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जागरूकता पैदा करने के लिए अनूठी पहल करें

दशकों से प्लास्टिक हमारे एजेंडे से बाहर नहीं हो पा रहा है फिर चाहे आज एक और विश्व पर्यावरण दिवस ही क्यों न आ गया हो।...

Dainik Bhaskar

Jun 05, 2018, 05:25 AM IST
जागरूकता पैदा करने के लिए अनूठी पहल करें
दशकों से प्लास्टिक हमारे एजेंडे से बाहर नहीं हो पा रहा है फिर चाहे आज एक और विश्व पर्यावरण दिवस ही क्यों न आ गया हो। आज तक हम प्लास्टिक स्ट्राॅ, गिलास, कटोरियां, डिस्पोजेबल डिब्बे, थैलिया आदि कथित आवश्यक चीजें खत्म करने के तरीके खोजते रहे हैं। लेकिन, दो दिन पहले तक मुझे पता नहीं था सिगरेट में जो सेल्यूलोज एसीटेट होता है वह भी प्लास्टिक से निकलने वाला उत्पाद है।

आवाक रह गए न! ऑनलाइन उपलब्ध प्राथमिक आकड़ों के मुताबिक करीब 4.5 लाख करोड़ सिगरेट बट (सिगरेट पीने के बाद बचा फिल्टर वाला अंतिम सिरा) हर साल दुनियाभर में फेंके जाते हैं। यह विषैला कचरा पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है, जिसके बारे में बहुत सारे लोगों खासतौर पर धूम्रपान करने वालों को नहीं मालूम है। यह पूरी दुनिया के शहरों में पैदा होने वाले कचरे में एक-तिहाई योगदान देता है। सिगरेट बट फेंके जाने के बरसों बाद भी केवल आंशिक रूप से ही नष्ट हो पाते हैं और बहुत सारे विषैले पदार्थ पर्यावरण में छोड़ते रहते हैं।

दो दिन पहले मैंने पुणे के उपनगर बानेर में एक पब के बाहर कांच के आवरण वाला ‘वोटिंग’ बॉक्स देखा। इस पर लिखा सरल-सा प्रश्न था, ‘क्या आप जानते हैं कि आपकी सिगरेट के बट में प्लास्टिक है?’ और उस पंक्ति के नीचे बॉक्स दो भाग में बांटा गया था- ‘हां’ और ‘नहीं।’ जो भी दोनों विकल्पों में से किसी के लिए ‘वोटिंग’ करना चाहता है वह सिगरेट बट संबंधित भाग में डाल सकता है। मुझे यह देख धक्का लगा कि उस बड़े से बॉक्स के ‘नहीं’ वाले भाग में 2000 से ज्यादा सिगरेट बट थे, जबकि ‘हां’ वाले भाग में 50-60 ही बट थे। यानी धूम्रपान करने वाले ज्यादातर लोगों को इसका पता नहीं था!

पुणे के लोगों को प्लास्टिक के प्रति आज की तुलना में अधिक जागरूक बनाने के लिए तीन युवा आंत्रप्रेन्योर ने यह अनूठी पहल की है। नलिनी मंगवानी (28), हंसिका मंगवानी (22) और प्रतीक पुरस्वानी (26) ने दुनियाभर में प्लास्टिक का कचरा फैलने के प्रमुख कारणों से अनोखे मतदान के जरिये निपटने के लिए ‘बट बैलट’ की स्थापना की है। लोगों को अहसास नहीं है कि सिगरेट बट जैसी छोटी-सी चीज कचरे में बहुत बड़े प्रतिशत में योगदान देती हैं और वह भी प्लास्टिक का। आंत्रप्रेन्योर को लगता है कि यदि बट फेंकने के बारे में जागरूकता पैदा कर दें तो काम हो गय। यह पब व रेस्तरां में बार-बार जाने वाले लोगों में चर्चा का कारण बन गया है, जो जागरूकता पैदा करने के लिए पर्याप्त है।

लेकिन, यह बट बैलट वहीं थमा नहीं है। इसने नोएडा स्थित कोड एंटरप्राइज लिमिटेड से अनुबंध किया है, जो पिछले कुछ वर्षों से सिगरेट बट के तत्वों को रीसाइकल करके उपयोगी प्रोडक्ट बना रही है। कोड एंटरप्राइज बची हुई तम्बाकू और पेपर को कम्पोस्ट पावडर में बदलकर उससे रीसाइकल्ड कागज बनाती है। फिल्टर में मौजूद सेल्यूलोज़ ऐसिटेट को एक खास रासायनिक प्रक्रिया से गुजारकर इसका उपयोग तकिया और की-चेन बनाने में किया जाता है। वे मैट्रेस व अन्य उत्पाद बनाने की योजना बना रहे हैं। ‘बट बैलेट’ सिगरेट के बट इकट्‌ठे करके उन्हें जिम्मेदार प्रोसेसिंग के लिए सप्लाई करता है।

अपने परिवार और मित्रों की मदद से विजुअल कम्युनिकेशन्स डिज़ाइन, इंटीरियर डिज़ाइन और लॉ की तीन भिन्न पृष्ठभूमियों के ये तीन युवा आंत्रप्रेन्योर बेहतर और किफायती बैलेट बॉक्स पर काम कर रहे हैं, क्योंकि उनके पायलट डैमो बॉक्स सफल सिद्ध हुए हैं। यह ऐसा प्रोजेक्ट है, जो छोटा दिखाई देता है लेकिन, वह बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।

फंडा यह है कि  जागरूकता पैदा करने के लिए अनोखे तरीके खोजकर ध्यान खींचें। खासतौर पर तब जब दुनिया को सुरक्षित बनाना हो।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें FUNDA और SMS भेजें 9200001164 पर

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

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