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आप काम को खुद से पहले रखते हैं तो सैनिक ही होते हैं

उस दिन नागपुर के धनतोली स्थित स्पंदन हार्ट इंस्टीट्यूट ने मध्यप्रदेश के रोगी अग्निहोत्री की सर्जरी के लिए दस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 05:15 AM IST

आप काम को खुद से पहले रखते हैं तो सैनिक ही होते हैं
उस दिन नागपुर के धनतोली स्थित स्पंदन हार्ट इंस्टीट्यूट ने मध्यप्रदेश के रोगी अग्निहोत्री की सर्जरी के लिए दस हजार से ज्यादा हार्ट सर्जरी का अनुभव रखने वाले हृदय रोग विशेषज्ञ हैदराबाद के डॉ. प्रतीक भटनागर से मदद मांगी। अग्निहोत्री के दिल की तीन धमनियां सिकुड़ गई थीं और उनके दिल को पर्याप्त खून व ऑक्सीजन नहीं मिल रही थी, जिसे एंजायना कहते हैं। फिर वे डायबिटीज के रोगी भी थे। डॉ. प्रतीक इस अस्पताल में 1999 से आते रहे हैं, जब यह अस्पताल खुला था और नाजुक मामलों के उपचार के लिए केवल एक हार्ट सर्जन ही वहां मौजूद था। स्पंदन प्रमुख डॉ. हर्षवर्धन मार्डिकर ने मंगलवार को बताया, ‘शहर में ऐसे सात से भी कम सर्जन हैंं, जबकि मामले कई गुना बढ़ चुके हैं।’

किसी भी सर्जन की तरह डॉ. प्रतीक सर्जरी के पहले रोगी की एंजियोग्राफी फिल्म देख रहे थे। पिछले 15 वर्षों से अस्पताल में काम कर रहे एनेस्थेटिस्ट डॉ. अरविंद जोशी ने डॉ. प्रतीक को अभिवादन किया और उन्होंने अभिवादन का जवाब देते हुए पूछा ‘सबकुछ कैसा चल रहा है।’ डॉ. जोशी कुछ देर रुके और कहा, ‘मेरे पिताजी ठीक नहीं हैं और उन्हें हृदय रोग के संबंध में उसी अस्पताल में भर्ती किया जाना है।’ लेकिन, इसके पहले कि वे डॉ. जोशी के पिताजी के मामले पर चर्चा कर सकें, अग्निहोत्री की हालत बहुत खराब हो गई और उन्हें दिल का जबर्दस्त दौरा पड़ा। उन्हें तेजी से ऑपरेशन थियेटर में लाया गया । उन्हें हार्ट-लंग मशीन पर रखने के बाद भी दिल की धड़कन में गड़बड़ी कायम रही। आईसीयू के विशेषज्ञों ने परिवार के सदस्यों को अनहोनी के लिए आगाह कर दिया, क्योंकि रोगी के बचने की गुंजाइश बहुत कम थी।

हालांकि, डॉ. प्रतीक ने उम्मीद न खोते हुए उस नाजुक स्थिति में भी चार बाईपास किए। ऑपरेशन थियेटर में इंटरकॉम कई बार बजा, जो बहुत ही सामान्य बात है लेकिन, डॉ. प्रतीक यह देख न सके कि हर बार इंटरकॉम पर डॉ. जोशी ने ही बात की। उन्हें सूचना दी गई थी कि उनके पिताजी को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। डॉ. मार्डिकर ने उन्हें बताया कि उन्हें वेंटीलेटर पर रखने के अलावा उस पल और कुछ नहीं किया जा सकता। डॉ. जोशी ने डॉ. मार्डिकर से कहा कि चूंकि बहुत ही नाजुक ऑपरेशन चल रहा है, जिसमें उनकी मौजूदगी बहुत महत्वपूर्ण है, तो वे जो भी श्रेष्ठतम उपचार हो, वह करें।

इस बीच, तीन घंटे चली लंबी सर्जरी आखिरकार पूरी हो गई, अग्निहोत्री का ईसीजी ठीक हो गया। जब डॉ. प्रतीक सर्जरी के बाद ऑपरेशन के नोट्स बना रहे थे तो डॉ. जोशी ने उन्हें सूचना दी कि उनके पिताजी का कुछ मिनट पहले निधन हो गया। तब तक उन्होंने सर्जन को कभी अपने पिताजी के मामले की जानकारी नहीं दी थी। जाहिर है जब उनके पिताजी को अस्पताल लाया गया तो अग्निहोत्री की सर्जरी शुरू हो गई थी और स्टाफ के सदस्यों ने डॉ. जोशी को इंटरकॉम के जरिये उनके पिताजी की बिगड़ती स्थिति के बारे में बताया था।

इस तथ्य के बावजूद कि उनके पिताजी दो फ्लोर नीचे थे और योग्य डॉक्टरों के हाथों में थे पर खुद डॉ. जोशी उन्हें जीवित रहते नीचे जाकर मिल नहीं सके। वे कम से कम उनके साथ मौजूद बेस्ट सर्जन डॉ. प्रतीक से उपचार की आगे की राह के बारे में सलाह ले सकते थे पर उन्होंने डॉ. प्रतीक को डिस्टर्ब करना उचित नहीं समझा। दो हफ्ते बाद जब रोगी को जश्न के साथ अस्पताल से छुट्‌टी दी जा रही थी, डॉ. जोशी अपने पिताजी का तेरहवां कर रहे थे।

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

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