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लोकायुक्त ने माथुर आयोग के मामलों की फाइनल रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी

पिछली भाजपा सरकार के 2004 से 2008 के बीच नगर निगम, जेडीए से लेकर सचिवालय तक भू उपयोग परिवर्तन, भू आवंटन और धारा 90 बी के तहत...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:15 PM IST
पिछली भाजपा सरकार के 2004 से 2008 के बीच नगर निगम, जेडीए से लेकर सचिवालय तक भू उपयोग परिवर्तन, भू आवंटन और धारा 90 बी के तहत भ्रष्टाचार, अनियमितता, पद के दुरुपयोग के मामलों से जुड़ी फाइनल रिपोर्ट लोकायुक्त एसएस कोठारी ने राज्यपाल कल्याण सिंह को सौंप दी है। माथुर आयोग से प्राप्त प्रकरणों की जांच 757 पेज में तैयार की गई है। दोषी मिले 25 लोकसेवकों पर कार्रवाई पहले ही हो चुकी है। हाईकोर्ट के आदेश पर माथुर आयोग के 1828 मामले लोकायुक्त को नए सिरे से जांच के लिए दिए गए थे।

गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार में 2009 में जस्टिस एनएन माथुर की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन हुआ था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस पर कोर्ट ने आयोग के समस्त प्रकरण नये सिरे से जांच कराने के लिए लोकायुक्त को सौंपे थे। जांच में 27 प्रकरण कानून व नियमों के विरुद्ध पाए गए। इन मामलों में पुलिस अथवा सक्षम न्यायालय में कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं 13 मामलों की जांच में लोकसेवकों द्वारा कर्तव्य निर्वहन में पद का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार एवं अकर्मण्यता के मामले में दोषी पाए गए 25 लोकसेवकों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। महत्वपूर्ण प्रकृति के मामलों की पत्रावलियों के रख-रखाव में भी लापरवाही की गई। यह भी पाया गया कि जेडीए, नगर निगम, नगर सुधार न्यास, नगर परिषद, नगरपालिका द्वारा भवन निर्माण की अनुमति दिये जाने से सम्बन्धित नियमों में कई प्रकार की विसंगतियां है। जांच के निष्कर्ष के बाद भू-परिवर्तन में अनियमितता के 199 प्रकरणों में से 28 मामलों को निस्तारित किया गया। 38 प्रकरणों में शर्तों की पालना करने में चूक होना पाया गया। इसकी राशि की वसूली करवाकर नियमितीकरण करवाया गया। 133 प्रकरणों में अन्य वांछनीय कार्रवाई करवाई गई। जांच में भू-आवंटन के 36 प्रकरणों में अनियमितता पाई गई, जिनमें से 10 मामलों में निस्तारित किया गया। आठ प्रकरणों में देय राशि/शास्ति राशि की वसूली करवाकर नियमितीकरण करवाया गया। 18 प्रकरणों में अन्य वांछनीय कार्रवाई करवाई गई। कोठारी के अनुसार 18 मामलों में राजकीय भूमि, मार्गाधिकार की भूमि पर अतिक्रमण या भवन विनियमों का उल्लंघन कर अवैध निर्माण होना पाया गया। अनियमितता के 88 प्रकरणों में देय मुद्रांक शुल्क, विकास शुल्क, लीज राशि, शास्ति, नियमितीकरण शुल्क आदि के रूप में 20 करोड़ 37 लाख 42 हजार 292 रु. की वसूली करवाई जाकर राशि राजकोष में जमा करवाई गई।

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