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दुष्कर्म से भी ज्यादा दर्दनाक कुछ है तो वह है गुनहगार का अांखों के सामने खुला घूमना

आतंकी हमले में शहीद पुलिसकर्मियों को सलामी देते जवान। -15 साल की एक दुष्कर्म पीड़िता (पहला भाग प्रकाशित होने के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 05:15 AM IST

  • दुष्कर्म से भी ज्यादा दर्दनाक कुछ है तो वह है गुनहगार का अांखों के सामने खुला घूमना
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    आतंकी हमले में शहीद पुलिसकर्मियों को सलामी देते जवान।

    -15 साल की एक दुष्कर्म पीड़िता (पहला भाग प्रकाशित होने के बाद इस बच्ची ने अपनी कहानी भास्कर से साझा की।)

    दुष्कर्म के लिए फांसी तो तय हो गई, पर फांसी तक पहुंचाने वाली अदालतें आिखर हैं कहां?

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    6 साल से हर जिले में नहीं खुल पाए पॉक्सो कोर्ट, दुष्कर्मियों पर इतना रहम क्यों?

    जब तक हर जिले में पॉक्सो कोर्ट नहींतब तक व्यवस्था पर लगातार हमला

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    इ से शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। मैं और मेरे जैसी कितनी ही लड़कियां और महिलाएं इस तकलीफ से गुजरी हैं। यह हर रोज हो रहा है और हर जगह हो रहा है। मेरे साथ यह आठ साल की उम्र में हुआ था। तब मैं इसका मतलब नहीं समझती थी। लेकिन अब 15 वर्ष की उम्र में मुझे इसके मायने पता हैं। असल में रेप के होने और न्याय पाने की प्रक्रिया ने मुझे न केवल रेप का मतलब समझाया बल्कि उम्र से पहले बड़ा भी कर दिया। जैसाकि मां बताती हैं, जब मेरे साथ यह घटना घटी तो रेपिस्ट मुझे घर के नजदीक एक सुनसान जगह पर छोड़ गया था। मुझे उस वक्त इतना ही समझ आया कि कुछ बहुत खराब सा मेरे साथ हुआ था। बदहवास सी मां मुझे लेकर अस्पताल पहुंची। चार घंटे तक वे मेरे इलाज के लिए परेशान होती रही और उन्हें मुझे वापस घर ले जाने की नसीहतें भी मिली। जब केस दर्ज हुआ तब जाकर मेरा मेडिकल करवाया गया। उसके बाद तो तकलीफों का अंतहीन सिलसिला शुरू हुआ। जब कोर्ट जाने लगी तो वहां दर्द का एक अलग ही संसार था। मेरे जैसी कई सर्वाइवर्स वहां थीं। 4 साल की बच्ची से लेकर 60 साल की बुजुर्ग महिला तक सबकी आंखों में एक जैसी तकलीफ और सवाल थे। मैं अपनी मां का आंचल पकड़े-पकड़े उनके साथ चलती थी। देखती थी कि कैसे फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक खिसकती रहती। हमें यह भी पता नहीं चलता था कि केस का क्या हो रहा था। जांच अधिकारी कोई भी गोलमोल जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ लेते थे। कई बार तो हमें यह भी पता नहीं होता कि अगली पेशी कब है। पुलिस का रवैया भी कोई खास अच्छा नहीं था। इस प्रक्रिया में मेरी उम्र चार साल बढ़ गई। लेकिन यहां आते-जाते मैं काफी सीख, समझ गई थी।

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    वो बच्ची, जिसे उसकी मां ने बताया : तेरे पेटे में पत्थर है

