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कल नो निगेटिव न्यूज के साथ करें नए सप्ताह की पॉजिटिव शुरुआत किम छह साल कहीं नहीं गए, अब चार माह में तीसरी...

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2018, 05:25 AM IST
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नए सप्ताह की पॉजिटिव शुरुआत

किम छह साल कहीं नहीं गए, अब चार माह में तीसरी यात्रा

किम-ट्रंप मुलाकात


उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात 12 जून को सिंगापुर में होगी। यह पहला मौका होगा, जब उत्तर कोरिया का कोई नेता अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलेगा।

डिजिटल डॉक्यूमेंट की सरकार की सबसे आधुनिक योजना फ्लॉप

दस्तावेजों का सरकारी लॉकर पिछड़ रहा है, यूजर सिर्फ 3%

अमित कुमार निरंजन | नई दिल्ली

डिजिटल इंडिया स्कीम के तहत शुरू किए गए बहुप्रचारित डिजी लॉकर की स्थिति बेहद खराब है। न तो इसमें नए इश्यूअर तेजी से जुड़ रहे हैं और न ही इसका कोई अपडेट या नए नोटिफिकेशन यूजर्स को मिल पा रहे हैं। जबकि इसकी शुरुआत जिस ताकत से की गई थी तो लगा था कि यह काफी सफल रहेगा। हाल ही में सीबीएसई ने डिजी लॉकर के माध्यम से अंक पत्र जारी किए हैं। यही नहीं डिजी लॉकर से आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस सहित करीब 125 प्रकार के सरकारी दस्तावेज से लिए और सुरक्षित रखे जा सकते हैं। भास्कर ने इसकी सेवाओं की स्थिति की पड़ताल की तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। डिजी लॉकर से अभी तक केवल 51 इश्यूअर जुड़े हैं, जो यूजर की मांग पर उनके दस्तावेज डिजिटली उपलब्ध करवाते हैं। शेष | पेज 8 पर


इन 2 कारणों से लॉकर अभी तक फ्लॉप रहा

सिर्फ10 संस्थाएं ही जारी करती हैं डाॅक्यूमेंट

करीब दो हजार से ज्यादा पब्लिक अथॉरिटी केन्द्रीय सरकार से संबंधित हैं लेकिन इनमें सिर्फ दस संस्थाएं ही ऐसे हैं जो डिजिटल लॉकर के माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध करवाते हैं। जिनमें सीबीएसई, पेट्रोलियम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय आगे आए हैं। लेकिन अन्य मंत्रालय और विभागों ने इस सेवा का फायदा उठाने की कोशिश ही नहीं की है। वहीं राज्य सरकारें भी डिजिटल लाॅकर को लेकर बेहद उदासीन ही रही हैं। 16 प्रदेश अभी भी ऐसे हैं जो डिजिटल लॉकर का लाभ नहीं ले रहे हैं। जिनमें दक्षिण क्षेत्र के प्रदेश और पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रदेश मुख्य रूप से शामिल हैं।

और डिजिटल डॉक्यूमेंट स्वीकार्य कहीं भी नहीं

राज्य सरकारें दस्तावेज अपने विभागों की वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध करवा रही हैं। डिजी लाॅकर की खास बात यह थी कि इसके दस्तावेज को ई साइन करने के बाद आप किसी भी सरकारी विभाग में इस्तेमाल कर सकते थे, इसके लिए फोटो कॉपी करवाने की जरूरत नहीं होती थी। लेकिन स्कूल, कॉलेजों या भर्ती प्रक्रिया में फॉर्म भरने से लेकर, पासपोर्ट बनवाने, बैंक खाता खुलवाने के लिए आपको अलग से अपने दस्तावेजों की फाेटोकाॅपी करवाने की जरूरत पड़ती ही है। अभी डिजी लॉकर से सीधे दस्तावेज कोई नहीं ले रहा है।

सबसे लंबी यात्रा

2011 में उत्तर कोरिया की सत्ता पर काबिज होने के बाद किम सबसे लंबी यात्रा करेंगे। प्योंयांग से सिंगापुर की दूरी करीब 4,743 किमी है। चीन दौरे पर किम करीब 24 घंटे में ट्रेन से पहुंचे थे। सिंगापुर वे विमान से 7 घंटे मंे पहुंचेंगे। वे पहली बार मार्च 2018 में विदेशी दौरे पर चीन गए थे। अब तक वे दो बार चीन जा चुके हैं। वे दो बार द. कोरिया के राष्ट्रपित से भी मिल चुके हैं, लेकिन बॉर्डर पर।

