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नवाज शरीफ के बयान में पाकिस्तान का सच से सामना

भारत-पाकिस्तान के रिश्तों की बुनियाद में झूठ का इतना गारा लगा है कि उस पर सच्चाई की छोटी-सी ईंट भी कंपन पैदा कर देती...

Dainik Bhaskar

May 15, 2018, 05:15 AM IST
भारत-पाकिस्तान के रिश्तों की बुनियाद में झूठ का इतना गारा लगा है कि उस पर सच्चाई की छोटी-सी ईंट भी कंपन पैदा कर देती है। यही कारण है कि इस महाद्वीप और उसके नागरिकों के हितों पर उसकी सरकारों और उनकी संस्थाओं के स्वार्थ हावी रहते हैं। नवाज़ शरीफ के बयान पर दोनों ओर मचा हंगामा इसका सबूत है। भारतीय मीडिया और राष्ट्र-राज्य नवाज़ शरीफ के डाॅन अखबार को दिए गए इंटरव्यू के इतने हिस्से पर मगन हैं कि पाकिस्तान में सक्रिय उग्रवादी संगठन गैर-सरकारी किरदार हैं और क्या हम उन्हें सीमा पार करके मुंबई में 150 लोगों को मारने की अनुमति देंगे। शरीफ ने यह भी कहा था कि हम उन पर मुकदमा क्यों नहीं चलाते, जबकि रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस तरह का सुझाव दे चुके हैं। निश्चित तौर पर शरीफ का यह बयान भारत के हित में है। सेना ने इस बयान से पैदा हुए हालात पर नेशनल सिक्योरिटी कमेटी की बैठक बुला डाली। शरीफ के इस बयान में सत्ता से हटाए गए और राजनीति से प्रतिबंधित किए गए एक राजनेता का दर्द बयां हो रहा है। इसमें नागरिक नेतृत्व और सैनिक नेतृत्व का टकराव भी झांकता है और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन का अंतर्विरोध भी। इसीलिए शासक दल पीएमएल-एन के प्रधानमंत्री शाहिद खकन अब्बासी ने इस पर मौन साध रखा है तो पार्टी के अध्यक्ष और नवाज शरीफ के छोटे भाई शाहबाज शरीफ ने आगामी चुनावों को देखते हुए कह दिया है कि नवाज़ शरीफ के बयान में पार्टी की औपचारिक नीति शामिल नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में अपनी पार्टी और उसके नेता की तारीफ करते हुए कहा है कि 1998 में पाकिस्तान को एटमी राष्ट्र बनाने का फैसला नवाज़ शरीफ का ही था। सीमा पार आतंकी हमलों ही नहीं देश के भीतर के आतंकी समूहों के बारे में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई व नागरिक नेतृत्व के बीच खींचतान रही है जो समय-समय पर प्रकट होती रही है। दूसरी तरफ पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव रियाज मोहम्मद खान जैसे लोगों का मानना है कि मुंबई के हमले ने कश्मीर के मकसद को पीछे कर दिया। दिल्ली से इस्लामाबाद तक फैले इन तमाम अंतर्विरोधों, बुरे इरादों और गलतफहमियों के बीच नवाज शरीफ का बयान एक ऐसा सच है, जिसकी दोनों देशों को सबसे ज्यादा जरूरत है। उसके बिना इन पड़ोसियों का कल्याण नहीं है।

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