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मोदी का चीन को जवाब- जो प्रोजेक्ट हमारी अखंडता का सम्मान करेगा, उसी के साथ हम

मोदी का एससीओ को सिक्योर मंत्र एजेंसी|क्विंगदाओ चीन के क्विंगदाओ में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 05:10 AM IST

मोदी का चीन को जवाब- जो प्रोजेक्ट हमारी अखंडता का सम्मान करेगा, उसी के साथ हम
मोदी का एससीओ कोसिक्योर मंत्र

एजेंसी|क्विंगदाओ

चीन के क्विंगदाओ में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन के प्लेनरी सत्र को संबोधित किया। इसमें उन्होंने आतंकवाद का मुद्दा उठाया। मोदी ने चीन को भी इशारों में नसीहत भी दी। मोदी ने संप्रभुता, आर्थिक विकास और एससीओ देशों में एकता और कनेक्टिविटी पर जोर दिया। मोदी ने कहा कि भारत किसी भी ऐसे प्रोजेक्ट का स्वागत करेगा, जो समावेशी, टिकाऊ और पारदर्शी हो। सभी सदस्य देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करे। दरअसल, मोदी ने चीन के ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) प्रोजेक्ट को निशाना बनाया। जिसके तहत वह पाक अधिकृत कश्मीर में सड़क निर्माण कर रहा है।

मोदी ने एससीओ समिट में ‘सिक्योर’ मंत्र भी दिया। इसमें उन्होंने सिक्योर का फुलफाॅर्म भी बताया। बोले- कनेक्टिविटी का मतलब सिर्फ भौगोलिक कनेक्शन नहीं, बल्कि एक-दूसरे के नागरिकों का कनेक्शन है। भारत एससीओ देशों से सहयोग पसंद करेगा। मोदी ने कजाखस्तान के राष्ट्रपति से द्विपक्षीय बातचीत भी की।

S- सिक्योरिटी ऑफ सिटीजन्स, E- इकोनॉमिक डवलपमेंट, C- कनेक्टिविटी इन द रीजन, U- यूनिटी, R- रैस्पेक्ट सॉवरिनिटी एंड इंटिग्रिटी और E-एनवायर्नमेंट प्रोटेक्शन

समिट में मोदी ने चीन को ओबीओआर प्रोजेक्ट पर नसीहत दी, अफगानिस्तान में आतंक को लेकर पाकिस्तान को घेरा

हाथ मिले, दिल नहीं

मोदी से पाक राष्ट्रपति ने मिलाया हाथ, 10 सेकंड में दो बार बात की

तस्वीर समिट के मंच की है। जिस वक्त मंच पर मोदी चीन के राष्ट्रपति शी से मिल रहे थे, उसी दौरान वहां पीछे से पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन पहुंच गए। ममनून ने हाथ आगे बढ़ाया तो मोदी ने भी हाथ मिलाया। मोदी और ममनून के बीच 10 सेकंड दो बार बात हुई।

समिट में मोदी द्वारा उठाई गईं दो अहम बातें

आतंकवाद: अफगानिस्तान के लिए शांति की पहल

मोदी ने आतंकवाद के जरिए पाक को आड़े हाथों लिया। बोले, भारत की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। अफगानिस्तान आतंकवाद के प्रभावों का दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है। राष्ट्रपति अशरफ गनी ने शांति के लिए जो कदम उठाए हैं, उसका क्षेत्र के सभी देश सम्मान करेंगे।

एससीओ समिट से भारत को क्या मिलेगा

आतंक के मुद्दे पर पाक बेनकाब किया जा सकेगा

एससीओ में चीन, रूस के बाद भारत तीसरा बड़ा देश है। एससीओ दुनिया के बड़े क्षेत्रीय संगठनों में से एक है। इससे जुड़ने से भारत को सामरिक और आर्थिक दृष्टि से फायदा होगा। भारत एससीओ मंच को माध्यम बनाकर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को सदस्य देशों के बीच बेनकाब कर सकेगा। आतंकी संगठन भी चिह्नित होंगे।

पर्यटन: एससीओ देशों से भारत में पर्यटकों की मांग

मोदी बोले- भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों में सिर्फ 6% ही एससीओ देशों से आते हैं। इसे दोगुना किया जा सकता है। हमारी साझा संस्कृतियों के बारे में जागरुकता बढ़ने से इसमें इजाफा हो सकता है। भारत में एससीओ फूड फेस्टिवल, बौद्ध फेस्टिवल आयोजित करेंगे।

एक मंच पर आने से चीन से रिश्ते और अच्छे होंगे

एससीओ में हिस्सा लेने से भारत और चीन के रिश्ते आने वाले सालों में और अच्छे होंगे। इसी का असर है कि भारत और चीन के बीच ब्रह्मपुत्र के पानी के डेटा को लेकर करार हुआ। चावल और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को लेकर भी नई सोच बनी है। दवाइयों और सूचना प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर बात हुई है।

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Web Title: मोदी का चीन को जवाब- जो प्रोजेक्ट हमारी अखंडता का सम्मान करेगा, उसी के साथ हम
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