दुश्मन देश में ट्रम्प से ज्यादा चर्चित

ट्रंप किम को शॉर्ट एंड फैट, सिक पपी और लिटिल रॉकेट मैन कहते थे। लेकिन हाल ही में उन्होंने किम को स्मार्ट एंड ग्रेशियस और वेरी ऑनरेबल कहा।


77%

कोरिया रिसर्च सेंटर के सर्वे में दक्षिण कोरियाई लोगों ने किम को विश्वास करने योग्य माना है।

चेक पर साइन न मिलने पर ग्राहकों से वसूले 39 करोड़


राजीव कुमार/मुकेश कौशिक|नई दिल्ली

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने पिछले 40 माह में 38 करोड़ 80 लाख रुपए सिर्फ चेक पर हस्ताक्षर का मिलान न होने के एवज में ग्राहकों के खाते से काट लिए हैं। इस तरह एसबीआई सालाना औसतन 12 करोड़ रुपए कमाई कर रहा है। वित्त वर्ष 2017-18 में सिर्फ हस्ताक्षर नहीं मिलने की वजह से खाताधारकों के खाते से 11.9 करोड़ रुपए काटे गए हैं। िसर्फ स्टेट बैंक में ही हर दिन दो हजार से ज्यादा चेक रिटर्न हो रहे हैं। इन सभी खाताधारकों के खाते में काटे गए चेक के एवज में पर्याप्त राशि थी। एक आरटीआई के जवाब में बैंक ने माना कि कोई भी चेक रिटर्न हो तो बैंक 150 रुपए चार्ज करता है और इस पर जीएसटी भी लगाता है। यानी हर रिटर्न चेक का खमियाजा खातेदार को 157 रुपए में भुगतना पड़ता है, भले ही उसके खाते में चेक को ऑनर करने की रकम मौजूद हो।

बैंकिंग मामलों पर रिसर्च करने वाले आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर आशीष दास ने बताया कि रिजर्व बैंक के नियमों को ताक पर रखते हुए कई बैंक ग्राहकों से कई गैरवाजिब शुल्क वसूल रहे हैं। हस्ताक्षर नहीं मिलने के नाम पर शुल्क वसूला जाना उनमें से एक है।

हस्ताक्षर जांच का अंतिम गेट, रेखाएं और आकार करते हैं चेक : चेक की जांच विभिन्न तरीके से होती हैं। चेक पोस्टडेटेड तो नहीं है। अंक व अक्षर सही है या नहीं। ओवरराइटिंग तो नहीं है। सबसे अंत में हस्ताक्षर की जांच होती है जो कि अंतिम गेट है। बैंक अधिकारी ने बताया कि हस्ताक्षर रेखाचित्र की तरह है। हस्ताक्षर मिलाने के दौरान यह देखा जाता है कि रेखाएं उसी अनुपात में हैं या नहीं, उसका आकार मेल खा रहा है या नहीं, हस्ताक्षर का फ्लो मेल खा रहा है या नहीं। एसबीआई के अति वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बैंकर्स हस्ताक्षर मिलाने में एक्सपर्ट होते हैं और प्रशिक्षण के दौरान उन्हें हस्ताक्षर मिलाने की क्लास दी जाती है। हस्ताक्षर में फ्रॉड होने पर मामले को फॉरेंसिंक ऑडिट के पास भेज दिया जाता है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट उसकी जांच करते हैं।

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जारी हुआ खास सिक्का

किम के परिवार का कोई भी सदस्य अमेरिकी राष्ट्रपति से नहीं मिला है। 1994 में किम के दादा किम द्वितीय संग जिमी कार्टर से मिले थे, लेकिन तब वे पूर्व राष्ट्रपति थे। इसी तरह किम के पिता किम जॉन्ग द्वितीय भी पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से मिले हैं, लेकिन 2009 में।

इस मुलाकात से पहले व्हाइट हाउस ने एक सिक्का जारी किया है, इसमें किम को सर्वोच्च लीडर बताया गया है।

संवाद पर्व

जब विरोधी विचारधाराओं में संवाद होता है - तो भारी वाद-विवाद होता है। यही संवाद का सौन्दर्य है। इस सप्ताह यही हुआ।

