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दलों के दफ्तरों की जमीनी हकीकत

प्रदेश में भाजपा-कांग्रेस दो ही बड़े दल हैं। दोनों दलों की ही सरकारें सत्ता में आने पर संस्था व समाजों को जमीन आवंटन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 09, 2018, 05:25 AM IST

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    प्रदेश में भाजपा-कांग्रेस दो ही बड़े दल हैं। दोनों दलों की ही सरकारें सत्ता में आने पर संस्था व समाजों को जमीन आवंटन करती हैं। लेकिन इस बार भाजपा ने सत्ता में आते ही कांग्रेस की ओर से आवंटित जमीनों की जांच कराई और कुछ फैसले निरस्त कर दिए। हाल ही पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बयान दिया कि कांग्रेस सत्ता में आई तो भाजपा की ओर से आवंटित जमीनों की जांच कराई जाएगी। गहलोत का यह बयान इसलिए भी आया है, क्योंकि भाजपा ने खुद के कार्यालयों के लिए प्रदेश के 33 जिलों में से 17 जिलों में जमीनें आवंटित कराई है, जबकि प्रतापगढ़ को छाेड़कर बाकी में आवंटन की तैयारी है। जमीनों के इस विवाद के बीच भास्कर ने दोनों ही दलों के कार्यालयों की स्थिति जानी तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। कांग्रेस करीब 46 साल तक सत्ता में रही है, लेकिन उसके 8 जिलों में ही कार्यालय हैं। इस बार सत्ता में आने से पहले भाजपा के भी यही हालात थे। लेकिन 2015 से लेकर अब तक तीन साल में भाजपा ने 17 जिलों में खुद की जमीन हासिल कर ली है। कहीं जमीन का पैसा जमा होना बाकी है तो तीन जिलों में निजी स्तर पर जमीन खरीद की तैयारी है।

    संस्था-समाजों को आवंटित जमीनों पर विवाद के बीच भास्कर ने जानी दोनों दलों की स्थिति, ऑफिसों के लिए कितनी जगह भूमि आवंटित कराई

    भाजपा ने अपने दफ्तरों के लिए 17 शहरों में सरकार से 15 करोड़ में ली जमीन, कांग्रेस के 23 ऑफिस मंदिर या मैरिज गार्डन में चल रहे

    तीन साल पहले दफ्तरों के मामले में भाजपा-कांग्रेस लगभग बराबर थे

    भाजपा की यहां जमीन : अलवर, भीलवाड़ा, कोटा, पाली, बूंदी, बाड़मेर, सिरोही, राजसमंद, उदयपुर, डूंगरपुर, नागौर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, गंगानगर, टोंक, भरतपुर, सवाईमाधोपुर में 15 करोड़ में जमीन ली। चितौड़, धौलपुर, झुं्झुनूं, जोधपुर, बारां, अजमेर में कहीं पैसे जमा होने बाकी, कहीं जमीन की तलाश। प्रतापगढ़, दौसा व चूरू में निजी जमीन की तैयारी।

    दोनों पार्टियों के प्रदेश मुख्यालय जयपुर में सरकार की ओर से आंवटित भवनों में संचालित हैं

    कांग्रेस ने यहां ली जमीन : पाली, नागौर, सीकर, गंगानगर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, जालौर, उदयपुर व बांसवाड़ा में ही पार्टी के नाम जमीन। बाकी जगह कार्यालय या तो किराए के मकानों में या खुद के मकान-मैरिज गार्डनों में। जयपुर में शहर और देहात कांग्रेस के कार्यालय देवस्थान विभाग के मंदिरों में चल रहे हैं।

    कांग्रेस का आरोप :पॉलिसी गुपचुप बनाई

    भाजपा ने गुपचुप तरीके से पॉलिसी बनाकर जमीनें आवंटित करवाई हैं। अब कई जगह सत्ता का दुरुपयोग करके लैंडयूज चैंज करवाया जा रहा है। कांग्रेस ने कभी सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया। कांग्रेस की सरकार आते ही इन सारे मामलों की जांच करवाई जाएगी। - सचिन पायलट, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

    भाजपा ने कहा :तय नीति से ली गई हैं जमीनें

    राज्य सरकार ने सभी दलों को जमीन आवंटित करने के लिए पॉलिसी बनाई है। इसके तहत कोई भी दल पैसे चुकाकर जमीन ले सकता है। भाजपा कार्यालयों के लिए सरकार से तय नीति के तहत ही जमीन मिली है। इसके बदले डीएलसी के साथ 15 प्रतिशत अतिरिक्त पैसा चुकाया गया है। -अशोक परनामी, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा

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Web Title: दलों के दफ्तरों की जमीनी हकीकत
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