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सीएफसीडी का 1955 का नक्शा निकाला अतिक्रमण चिह्नित करने का काम आज से

भरतपुर। सीएफसीडी, जिसे 1955 की स्थिति लाने के लिए प्रशासन को अतिक्रमण हटाने हैं। भास्कर संवाददाता| भरतपुर जिला...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 25, 2018, 05:25 AM IST

सीएफसीडी का 1955 का नक्शा निकाला अतिक्रमण चिह्नित करने का काम आज से
भरतपुर। सीएफसीडी, जिसे 1955 की स्थिति लाने के लिए प्रशासन को अतिक्रमण हटाने हैं।

भास्कर संवाददाता| भरतपुर

जिला प्रशासन सीएफसीडी की वर्ष 1955 की स्थिति बहाल करने के लिए जुट गया है। गुरुवार को प्रशासन ने गूगल से 1955 का नक्शा निकाला और अतिक्रमणों पर चर्चा की। प्रशासन ने एक हफ्ते में अतिक्रमणों को चिह्नित करने के लिए तीन कमेटियां बनाई हैं, जिनमें सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग, नगर निगम तथा नगर विकास न्यास के कर्मचारियों को शामिल किया गया है। राजस्व रिकार्ड के अनुसार सीएफसीडी तीन चक में बंटी हुई है, इसलिए तीन कमेटियां बनाई गई हैं। चिह्नित अतिक्रमियों को नोटिस जारी होंगे तथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा प्रशासन ने 2001 एवं 2011 में हुए सर्वे के अनुसार भी अतिक्रमणों की सूची जुटा ली है। इसमें 150 से ज्यादा अतिक्रमण सामने आए हैं। इस संबंध में जिला कलेक्टर संदेश नायक ने सीएफसीडी से जुडे़ सभी विभागों के अधिकारियों की मीटिंग ली तथा उच्च न्यायालय के निर्देशों की हर हाल में पालना कराने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों उच्च न्यायालय की डबल बैंच ने सीएफसीडी की 1955 की स्थिति बहाल किए जाने के आदेश दिए हैं। इसके बाद प्रशासन सीएफसीडी को अतिक्रमणों से मुक्त कराने की कवायद में जुट गया है।

सीएफसीडी के सद्भावी अतिक्रमियों को जमीन दी जाए

इधर, सीएफसीडी जनहित याचिकाकर्ता श्रीनाथ शर्मा एडवोकेट ने नगर विकास न्यास के सचिव को पत्र लिखकर सद्भावी अतिक्रमियों को भूखंड दिए जाने का अनुरोध किया है। शर्मा ने कहा कि सीएफसीडी व कच्ची खाई में कई लोगों ने भूमि रजिस्ट्री से खरीदी और नगर निगम व यूआईटी ने यहां सड़क डाली, बिजली-पानी की सुविधा उपलब्ध कराई। अगर 2012 के बाद रजिस्ट्री नहीं होती और अतिक्रमणों को रोका होता तो यह स्थिति नहीं आती। इसलिए सद्भावी अतिक्रमियों को किसी याेजना में वैकल्पिक भूखंड दिए जाएं।

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