कोई सरोकार नहीं रखा। इसका असर यह हुआ जमीनों की कीमतें बढ़ती गईं। जरूरतमंदों के लिए जमीनों के भाव आसमान पर पहुंच गए। लोगों को अपने घर के लिए जमीन खरीदना तक बूते से बाहर हो गया है। हालांकि, सुदूर इलाकों में कॉलोनियां काटने के पीछे जेडीए का तर्क है कि आस-पास में भूमि उपलब्ध नहीं होने से शहर से दूर जाना पड़ा है। राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1996 से 2015 तक जेडीए ने 65 कॉलोनियों या योजनाओं में 64 हजार 323 भूखंड काटकर बेचे। इसमें से 1341 लोगों ने मकान बना लिए, इसके अतिरिक्त सभी भूखंड खाली हैं। चौकाने वाला तथ्य यह है कि तीन कॉलोनियों में 1700 से ज्यादा भूखंड पिछले 12 साल से विवादों में फंसे पड़े हैं और आवंटियों को नहीं मिले हैं।