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क्रिकेट-फुटबॉल के 90 ट्रेनिंग कैंप कश्मीर में चल रहे, बाकी खेलों के 22 इंडोर स्टेडियम बन रहे

कश्मीर के भटके हुए युवाओं को मोटीवेट करने के लिए सरकार ने खेल का सहारा लिया है। हाथ में गेंद थमाकर सरकार युवाओं को...

Danik Bhaskar | Jun 11, 2018, 05:10 AM IST
कश्मीर के भटके हुए युवाओं को मोटीवेट करने के लिए सरकार ने खेल का सहारा लिया है। हाथ में गेंद थमाकर सरकार युवाओं को बंदूक, पत्थर और ड्रग्स से दूर करना चाहती है।

इसी से जुड़ी रिपोर्ट जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती ने चार दिन पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी है। राजनाथ यहां राज्य के पहले स्पोर्ट्स काॅन्क्लेव में शामिल होने आए थे। उन्होंने इस पहल को स्पोर्ट्स की करामात कहा। इसका ही नतीजा है कि एक साल में 60 हजार बच्चे अलग-अलग इवेंट्स में शामिल हुए हैं। इनमें 12 हजार लड़कियां भी हैं। यहां उम्र की कोई सीमा नहीं है। ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा खेल से जुड़ें। खेल को लेकर जिद ऐसी कि पत्थरबाजी के लिए बदनाम डाउन टाउन में 6 थाने हैं, पर 8 मैदान। शेष | पेज 5

कश्मीर घाटी में मैदान के रास्ते राह पर लौट रहे युवा; सालभर में 60 हजार बच्चे स्पोर्ट्स इवेंट में उतरे, 289 मेडल जीत लाए

यूनीक आइडिया: गांव-गांव में ट्रेनिंग के लिए कम्युनिटी कोच

हिजाब पहनकर फुटबॉल प्रैक्टिस।

सरकार ने एनआईएस पटियाला से 200 युवाओं को ट्रेनिंग दिलवाई है। अब ये युवा कोच की भूमिका निभा रहे हैं। कश्मीर के गांव-गांव जाकर युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। ताकि जो युवा ट्रेनिंग लेने शहर नहीं आ सकते, ट्रेनिंग खुद उन तक पहुंचे। रग्बी, फुटबॉल, ताइक्वांडो, वुशू के लिए श्रीलंका, फ्रांस और बाकी देशों से इंटरनेशनल कोच भी कश्मीर आते हैं।

2 कहानियां: जब बंदूक और पत्थर को छोड़ गेंद उठाई

माजिद- बेस्ट स्टूडेंट, आतंकी और अब कोच

साउथ कश्मीर आतंकवाद का गढ़ है। अनंतनाग में रहने वाला माजिद खान अपने दोस्त के एनकाउंटर के बाद आतंकवादी बन गया था। ये वही माजिद था, जिसे कुछ समय पहले स्कूल में स्टूडेंट ऑफ द इयर अवॉर्ड मिला था। परिवार वालों के कहने पर माजिद आतंकवाद छोड़ घर लौट आया। फिर स्पोर्ट्स काउंसिल के प्रोग्राम के जरिए एनआईएस पटियाला में ट्रेनिंग ली। आज माजिद फुटबॉल कोच है।

अफशां- पत्थर फेंकने वाली, अब फुटबॉलर

अफशां अपने उस फोटो से चर्चा में आई थी, जिसमें वह पत्थर लिए सुरक्षाबलों की ओर दौड़ रही है। अब अफशां कश्मीर वुमन फुटबॉल टीम की कैप्टन है। कश्मीर में 70 बच्चों को फुटबॉल भी सिखाती है, जिनमें 30 लड़के हैं। अफशां कहती हैं- पढ़ाई और फिर फुटबॉल के बाद किसी और बात के बारे में सोचने का वक्त ही नहीं मिलता।