    एक बार एक 9 साल की मासूम से मुलाकात हुई। परिवार को काफी समय बाद उसके साथ हुई बेरहमी का पता चला था, जब वह प्रेग्नेंट हुई और उसके शरीर में बदलाव नजर आए। बच्ची को तो यह भी नहीं पता था कि उसके साथ क्या हुआ है। उसकी मां ने उसे बताया था कि उसके पेट में पत्थर है और थोड़े दिन बाद सब ठीक हो जाएगा। मैंने उससे बात करने की कोशिश की तो वह सहमकर अपने पिता के पीछे छिप गई। मुझे उसमें खुद का बचपन नजर आ रहा था। एक बार मैंने एक ऐसी महिला भी वहां देखी जिसकी बाहें रेप व पिटाई के कारण नीली पड़ चुकी थीं। सबके अपने-अपने दर्द थे। कुछ तो इतने सदमे में थीं कि वे जिंदा ही नहीं रहना चाहती थीं। हम इंसाफ के लिए लगातार भटक रहे थे लेकिन न्याय नहीं मिल रहा था। कई बार जब मैं बयान देने जाती तो जज नहीं होते और मेरी वकील मुझे साइन भी नहीं करने देती। सबसे ज्यादा रुला देने वाली स्थिति थी जब रेपिस्ट वहां टकराता था। उसकी मुस्कुराहट कहीं भीतर तक चोट करती। उस वक्त मैं खुद को बेहद कमजोर महसूस करती थी। आज मैं और मेरी जैसी रेप सर्वाइवर्स जिंदा हैं लेकिन मुर्दा की तरह। शरीर के जख्म तो शायद भर भी जाएं लेकिन मन के घावों के भरने की उम्मीद दम तोड़ चुकी है। आखिरी विनती यही है कि जज साहब कुछ कीजिए कि जीने की उम्मीद फिर से जगे। जब मैं अखबार खोलूं तो मैं चाहती हूं मैं पढूं कि रेप तो दूर बल्कि गलत तरीके से छूने वाले व्यक्ति को सजा मिली हो।

    जम्मू-कश्मीर | पुलवामा में कोर्ट के बाहर फायरिंग व अनंतनाग में सीआरपीएफ कैंप पर हथगोला फेंका

    आतंकी हमले में दो पुलिस कर्मी शहीद, 11 जवान घायल

    एजेंसी | श्रीनगर

    जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने मंगलवार को पुलवामा में पुलिस दल पर और अनंतनाग में सीआरपीएफ कैंप में सुबह-सुबह हमला किया।

    इन दोनों हमलों में दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए और तीन पुलिसकर्मियों सहित 11 जवान घायल हुए हैं। आतंकियों ने पुलवामा में कोर्ट परिसर के पास तैनात पुलिस दल पर सुबह के समय घात लगाकर गोलीबारी की। पुलिसकर्मियों ने आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। दोनों तरफ से भारी गोलीबारी हुई है। इलाके को खाली करा लिया गया है। सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया है।

    दूसरा हमला अनंतनाग में सीआरपीएफ कैंप में हुआ। तड़के करीब 3 बजे आतंकियों ने सीआरपीएफ के दल पर हमला किया। इसमें सीआरपीएफ के 8 जवान घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आतंकी फरार हो गए। इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया गया है।

    संघर्षविराम मेंे आतंकियों की भर्ती नहीं बढ़ी : सेना

    सेना ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में संघर्षविराम के दौरान आतंकियों की भर्ती में बढ़ोत्तरी होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इस अवधि में पाकिस्तान की ओर से आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशें बढ़ी हैं। श्रीनगर के चिनार कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्‌ट ने यह भी कहा है कि कश्मीर के लोगों ने केंद्र के घोषित एकतरफा संघर्षविराम पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है।

    आतंकियों ने मुखबिर होने के संदेह में घर फूंका

    शोपियां जिले में आतंकियों और लोगों की भीड़ ने सेना के मुखबिर होने के संदेह में एक व्यक्ति के घर में आग लगा दी। समय रहते सूचना मिलने से मौके पर पहुंचे फायरफाइटरों ने आग को बुझा लिया, लेकिन इससे घर और उसके पास की दुकान को आंशिक नुकसान हुआ है। आतंकियों ने किफायत मीर को सेना का मुखबिर होने के आरोप में पकड़ा और उसे मारने-पीटा। इस दौरान उसका एक वीडियो भी बनाया, जिसमें उससे जबरन कबूल करवाया कि वह सेना का मुखबिर है। इसके बाद वहां मौजूद भीड़ ने उसके घर में आग लगा दी।

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