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अगर तुम सोच रहे हो

इनमें से कोई बैक बैंचर था, किसी के 90% अंक भी नहीं थे, ये वो हैं जो आज राजस्थान को चला रहे हैं, तुम क्यों हार माने हो,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 07, 2018, 05:20 AM IST

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    इनमें से कोई बैक बैंचर था, किसी के 90% अंक भी नहीं थे, ये वो हैं जो आज राजस्थान को चला रहे हैं, तुम क्यों हार माने हो, सफलता तुम्हारी प्रतीक्षा में है


    अगर तुम सोच रहे हो कि कम अंकों के कारण तुम औरों से पीछे हो चुके हो, असफल हो...तो एक बार फिर से सोचो। क्योंकि असफलता नीचे गिरने में नहीं, बल्कि दोबारा न उठने में है। अंक... विषय पर तुम्हारी पकड़ का पैमाना तो हो सकते हैं, लेकिन भविष्य में तुम क्या बनोगे...यह तय करने वाले अंक कौन होते हैं? हो सकता है यह तुम्हें आधारहीन लगे...। तो आओ उन उदाहरणों को देखो जो अंकों से नहीं, अपनी काबिलियत से राजस्थान को चला रहे हैं। क्योंकि अंक कभी भी जीवन में सफलता का अंकगणित नहीं हो सकते।

    मैंने कॅरिअर में 9000 से ज्यादा शॉट मिस किए हैं। करीब 300 मैचों में हम हारे हैं। 26 मौके ऐसे थे, जब मैंने उस भरोसे को तोड़ा...जब लोगों ने सोचा कि मैं विनिंग शॉट लगा सकता हूं। मैं जीवन में लगातार विफल होता चला गया और इसलिए आज मैं सफल हूं। -माइकल जॉर्डन

    महानतम बॉस्केट बॉल प्लेयर्स में से एक

    (अमेरिकी मूल के खिलाड़ी)

    अंक सफलता का अंक गणित नहीं

    डीसी जैन कलेक्टर, हनुमानगढ़

    मेरे 10वीं में 57%, 12वीं में 50% मार्क्स, अंक नहीं, उद्देश्य जरूरी

    मैं बैक बैंचर हुआ करता था। आरएएस की परीक्षा पास की। आरएएस बना। फिर आईएएस। आज कलेक्टर हूं। दसवीं और बारहवीं कक्षा के अंक ज्यादा मायने नहीं रखते। उद्देश्य क्लीयर होना चाहिए।

    तो उठो...दिमाग पर बैठे कम नंबरों के बोझ को उठाकर फेंक दो...। तुम्हारी प्रतीक्षा में : सफलता

    बाबूलाल मीणा, कलेक्टर, सिरोही

    जिस क्षेत्र में जाना है, उसकी तैयारी करें, सफलता तय है

    मैं गांव से था। 10वीं में 50, 12वीं में 57% थे। आरएएस से आईएएस में प्रमोट हुआ। अंकों से बच्चों को निराश नहीं होना चाहिए। उन्हें किस क्षेत्र में जाना है। सिर्फ तैयारी करें, सफलता तो निश्चित है।

    ये 5 कलेक्टर और एक एसपी सामान्य अंकों के बावजूद सफलता के उदाहरण

    ज्ञानाराम, कलेक्टर, श्रीगंगानगर

    10वीं में 55% थे, 12 वीं में 62%, पर मेहनत लगातार की

    दसवीं में मेरे 55 प्रतिशत अंक ही आए थे। मेहनत की तो 12वीं में 62 फीसदी अंक आ गए। इसी तरह से मेहनत करता गया और सफलताएं मिलती गई। सफलताएं असफलता के बाद ही आती हैं।

    आरसी डेनवाल, कलेक्टर, टोंक

    जो टॉपर है, वही आईएएस या आईपीएस बने, यह जरूरी नहीं

    मेरे दसवीं में 64 और बारहवीं में 63 फीसदी अंक थे। अधिक अंक पाना ही अकेले सफलता के मायने नहीं है। कोई टॉप किया हो, वहीं आगे आईएएस, आईपीएस बनेगा ऐसा जरूरी नहीं है।

    राजेन्द्र भट्‌ट, कलेक्टर, डूंगरपुर

    मुझे दसवीं में 77 और 12वीं में 73% अंक मिले थे। हो सकता है कि कोई फिजिक्स में 100 में से 100 अंक लाए, लेकिन उसको व्यावहारिक ज्ञान न हो। प्रतिभा हर बच्चे में ही होती है।

    डीडी सिंह, एसपी, बारां

    मुझे 10वीं 72%, 12वीं में 70% मिले थे, लेकिन अंकों से ज्यादा जरूरी है कि आपकी रुचि किस क्षेत्र में जाने की है। उसी के अनुरूप आपको तैयारी करनी चाहिए।

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