Hindi News »Rajasthan »Nagar» गुडविल आपके बिज़नेस को टिकाऊ बनाती है

गुडविल आपके बिज़नेस को टिकाऊ बनाती है

एक कठोर मेहनत करने वाले दैनिक मजदूर को दिन के अंत में फर्म का अकाउंटेंट उस लेज़र पर उसके अंगूठे के निशान लेकर 200 रुपए...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 30, 2018, 05:15 AM IST

एक कठोर मेहनत करने वाले दैनिक मजदूर को दिन के अंत में फर्म का अकाउंटेंट उस लेज़र पर उसके अंगूठे के निशान लेकर 200 रुपए देता है, जिस पर 300 रुपए लिखा होता है। इस अत्याचार को देख एक व्यक्ति मजदूर के पास गया और उसे कहा, ‘चूंकि तुम पढ़े-लिखे नहीं हो इसलिए तुम अधिक राशि पर अंगूठा लगा देते हो और तुम्हें इसका पता भी नहीं चलता।’ मजदूर कहता है, ‘हां सर, मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं पर वह अकाउंटेंट और आप, दोनों पढ़े-लिखे हैं, ठीक?’ अकाउंटेंट का सामना नहीं कर पाने की शर्मिंदगी के कारण वह व्यक्ति वहां से चला गया।

मुझे यह कहानी तब याद आई जब मैंने 8वीं तक पढ़े शैलेन्द्र यादव के बारे में सुना, जिनका चैरिटी बिज़नेस उनके खुद के बिज़नेस से कहीं बड़ा है। वे जब तीर्थनगरी उज्जैन में घूमते हैं तो लोग उनके प्रति बहुत गर्मजोशी दिखाते हैं इसिलए नहीं कि वे ऊंची आय के व्यक्ति हैं बल्कि इसलिए कि चैरिटी के उनके काम उल्लेखनीय हैं। जब उन्होंने एक अग्रणी कोरियर कंपनी से निवेदन किया कि वे मंद बुद्धि बच्चों द्वारा बनाए मिट्‌टी के दीये व्यावसायिक बिक्री के लिए प्रदर्शित करें तो न सिर्फ कंपनी ने खुशी से इसे स्वीकार किया बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि जो भी वहां आए वह उन्हें खरीदे। वे पुलिसकर्मी जो कई नकारात्मक कारणों से जाने जाते हैं वे भी इस भले काम में शैलेन्द्र की मदद करते हैं। यही बात कई स्कूलों, डॉक्टरों, क्लबों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं, कॉस्मेटिक दुकानें और पंजाबी क्लब जैसी सामुदायिक संस्थाअों के बारे में है, जो उनके शुभचिंतकों की सूची में हैं।

इन मिट्‌टी के दीपकों से होने वाली आय का उनके मूल व्यवसाय से कोई संबंध नहीं है। वे स्थानीय स्कूलों के लिए ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रेक्टर है। वे दीये बनाने वाले मंदबुद्धि बच्चों के स्कूल को उसके चलाने की लागत उठाने मेें मदद करते हैं, जबकि वे इस स्कूल को अपनी व्यावसायिक सेवा नहीं देते। जो उनके क्लायंट लिस्ट में नहीं हंै वे संगठन भी तत्काल उन्हें मदद देने को तैयार रहते हैं यदि वे कहें कि वे वृद्धाश्रम के लिए भोजन खरीदना चाहते हैं और उस मंदिर की सालभर की जरूरत के लिए लकड़ी, घी और नारियल खरीदना है, जहां पूरे 365 दिन ‘अखंड धूनी’ जलती है। वे शव ले जाने के लिए मुफ्त में वैन सेवा भी चलाते हैं।

हालांकि, इन स्वैच्छिक सामाजिक सेवा का उनके ट्रांसपोर्ट बिज़नेस से कोई संबंध नहीं है, उनके अच्छे कामों से पैदा सद्‌भावना का उन्हें बहुत लाभ मिलता है। उनके ड्राइवर कुछ सौ रुपए की वेतनवृद्धि पर शायद ही कभी उन्हें छोड़कर जाते हैं। इसलिए कि वे ड्राइवरों को नियमित वेतन देते हैं, उनके परिवार के मुद्‌दों को अपना समझकर सुलझाते हैं, जबकि वे खुद टीन की छतवाले मकान में रहते हैं। इसी वजह से पेट्रोल-डीज़ल की लगातार बढ़ती कीमतों के इन दिनों में स्कूल स्वेच्छा से अतिरिक्त लागत वहन करते हैं, जबकि साल के शुरू में हुए अनुबंध में लिखी रकम से यह बहुत अधिक होती है। वे ऐसा इसलिए नहीं करते कि उन्हें पता है कि वाहनों पर उन्होंने बहुत लोन ले रखा है और उसके बाद भी अपने मामूली मुनाफे में से वे चैरिटी के काम चलाते रहते हैं बल्कि वे ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि शैलेन्द्र अपने ट्रांसपोर्ट बिज़नेस में भी बहुत पेशेवर रुख अपनाते हैं। दस साल की सेवा में उनकी बसें कभी खराब नहीं हुईं। यदि कभी ऐसा हो भी जाए तो एक बस तैयार रहती है ताकि उसे सेवा में लगाकर बच्चों को घर या स्कूल में देरी होने की स्थिति टाली जा सके। जिम्मेदार ड्राइवरों का चयन करने की उनकी क्षमता बेजोड़ है।

फंडा यह है कि  जब लागत वैश्विक स्तर पर समान हो गई है, तो खरीददार मजबूत चरित्र और गुडविल वाले लोगों की ओर आकर्षित होते हैं।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें FUNDA और SMS भेजें 9200001164 पर

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Nagar News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: गुडविल आपके बिज़नेस को टिकाऊ बनाती है
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Nagar

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×