प्रणब मुखर्जी खुले। इतिहास खोला। पचास वर्षों का अनुभव बोला। घृणा के विरुद्ध चेताया - उस संगठन के समारोह में जिससे प्रणब दा’ का मातृ संगठन कांग्रेस, घृणा करता है! ऊंचे उठकर निकले पूर्व राष्ट्रपति नागपुर से।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी ऊंचा उठा। वरिष्ठ विरोधी को आगे बढ़कर सुना। और भली-सी घोषणा की कि इस कार्यक्रम के बाद कुछ नहीं बदलेगा। ‘संघ, संघ ही रहेगा। प्रणब, प्रणब ही रहेंगे। यही सच है।

किन्तु कांग्रेस का विलाप चौंका गया। राष्ट्रपति रहते प्रणब दा’ पार्टी से परे रहे। राष्ट्रपति भवन में संघ प्रमुख मोहन भागवत को दो बार भोजन पर आमंत्रित किया। तो वे एक ‘नागरिक’ के रूप में क्यों, जहां उचित समझें - न जाएं? अनेक पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों ने वयोवृद्ध भद्रलोक की कड़ी भर्त्सना की। और, बाद में व्यर्थ उनके भाषण की अच्छाइयां गिनाने में भी जुट गए!

संवाद तो समाप्त ही होता जा रहा है। राजनीतिक दल, शत्रुता रखने लगे हैं। राजनीतिक छुआछूत कहां समाप्त हुई है? कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा क्या है? मोदी-मुक्त भारत का आह्वान क्या है? यह सब, अन्य को ‘अछूत’ सिद्ध करने का प्रयास ही तो है।

जिस देश में किसी निश्चित विचारधारा वाले संघ से जन्मी भाजपा की स्पष्ट बहुमत वाली सरकार हो - उसे अछूत कैसे माना जाए? इसी तरह जिस पार्टी ने स्वतंत्रता से अब तक जनादेश पाया हो - उससे ‘मुक्त’ देश की कल्पना क्यों?

चूंकि तर्क समाप्त है। चंूकि राजनीतिक वाद-विवाद है ही नहीं। चूंकि सड़क पर संघर्ष नहीं है। केवल घृणा-आधारित विरोध है। इसी दौरान राहुल गांधी को संघ को ‘गांधी के हत्यारे’ कहने पर न्यायालय में प्रस्तुत होना है। इन्हीं दिनों अमित शाह ने भाजपा के विरुद्ध ‘कुत्ते-बिल्ली-सांप-चूहे’ सभी के इकट्‌ठे होने की बात कही थी।

संवाद, शत्रु क्या मित्रों से ही कितना कम है - यह भी इसी सप्ताह दिखा। अब, जबकि भाजपा के विरुद्ध पहली बार लोकसभा उपचुनाव में मित्र शिवसेना ने प्रत्याशी खड़ा कर दिया - हारे - तब भाजपा उनसे बात करने पहुंची। शिरोमणि अकाली दल से चर्चा के लिए मिली। तो प्रमुख घटना कही गई!

मित्रों से संवाद का बिरला हो जाना अनेक संकेत देता है। मन की बात, मन में ही रह जाती है।

विरोधी विचारों की बातचीत से क्या नहीं हुआ है? जिस घटना पर राष्ट्रीय चिंतन चला - उससे कहीं बड़े मिलन देखे जा चुके हैं। जनसंघ, जन्मजात विरोधी समाजवादियों को जिताती थी। जनता पार्टी मंे प्रत्येक विरोधी दल, एक थे। और सर्वाधिक बेमेल ‘थ्री लैगेड, फोर हेडेड’ कही गई विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार तो भाजपा और कम्यूनिस्टों के साथ से बनी थी। यही भाजपा विरोधी दल, कांग्रेस के साथ मिलकर करते रहे हैं/आज कर रहे हैं।

यक्ष को युधिष्ठिर कहते हैं उत्तम धन है - शास्त्रार्थ। चूंकि उससे कुछ नई दृष्टि मिलती है। विरोध, पक्ष का ही दूसरा हिस्सा है। दिख रहा है।

भरतपुर, 10 जून, 2018

ज्येष्ठ (द्वितीय), कृष्ण पक्ष- 11 | 2075

कुल पेज = 24 अहा! जिंदगी

मूल्य | Rs. 5.00

12 राज्य | 66 संस्करण

घृणा का त्याग, कांग्रेस का

विलाप और भाजपा को मित्रों की अचानक याद

महाभारत-2019

कल्पेश याग्निक

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