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मानसून में बढ़ रही है सूखे दिनों की संख्या 24 घंटे में रेकॉर्ड बारिश भी दो गुनी बढ़ी

इस बार मानसून ने तीन दिन पहले 28 मई को केरल मेंे दस्तक दी। 28 मई से लेकर 31 मई तक अरब सागर के मार्ग से आने वाली मानसून की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 03, 2018, 05:15 AM IST

मानसून में बढ़ रही है सूखे दिनों की संख्या 24 घंटे में रेकॉर्ड बारिश भी दो गुनी बढ़ी
इस बार मानसून ने तीन दिन पहले 28 मई को केरल मेंे दस्तक दी। 28 मई से लेकर 31 मई तक अरब सागर के मार्ग से आने वाली मानसून की शाखा सक्रिय रही। मानसून की इस अरब सागर की शाखा ने ही बीते दिनों तटीय कर्नाटक को पार किया और मैसूर, हासन, कोडाइकनाल, तूतीकोरिन तक का रास्ता तय किया। लेकिन इस दौरान बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसून शाखा पिछले तीन दिनों से सुस्त है। ऐसा चार साल बाद हुआ है। इसके पहले 2014 में भी अरब सागर से उठा मानसून ज्यादा सक्रिय था और बंगाल की खाड़ी में सुस्त। तब 23 मई से 9 जून तक मानसून बंगाल की खाड़ी में अटका रहा था।

मौसम विभाग के मुताबिक इस साल उत्तर-पश्चिम में औसत का 100 प्रतिशत, मध्य भारत में 99 प्रतिशत, दक्षिण में 95 प्रतिशत और उत्तर-पूर्व में 93 प्रतिशत बारिश होगी। अगर पूर्वानुमान के अनुसार देश में 97 प्रतिशत बारिश हुई तो यह लगातार तीसरा साल होगा, जब मानसून सामान्य रहेगा।

एग्रोमेट्रालाॅजिस्ट डॉ. रामचंद्र साबले ने बताया, इस साल के मानसून में ड्राय-डे बढ़ेंगे। कम दिन में ज्यादा बारिश होगी। कुछ जगह अति वर्षा होगी, यानी कम समय मेंे धुआंधार बारिश होगी। तटवर्ती क्षेत्र, मध्य भारत, उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में अति वर्षा की संभावना ज्यादा है। जून से अगस्त के 90 दिन मुख्य रूप से बारिश के माने जाते हैं। इस साल इनमें से 70 से 72 दिन वर्षा होने की संभावना है। करीब 20 दिन ड्राय डे रहेंगे। जबकि पिछले साल 15 से 18 दिन सूखे रहे थे। 24 घंटे में रेकार्ड ब्रेक बारिश की घटना ज्यादा होंगी।

2014 और 2015 में लगातार दो साल सूखा झेलने के बाद 2016 में मानसून की स्थिति में सुधार हुआ था। इस दौरान 97 प्रतिशत बारिश हुई थी। हालांकि पिछले साल मानसून सामान्य के आसपास रहा और इस बार मौसम विभाग ने 102 फीसदी बारिश का अनुमान जताया है। इसके पहले अप्रैल में जारी अनुमान में इसे 97 प्रतिशत बताया था। अनुमान के मुताबिक अब 15 जुलाई तक मानसून पूरे देश को कवर कर सकता है।

मानसून ने दस्तक दे दी है। लगातार तीसरे साल मानसून सामान्य रहने की उम्मीद है। लेकिन इस साल ड्राई-डे बढ़ेंगे और 24 घंटे में रेकॉर्ड बारिश की संभावना भी ज्यादा है। पिछले कुछ सालों से यह ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में हमने आईआईटी और अमेरिका के मैसाचुसैट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की रिसर्च के आधार पर जाना कि कैसे भारत में मानसून का पैटर्न बदल रहा है। एकसाथ जानिए, कैसा रहेगा इस साल मानसून और कैसे बदल रहा है पैटर्न।

मानसून ने इस साल तेज बारिश के साथ प्रवेश किया है। 29 मई को कर्नाटक के मेंगलोर में डेढ़ इंच से अधिक बारिश हुई और शहर में बाढ़ की स्थिति बन गई।

632 में से 238 जिलों में बरसात का पैटर्न बदला

आईआईटी बॉम्बे के मुताबिक 632 में से 238 जिलों में बरसात का पैटर्न बदल चुका है। बारिश के 112 साल के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर यह जानकारी सामने आई है। बदले हुए पैटर्न को राजस्थान और गुजरात में देखा जा सकता है। 1901 से 2013 के बीच राजस्थान में 9% तो गुजरात में 26.2%ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

बारिश ने तो रास्ता बदल दिया है, लेकिन खेती को बदलने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सका है। अगर यह ट्रेंड स्थायी तौर पर है तो फसल चक्र और शहरी ढांचे में जल्दी बदलाव किए जाने चाहिए।

