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समृद्धि के लिए हर हाल में ट्रम्प से वार्ता चाहते हैं किम जोंग उन

Dainik Bhaskar

May 28, 2018, 05:00 AM IST

सात वर्ष पहले किम जोंग उन ने जब उत्तर कोरिया के शासक का कार्यभार संभाला था, तब उन्होंने अपनी जनता से वाता किया था कि वे देश के भविष्य को समृद्ध बनाने एवं किसी भी बुरी स्थिति से बचाने के लिए पूरे प्रयास करेंगे। उन्हें यह अच्छी तरह पता था कि पिछले वर्षों में उनके देश ने कई तरह के प्रतिबंधों-मुश्किलों का सामना किया, इस कारण देश को वह गति नहीं मिल पाई, जो मिलनी चाहिए थी। आज जब कुछ ही महीने पहले पड़ोसी दक्षिण कोरिया में विंटर ओलिम्पिक खेलों का आयोजन हुआ, तब उत्तर कोरिया को अहसास हुआ कि वे भी अपने देश को तरक्की की राह पर ले जा सकते हैं। इन सब बातों के लिए जरूरी है कि कैसे भी करके अमेरिका के साथ वार्ता की जाए और सुलह-समझौते से मतभेद मिटाकर प्रतिबंधों से मुक्ति पाई जाए। इसी प्रयास के तहत किम जोंग उन ने व्हाइट हाउस में वार्ता का न्योता भेजा और इसमें अपने पड़ोसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जाए इन की मदद ली।

शासन संभालने के बाद अपने पहले भाषण में किम जोंग उन ने देश के उन लाखों लोगों को बेहतर जिंदगी देने की कसम खाई थी, जिन्होंने 1990 के दशक में भयावह सूखे का सामना किया था। फिर पिछले ही वर्ष उन्होंने पुन: लोगों से माफी मांगी कि वे अपना वादा पूरा नहीं कर पाए, लेकिन वे ऐसा करेंगे जरूर। संभवत: इन बातों से सीख लेते हुए उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में अपना फोकस बदला। पहले वे परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनना चाहते थे, अब उन्होंने समृद्ध अर्थव्यवस्था का सपना देखा है। देश को इस दिशा में ले जाने के लिए उन्हें प्रतिबंधों से मुक्त होना होगा और यह सब अमेरिका की मंजूरी के बिना नहीं हो सकेगा।

यही कारण है कि पिछले गुरुवार को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 12 जून को होने वाली वार्ता अचानक रद्द करने की सार्वजनिक घोषणा कर दी, तब भी किम जोंग उन ने विनम्र और सोहार्दपूर्ण रवैया बनाए रखा। उन्होंने परिवक्व राजनयिक दृष्टिकोण से दुनिया को संदेश दिया कि वे अब भी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ वार्ता के प्रति आशान्वित हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जब चाहें, तब वार्ता हो सकती है। इसी से पता चलता है कि 34 वर्षीय किम जोंग उन के लिए यह वार्ता क्यों महत्वपूर्ण है। वे एक उद्देश्य लेकर चल रहे हैं, वे किसी भी स्थिति में 71 वर्षीय अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ वार्ता चाहते हैं और उसमें ऐसी कोई डील चाहते हैं जो उनके देश की अर्थव्यवस्था एवं 2.5 करोड़ नागरिकों के हित में हो। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि वे अपने परमाणु हथियार अभी खत्म कर देंगे, लेकिन वे इसकी मंशा जाहिर कर चुके हैं। इसी कारण शनिवार को उन्होंने अपने पड़ोसी राष्ट्रपति मून जाए इन के साथ अचानक सीमा क्षेत्र में मुलाकात की और संभवत: उनसे आग्रह किया कि वे कैसे भी करके वार्ता रद्द होने से बचाएं। मून जाए इन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे हरसंभव प्रयास करेंगे। इसी दौरान वाशिंगटन में भी ट्रम्प ने भी इच्छा जाहिर कर दी कि वे उत्तर कोरियाई शासक के साथ वार्ता कर सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ट्रम्प के वार्ता रद्द करने के फैसले के बाद जितनी तेजी से किम जोंग उन ने अपनी विनम्रता का परिचय दिया, वह बहुत अच्छा और मजबूत दृष्टिकोण था। वे अमेरिका के साथ केवल डिप्लोमेटिक डील ही नहीं चाहते, वे कुछ और भी चाहते हैं। दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल स्थित एशियन इन्स्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज़ में सीनियर फेलो शिन बियूम चुल का मानना है कि ‘उत्तर कोरिया मौजूदा प्रतिबंधों में भी खुद को ठीक-ठाक स्थिति में बनाए रख सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब चीन उसको मदद करना जारी रखे’। किम जोंग उन अपने देश की जनता के साथ किया वादा पूरा करना चाहते हैं, इसके लिए जरूरी है कि देश की अर्थव्यवस्था तेजी से तरक्की करे और उसके लिए प्रतिबंधों का हटना बहुत जरूरी है।

वाशिंगटन स्थित कंसल्टेंसी फर्म यूरेशिया ग्रुप में कोरिया मामलों के विशेषज्ञ स्कॉट सीमैन कहते हैं- किम जोंग उन के आसपास रहने वाला समूह अपेक्षा से काफी बड़ा है। ‘अन्य तानाशाहों की तरह किम जोंग उन भी रात में सोते हैं, लेकिन वे यह नहीं जानते कि वे कब उठेंगे’। © The New York Times

दैनिक भास्कर से विशेष अनुबंध के तहत

किम जोंग उन ने अपने नागरिकों से वादा किया है कि वे उन्हें अच्छी ज़िंदगी देंगे। इसी वादे को पूरा करने के लिए वे अमेरिकी राष्ट्रपति से वार्ता चाहते हैं। इस वार्ता से संभव है कि उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंध कुछ कम होंगे और उनके देश की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा।

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