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देह व्यापार में लिप्त 60 परिवारों के बच्चे अभी भी शिक्षा-पोषाहार से वंचित

कार्यालय संवाददाता. भरतपुर। नगर निगम क्षेत्र के पंछी का नंगला इलाके में वर्षों से देह व्यापार चल रहा है। करीब 60...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 05:15 AM IST
देह व्यापार में लिप्त 60 परिवारों के बच्चे अभी भी शिक्षा-पोषाहार से वंचित
कार्यालय संवाददाता. भरतपुर।

नगर निगम क्षेत्र के पंछी का नंगला इलाके में वर्षों से देह व्यापार चल रहा है। करीब 60 परिवार इसमें लिप्त हैं। इन परिवारों में 18 साल से कम उम्र के करीब 150 बच्चे भी रहते हैं। यह खुलासा उस समय हुअा जब इन बच्चों को पर्याप्त शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण मिले, इसकी जानकारी व सर्वे के लिए सोमवार को राष्ट्रीय बाल आयोग एवं राज्य बाल आयोग की संयुक्त टीम यहां पहुंची। टीम ने पंछी का नंगला सहित आसपास के विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्र व पुलिस थानों का निरीक्षण भी किया।

राज्य बाल आयोग सदस्य एसपी सिंह और उमा र|ू, रिसर्च कंसलटेंट शैली सिंह, अंजलि कुमारी तथा डॉ. विजयपाणि पांडेय सोमवार सुबह पंछी का नंगला पहुंचे। यहां राउमावि, राप्रावि तथा इसी परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान केंद्र संचालिका ने केंद्र पर कॉमन शौचालय, मुख्य द्वार व चारदीवारी नहीं होना, संसाधनों की कमी, वेंटिलेटर का अभाव आदि समस्याओं से अवगत कराया गया। वहीं छोटे बच्चों के सर्वागींण विकास के लिए दूध, मुरमुरे, खिचड़ी, दलिया पर्याप्त मात्रा में नहीं पाए जाने पर सदस्यों ने नाराजगी जताई। इस मामले को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग के उप निदेशक को कलेक्टर कार्यालय में तलब किया और कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। आयोग सदस्यों ने बताया कि भरतपुर शहर के आसपास रहने वाले करीब 60 परिवार देह व्यापार से जुड़े हैं। इन परिवारों में 18 वर्ष तक आयु के 150 बच्चे भी रहते हैं। हालांकि इनमें से करीब 45 बच्चे राप्रावि तथा 30 बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र पर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यही नहीं इतने ही बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। साथ ही बताया कि इन परिवारों के लोग कहां कहां से युवतियां लाते हैं, उन्हें कब तक इस पेशे से जोड़े रखते हैं तथा इससे उनके शरीर पर क्या दुष्प्रभाव होते हैं इस बारे में मंगलवार को पेशे से जुड़े लोगों की काउंसलिंग कर पता लगाया जाएगा। सदस्यों ने बताया कि 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों के साथ होने वाले किसी भी अपराध के बाद जब उन्हें थाने ले जाया जाता है तो उनमें असुरक्षा की भावना पैदा नहीं हो और उन्हें बाल मैत्री पूर्ण व्यवहार मिले। पुलिस अन्य अपराधियों की तरह बच्चों से बर्ताव नहीं करे और संवेदनशीलता बरते, इसके लिए सभी थानों में बाल डेस्क व बाल रजिस्टर के साथ बाल कल्याण अधिकारी का होना आवश्यक है।


पंछी का नगला सहित आंगनबाड़ी केंद्र व थानों के निरीक्षण में हुआ खुलासा

भरतपुर। कलेक्टर व एसपी से बातचीत करते बाल संरक्षण आयोग के सदस्यों की टीम।

थानों में बाल डेस्क और रजिस्टर भी नहीं मिले

टीम दोपहर में सेवर थाना पहुंची जहां बाल डेस्क, बाल रजिस्टर नहीं मिला। इतना ही नहीं बाल कल्याण अधिकारी भी गैरहाजिर थे। वहीं मथुरा गेट थाने पर भी बाल डेस्क व बाल रजिस्टर नहीं था। इस पर सदस्यों ने नाराजगी जताई और कलेक्टर व एसपी कार्यालय में अलग अलग बैठक कर निर्देश दिए कि सभी थानों में बाल डेस्क, बाल रजिस्टर व बाल कल्याण अधिकारी की आवश्यक रूप से व्यवस्था की जाए। इस मौके पर कलेक्टर डॉ. एनके गुप्ता, एसपी अनिल कुमार टॉक, कई थानाधिकारी, राजकीय संप्रेषण किशोर व बालगृह अधीक्षक राजेंद्र शर्मा, सीडीपीओ श्याम प्रकाश, डीईओ प्रारंभिक ओमप्रकाश मुदगल, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सरोज लोहिया आदि मौजूद थे।

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