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नरगिस के हर अफसाने में कपूर की हकीकत

राजकुमार हीरानी की रणबीर कपूर अभिनीत ‘संजू’ इसी महीने प्रदर्शित होने वाली है। संजय दत्त के इस बायोपिक के लिए...

Danik Bhaskar | Jun 08, 2018, 05:20 AM IST
राजकुमार हीरानी की रणबीर कपूर अभिनीत ‘संजू’ इसी महीने प्रदर्शित होने वाली है। संजय दत्त के इस बायोपिक के लिए रणबीर कपूर ने अपने को कुछ इस कदर बदला है कि लोग अचम्भित रह जाएंगे। राजकुमार हीरानी की अब तक बनाई सारी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल रही हैं और समालोचकों ने भी सराहा है। लोकप्रिय पत्रकारिता में उन्हें आज का ऋषिकेश मुखर्जी कहा जा रहा है जबकि मुखर्जी की अनेक फिल्में असफल रहीं। वे बिमल रॉय के साथ कलकत्ता से मुंबई आए थे और उनकी फिल्मों के संपादक थे। मुखर्जी साहब की पहली फिल्म ही असफल थी जो उस मकान की कहानी थी जहां बारी-बारी से आकर चार परिवार कुछ समय रहते थे। मुखर्जी को पहली सफलता राजकपूर और नूतन अभिनीत ‘अनाड़ी’ में मिली।

मेहबूब खान की फिल्म ‘मंदर इंडिया’ में हाथ कटा किसान पलायन कर जाता है और उसकी प|ी परिश्रम करके, खेत में बैल की तरह जुतकर अपने बच्चों का लालन-पालन करती है। उसका छोटा बेटा बिरजू महाजन के खिलाफ खड़ा होता है। पात्र बिरजू को सलीम-जावेद ने ‘दीवार’ में प्रस्तुत किया परन्तु ग्रामीण परिवेश के बदले कथा को महानगर में रोपित किया गया। बिरजू के ही प्रभाव में सुनील दत्त ने उसे अपनी फिल्म ‘मुझे जीने दो’ में भी प्रस्तुत किया। ज्ञातव्य है कि दिलीप कुमार द्वारा अस्वीकृत पात्र ही सुनील दत्त ने ‘मदर इंडिया’ में अभिनीत किया था।

सुनील दत्त और नरगिस की प्रेम कहानी ‘मदर इंडिया’ की शूटिंग के समय अंकुरित हुई और खेत में आग लगने के एक दृश्य में सुनील दत्त ने नरगिस के प्राणों की रक्षा की। जब नरगिस राजकपूर की फिल्मों की नायिका थी तब राजकपूर तो पहले से ही विवाहित थे, अत: वह रिश्ता किसी अंजाम तक नहीं जा सकता था। नरगिस और सुनील दत्त ने विवाह कर लिया परन्तु मेहबूब खान ने उन्हें इस बात को जगजाहिर करने से रोका, क्योंकि इससे उनकी फिल्म पर बुरा असर पड़ सकता था कि फिल्म में मां-बेटे की भूमिकाएं करने वाले यथार्थ जीवन में विवाहित हो चुके हैं। यह एक दूर की अटकल है कि पात्र बिरजू ही संजय दत्त के अवचेतन पर भी काबिज रहा। उसने नशीले पदार्थ का सेवन किया, जिससे मुक्ति के लिए सुनील दत्त उसे अमेरिका ले गए जहां ‘अल्कोहोलिक्स एनॉनीमस’ संस्था में उनका उपचार हुआ। उन्हें हथियार रखने और शिकार करने का शौक भी रहा है। वे आदतन प्रेम में भी पड़ते रहे हैं। उस दौर में यह अफवाह भी थी कि जब नरगिस मरणासन्न थीं, तब वे जुहू बीच पर अभद्र अवस्था में पकड़े गए थे। वे सजायाफ्ता मुजरिम भी रहे हैं। आधी रात के बाद पाली हिल्स पर गोलियां दागते भी वे देखे गए थे।

सुभाष घई संजय दत्त के साथ ‘खलनायक’ बना चुके हैं परन्तु राजकुमार हीरानी की फिल्म ‘संजू’ उससे जुदा होगी। फिल्म में संजय दत्त को आभामंडित नहीं किया गया है परन्तु मानवीय करुणा की दृष्टि से अच्छाई और बुराई के बीच झूलते व्यक्ति को प्रस्तुत किया गया है। राजकुमार हीरानी और निर्माता विधू विनोद चोपड़ा ‘मुन्नाभाई एम.बी.बी.एस.’ में शाहरुख खान को लेना चाहते थे और शाहरुख खान को पटकथा पसंद भी थी परन्तु कुछ कारणों से उन्होंने काम नहीं किया। संजय दत्त को केवल इसलिए लिया कि फिल्म में पिता-पुत्र का महत्वपूर्ण दृश्य था। अत: संजय के साथ सुनील दत्त भी उपलब्ध थे इसलिए यह फिल्म उनके साथ बनाई गई।

राजकुमार हीरानी की फिल्म ‘पीके’ के अंतिम दृश्य में रणबीर कपूर ने कुछ शॉट्स दिए थे। संभवत: उसी समय हीरानी के मन में रणबीर कपूर के साथ फिल्म करने की बात अंकुरित हुई होगी। बहरहाल नरगिस के हर अफसाने में किसी कपूर का होना तो ऊपर वाले की पटकथा के अनुरूप होना ही था।

जयप्रकाश चौकसे

फिल्म समीक्षक

jpchoukse@dbcorp.in