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सुबह शिवसेना ने कहा, अकेले लड़ेंगे चुनाव शाम को शाह बोले- हर चुनाव साथ लड़ेंगे

Dainik Bhaskar

Jun 07, 2018, 05:20 AM IST
सुबह शिवसेना ने कहा, अकेले लड़ेंगे चुनाव शाम को शाह बोले- हर चुनाव साथ लड़ेंगे

भास्कर न्यूज | मुंबई

भाजपा अध्यक्ष 2019 लोकसभा चुनाव से पहले ‘संपर्क फॉर समर्थन’ अभियान चला रहे हैं। इसी सिलसिले में वह बुधवार को महाराष्ट्र पहुंचे, यहां उन्होंने अपने सबसे पुराने सहयोगी शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे से उनके मातोश्री आवास पर मुलाकात की। इस मीटिंग से पहले शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना में भाजपा को खरी-खोटी सुनाई। इसमें लिखा- अमित शाह इन चुनावों में 350 सीटें जीतना चाहते हैं। वो भी तब जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हुए हैं, किसान सड़क पर हैं। जिस तरह भाजपा ने साम, दाम, दंड, भेद के जरिए पालघर का चुनाव जीता, उसी तरह भाजपा किसानों की हड़ताल को खत्म करना चाहती है। भाजपा को उपचुनावों में हार मिली है, क्या इसलिए उसने सहयोगियों से मिलना शुरू किया है। पर अब देर हो चुकी है। भाजपा राम मंदिर बनाती है तो 350 सीटें जीत सकती है। शिवसेना 2019 चुनाव में अकेले ही लड़ेंगी। इससे पहले शाह सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। वह बोले कि मैं मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद मैं पांचवीं बार उद्धव से मिल रहा हूं। मुझे विश्वास है कि हम अगला आम चुनाव ही नहीं, बल्कि राज्य विधानसभा चुनाव भी साथ लड़ेंगे। शिवसेना की नाराजगी बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है।




महाराष्ट्र में 48 सीटें, 2014 में भाजपा-शिवसेना ने 41 जीती थीं

उद्धव से पहले शाह अभिनेत्री माधुरी दीक्षित व रतन टाटा से मिलने उनके घर पहुंचे। शाह, लता मंगेशकर से भी मिलने वाले थे। पर उनकी तबीयत खराब हो जाने से मुलाकात नहीं हुई।

संघ की सलाह से शाह चुनाव से पहले कर रहे हैं संपर्क यात्रा

भाजपा को संघ ने सलाह दी है कि पार्टी को अपने सहयोगियों से संपर्क बढ़ाना चाहिए। ताकि एकजुट विपक्ष के सामने एनडीए कमजोर न हो। पिछले दिनों दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में संघ और भाजपा नेताओं की एक बैठक भी हुई थी। उसके बाद से ही अमित शाह संपर्क फॉर समर्थन अभियान के तहत एनडीए के नेताओं और देश के नामी लोगों से घर-घर जाकर मिल रहे हैं।

भाजपा का उत्तर प्रदेश से ज्यादा महाराष्ट्र पर फोकस है

भाजपा सीटों के लिहाज से दूसरे सबसे बड़े राज्य पर यूपी से ज्यादा फोकस कर रही है। इसलिए शाह अपने अभियान में यूपी से पहले महाराष्ट्र पहुंचे हैं। शाह किसी भी कीमत पर शिवसेना को चुनाव से पहले मनाना चाहते हैं। क्योंकि यूपी में भाजपा का खेल सपा-बसपा और कांग्रेस का गठबंधन खराब कर सकता है।

2019 चुनाव से पहले बिखर रहा है एनडीए

एनडीए से एक के बाद एक सहयोगी दूर हो रहे हैं। इससे पहले चंद्रबाबू की पार्टी टीडीपी एनडीए छोड़ चुकी है। टीडीपी के 16 सांसद हैं। बिहार में जदयू, भाजपा से ज्यादा सीटें मांग रही है। इसी तरह कुछ अन्य राज्यों में भी भाजपा के सहयोगी दबाव बना रहे हैं।

शिवसेना एनडीए का दूसरा सबसे बड़ा साथी

यूपी के बाद सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें महाराष्ट्र में हैं। यहां 48 सीटें हैं। 2014 में इनमें से भाजपा को 23 और शिवसेना को 18 सीटें मिली थीं। राकांपा को 4, कांग्रेस को 2 और अन्य के खाते में एक सीट गई थी। एनडीए में अभी शामिल दलों के पास कुल 315 सांसद हैं। इनमें शिवसेना के पास दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा सीट हैं। भाजपा ने महाराष्ट्र में दो क्षेत्रीय दलों से भी गठबंधन किया था।

इसलिए उद्धव सरकार में हैं

उद्धव को शिवसेना टूटने और मुंबई हाथ से जाने का भय

शिवसेना दर्जनों बार भाजपा से गठबंधन तोड़ने और सत्ता से बाहर होने की चेतावनी दे चुकी है। पर उद्धव जानते हैं कि यदि शिवसेना केंद्र और राज्य सरकार से बाहर होती है, तो भाजपा को उनकी पार्टी के सांसदों, विधायकों को तोड़ने का मौका मिल जाएगा। लिहाजा सरकार में रहकर पार्टी को आर्थिक और राजनीतिक रूप से मजबूत कर रहे हैं। देश की सबसे अमीर मुंबई महानगर पालिका पर शिवसेना का भाजपा के सहयोग से कब्जा है। इसका सालाना बजट 25,141 करोड़ रु का है। 2017 में यहां शिवसेना के 84 और भाजपा के 82 पार्षद चुनाव जीते।

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