बारिश का अनुमान 97% से बढ़ाकर102% हुआ

बदलते ट्रेंड बताती रिपोर्टस

24 घंटे में भारी बारिश की घटनाएं दो गुना बढ़ीं

आईआईटी गांधीनगर की एक रिसर्च के मुताबिक 1979 से 2015 के बीच एक दिन में भारी बारिश के मामले दो गुना बढ़ गए हैं। एक घंटे से भी कम समय में भारी बारिश से शहरों में बाढ़ की स्थिति बन जाती है। पिछले कुछ दशकों में यह ट्रेंड देखने मंे आया है कि शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे में बहुत तेज बारिश होने के मौके बढ़ गए हैं।

बारिश का रेकाॅर्ड रखने की व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए। खासतौर पर शहरों में बारिश के आंकड़े हर 15 मिनट में लेने चाहिए। अभी बारिश का डेटा प्रति 24 घंटे के अनुसार रखा जाता है।

66%

मौसम विभाग के मुताबिक मानसून सीजन के चार महीनों के दौरान सबसे ज्यादा संभावना 96-110% बारिश होने की है। इसकी 66% संभावना है जिसमें से 13% संभावना सामान्य से ज्यादा बारिश की है।

कितनी बारिश की कितनी संभावना

बारिश संभावना

सामान्य से कम (90-96%) 28%

सामान्य (96-104%) 43%

सामान्य से अधिक (104-110%) 13%

बहुत ज्यादा (110%से अधिक) 3%

संभावना सामान्य या ज्यादा बारिश होने की

सूखे माने जाने वाले क्षेत्रों में हाेने लगी ज्यादा बारिश

अमेरिका के मैसाचुसैट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलाॅजी (एमआईटी) ने अपनी एक रिसर्च में बताया है कि पिछले 15 सालों में भारत के उत्तरी और मध्य इलाकों में अच्छा पानी बरसा है। लेकिन इसका जोर उन इलाकों में ज्यादा है, जो हाल के वर्षों तक सूखे माने जाते थे। इन इलाकों में गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, असम, जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड जैसे ज्यादा बारिश वाले राज्यों में हर दूसरे-तीसरे साल सूखे की नौबत आ रही है।

कितने सटीक होते हैं बारिश के अनुमान

10साल में

सिर्फ 3 बार अनुमान के आस-पास रहा मानसून

मौ सम विभाग हर साल लंबी अवधि के लिए मानसून का अनुमान जारी करता है। इसी के आधार पर औसत बारिश तय की जाती है। इसमें 5% कम या ज्यादा की गुंजाइश होती है। यानी, अगर 100% का अनुमान है, तो यह 105% भी हो सकता है और 95% भी। इस हिसाब से पिछले 10 साल में मौसम विभाग सिर्फ 3 बार ही मानसून का सही अनुमान लगा पाया है। बाकी सालों में अनुमान और वास्तविक बारिश में 7-9% का अंतर रहा है।

10साल में अनुमान और बारिश

वर्ष अनुमान वास्तविक अंतर

2018 102% - -

2017 98% 95% -3%

2016 106% 97% -9%

2015 93% 86% -7%

2014 95% 88% -7%

2013 98% 106% 08%

2012 99% 92% -7%

2011 98% 101% 03%

2010 102% 98% -4%

2009 93% 77% -16%

2008 100% 98% -2%

(अनुमान और वास्तविक बारिश में 5% की कमी या इजाफा संभव)

2017 में 44% भविष्यवाणी गलत

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पिछले साल भारी, बहुत भारी और बेहद भारी बारिश की 32 भविष्यवाणियां की थीं। लेकिन इसमें से 14 गलत रही थीं। यह जानकारी आईएडी ने ही एक आरटीआई के जवाब में दी है।

मौसम विभाग भविष्यवाणी करता कैसे है: विभाग 4 तरीके की भविष्यवाणी करता है- शॉर्ट रेंज यानी 12 से 72 घंटे, मीडियम रेंज यानी 5से 7 दिन, एक्सटेंडेड आउटलुक यानी 15 से 30 दिन और मंथली या लॉन्ग रेंज भविष्यवाणी। इसमें गर्मी या मानसून के पूरे सीजन की भविष्यवाणी होती है।

फैक्ट

पिछले 50 साल में देश में औसत या सामान्य बारिश 96-104% के बीच रही है। देश में जितनी बारिश साल भर में होती है, उसमें से 75 से 80% मानसून में होती है। मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत में साल की 90% से अधिक बारिश मानसून में होती है।

देश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र की करीब 15%, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 40% से ज्यादा हिस्सेदारी है।

स्रोत - मौसम विभाग, नेशनल प्रिडिक्शन सेंटर यूएसए, पर्यावरण मंत्रालय

फैक्ट चेक

50 साल में

औसत या सामान्य बारिश 96-104% के बीच रही है।

पिछले 50 साल में देश में औसत या सामान्य बारिश 96-104% के बीच रही है। देश में जितनी बारिश साल भर में होती है, उसमें से 75 से 80% मानसून में होती है। मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत में साल की 90% से अधिक बारिश मानसून में होती है।

देश की जीडीपी में कृषि क्षेत्र की करीब 15%, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 40% से ज्यादा हिस्सेदारी है।

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