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सीमा पर धड़ल्ले से चल रहा कोकीन-नशे का अवैध धंधा, हो रही है मानव तस्करी

Dainik Bhaskar

Jun 03, 2018, 05:15 AM IST
सीमा पर धड़ल्ले से चल रहा कोकीन-नशे का अवैध धंधा, हो रही है मानव तस्करी

बिहार के हिस्से की भारत-नेपाल की नियंत्रण रेखा (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर किसका नियंत्रण है? सशस्त्र सीमा बल का, नेपाल के आर्म्ड पुलिस फोर्स का, कस्टम का, आईबी का, सीमावर्ती जिलों की पुलिस का या फिर इनमें से किसी का नहीं!

सच्चाई है कि नियंत्रण रेखा पर पूर्ण नियंत्रण इनमें से किसी का नहीं है। वैधानिक रूप से पश्चिमी चम्पारण के वाल्मीकिनगर से लेकर किशनगंज के गलगलिया तक भारत-नेपाल के बीच दर्जन भर कारोबारी रास्ते हैं लेकिन हकीकत यह है कि खुली सीमा पर असंख्य चोर दरवाजे हैं। दो सौ से अधिक तो नदी नाले हैं।

नेपाल में इन्हें खोला कहते हैं। भास्कर टीम यहां पहुंची तो देखा कि मित्र राष्ट्रों की जनता की बेरोकटोक आवाजाही की आड़ में इन रास्तों का भरपूर फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं। 729 किमी लंबी इस सीमा की दैनिक भास्कर की चार टीमों ने पांच दिनों तक चप्पे-चप्पे की पड़ताल की। टीम ने पाया कि बॉर्डर पर तस्करी, धंधे का रूप धर चुकी है। नशीले पदार्थों, मवेशियों, हथियारों और मानव तस्करी के लिए यह खुली सीमा खतरनाक बन चुकी है। तस्करी की सूची में बिहार में शराबबंदी के बाद शराब और पखवाड़े भर से डीजल-पेट्रोल नए आइटम हैं। बॉर्डर गार्डिंग फोर्स (एसएसबी) के पास राइफल, दूरबीन और नाइट विजन डिवाइस के अलावा कुछ भी नहीं है। मोटर साइकिल तो दूर, साइकिल तक नहीं है। बातचीत में एसएसबी के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि मौजूदा हालात में सीमा को फुल-प्रूफ बनाना नामुमकिन है। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। बॉर्डर के असंख्य लोगों के पास दोहरी नागरिकता है। लोगों की खेती दोनों ओर है। बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले के सुस्ता से वाल्मीकिनगर होते हुए रक्सौल तक के खुले नेपाल बॉर्डर का 120 किमी का रास्ता नदी-नाले, घने जंगल और पहाड़ों के बीच है। यहां जमकर तस्करी हो रही है। शेष | पेज 4 पर



निगरानी करने वाली फोर्स के पास साइकिल तक नहीं

सीमा पर जहां-जहां आबादी है, वहां-वहां कैरियर सिस्टम है। कैरियर यानी माल को बॉर्डर पार कराने वाले लोग। इस तरह महिलाएं साड़ी में कपड़े और दूसरे सामान छिपाकर तस्करी करती हैं।

बॉर्डर पर चल रहा है बट्‌टा बाजार, 80 सेंटर सिर्फ रक्सौल में

रक्सौल कस्टम कार्यालय के सामने से रेलवे गुमटी के उस पार तक सड़क किनारे खुले में मनी एक्सचेंज की स्टॉल कतार में है। स्टॉल पर 500, 200, 100, 50,10 रु. के नए-नए नोट की गड्डी सजाकर रखी गई है। हमें नेपाल से लौटा भारतीय समझ, मनी एक्सचेंजर ने नोट बदलने के लिए अपने पास बुलाया। कैमरे का फ्लैश चमका तो सब स्टॉल बंद करने लगे। पता चला कि सभी अवैध तरीके से यहां मनी एक्सचेंज का काम करते हैं। 100 रु. में चार रु. कमीशन लेते हैं। नियमत: नेपाल के वीरगंज में स्थित नेपाल राष्ट्र बैंक में ही नोट बदले जाते हैं। पर, वहां 5000 से अधिक इंडियन करेंसी नहीं दी जाती है। मनी एक्सचेंज की स्टॉल पर ऐसी कोई लिमिट नहीं है। नेपाल राष्ट्र बैंक में 160 रु. का नेपाली नोट देने पर 100 रु. का भारतीय नोट मिलता है। जबकि, रक्सौल में अवैध तरीके से खुले मनी एक्सचेंज सेंटरों पर 164 रु. नेपाली नोट देने पर 100 रु. का भारतीय नोट दिया जाता है। यहां 80 सेंटर इस धंधे में शामिल हैं।

मानव तस्करी का नया रूट, इस साल ही 23 मामले

खुटौना प्रखंड की पंचायत लौकहा भारत-नेपाल सीमा से बिल्कुल सटी हुई है। अधिकृत रास्ते से यहां भारत से सेब, अंगूर और धान जाता है। थोड़ी ही दूरी पर बलान नदी है। अभी सूखी हुई है। यह नेपाल और भारत के बीच मानव तस्करी का नया रूट है। हफ्ते भर पहले नेपाल से भारत लाई गई छह लड़कियों को एसएसबी ने नदी क्षेत्र में पकड़ा है। लौकहा से छह महीने पहले दिल्ली के लिए बस सेवा शुरू होने के बाद यहां तस्करी बढ़ी है। इन दिनों नेपाल से ज्यादा मानव तस्करी बॉर्डर इलाके के भारतीय गांवों से देश के ही अन्य शहरों की ओर हो रही है। इसे रोकने के लिए एसएसबी ने सोनबरसा, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी और जोगबनी में जागृति बस की शुरुआत की है। मकसद, लोगों को जागरूक करना है। 2018 में यहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग के 23 मामले सामने आए हैं।



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