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चार साल में 14 राज्यों में 27 सीटों पर उपचुनाव, भाजपा को सिर्फ 5 पर जीत

Bhaskar News Network| Last Modified - Jun 01, 2018, 05:30 AM IST

चार साल में 14 राज्यों में 27 सीटों पर उपचुनाव, भाजपा को सिर्फ 5 पर जीत
चार साल में 14 राज्यों में 27 सीटों पर उपचुनाव, भाजपा को सिर्फ 5 पर जीत
भाजपा की यूपी में 3 और राजस्थान की दो सीटों पर हार हुई है

भास्कर न्यूज | नई दिल्ली

यूपी की कैराना, महाराष्ट्र की पालघर, भंडारा-गोंदिया और नगालैंड लोकसभा सीटों और 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आए। इसमें पालघर को छोड़कर बाकी दो पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। 2014 के आम चुनावों के बाद से अब तक देश के 14 राज्यों में 27 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हो चुके हैं। इनमें से सिर्फ 5 पर भाजपा को जीत मिली है। इन 27 लोकसभा सीटों में से 13 भाजपा के पास थीं। यानी भाजपा को आठ सीटों का नुकसान हुआ है।

वहीं, कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली है। जिन सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, उनमें से सिर्फ अमृतसर सीट कांग्रेस के पास थी। यानी चार सीटों पर उसे फायदा हुआ है। कांग्रेस ने ये चारों सीटें भाजपा से छीनी हैं। जबकि 2 सीट सपा और एक-एक सीट आरएलडी और एनसीपी ने छीनी हंै। भाजपा को उपचुनावों में एक भी नई सीट पर जीत नसीब नहीं हुई है। 2014 आम चुनाव के बाद यूपी में 4 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं। सभी सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। इनमें से 3 सीटें भाजपा के पास थीं। सीएम योगी की गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की फूलपुर सीट भी भाजपा हार चुकी है। 2014 में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। पर इसी साल दो सीटों पर उपचुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने उपचुनाव में अपनी सभी चारों सीटों को बरकरार रखा है।

लोकसभा की 27 में से 13 सीटें 2014 में भाजपा के पास थीं, जिनमें से 8 पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है

कांग्रेस ने उपचुनावों में भाजपा से चार सीटें छीनी हैं

2014 बीड़ महाराष्ट्र भाजपा

2014 मेदक तेलंगाना टीआरएस

2014 कंधमल ओिडशा बीजेडी

2014 मैनपुरी यूपी सपा

2014 वडोदरा गुजरात भाजपा

2015 बनगांव बंगाल टीएमसी

2015 वारंगल तेलंगाना टीआरएस

2015 रतलाम एमपी कांग्रेस

2016 लखीमपुर असम भाजपा

2016 कूच बिहार बंगाल टीएमएसी

2016 तामलुक बंगाल टीएमसी

2016 शहडौल एमपी भाजपा

2016 तुरा मेघालय एनपीपी

2017 अमृतसर पंजाब कांग्रेस

2017 गुरुदासपुर पंजाब कांग्रेस

2017 मलप्पुरम केरल IUML

2017 श्रीनगर कश्मीर एनसी

2018 अलवर राजस्थान कांग्रेस

2018 अजमेर राजस्थान कांग्रेस

2018 उलुबेरिया बंगाल टीएमसी

2018 गोरखपुर यूपी सपा

2018 फूलपुर यूपी सपा

2018 अररिया बिहार आरजेडी

2018 कैराना यूपी आरएलडी

2018 पालघर महाराष्ट्र भाजपा

2018 भंडारा गोदिया महाराष्ट्र एनसीपी

2018 नगालैंड नगालैंड एनडीपीपी

पहली बार यूपी में ध्रुवीकरण की राजनीति फेल

कैराना से जीत के बाद आरएलडी की तबस्सुम।

कैराना में योगी, बागपत में मोदी ने की रैली

योगी के आधे मंत्री, सांसद, विधायकाें ने कैराना में प्रचार किया। मतदान से एक दिन पहले मोदी ने एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के नाम पर रोड शो करते हुए बागपत में रैली भी की थी।

भाजपा के पास अब सिर्फ 272 सांसद हैं

भाजपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में 282 सीटें मिलीं थीं। अब यह 272 रह गई हैं। इनमें लोकसभा अध्यक्ष की सीट भी शामिल है। कांग्रेस की सीटें 44 से बढ़कर 48 हो गई हैं। यानी 4 का फायदा।

4 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इनमें से 2 सीटें भाजपा की हैं। ये सीटें कर्नाटक से सांसद बीएस येद्दियुरप्पा और श्रीरामुलु की हैं। भाजपा ने 2 एेग्लो इंडियन सांसदों को भी नॉमिनेट कर रखा है।

एनडीए के 315 सांसद हैं। इनमें शिवसेना के 18 सांसद भी हैं। भाजपा को शिवसेना बाहर से सपोर्ट कर रही।

2014 लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में मुजफ्नगर दंगा, 2017 विधानसभा चुनाव से पहले कैराना में हिंदुओं का पलायन बना मुद्दा

उपचुनाव से पहले अलीगढ़ में जिन्ना की फोटो पर बवाल हुआ

मेरठ | यूपी में भाजपा को पहली बार वहां हार मिली है, जहां 4 साल पहले मुजफ्फरनगर दंगे की पृष्ठभूमि में लोकसभा चुनाव हुआ और भाजपा ने 80 में से 72 सीटें जीत लीं। इसी तरह 2016 में विधानसभा चुनाव से पहले कैराना में हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठा। इसे भाजपा के कैराना से पूर्व सांसद हुकुम सिंह ने ही उठाया था। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार को चिट्‌ठी भी लिखी थी। यह मुद्दा 2017 के विस चुनावों में भी उठा। पार्टी को इसका काफी फायदा हुआ, खासकर पश्चिमी यूपी में। राज्य की 403 में से भाजपा को अकेले 312 सीटों पर जीत मिली। अब उपचुनाव में कैराना की हार भाजपा की बड़ी हार है। खासकर तब जब उपचुनाव से पहले पड़ोसी जिले अलीगढ़ में जिन्ना की फोटो को लेकर काफी बवाल हुआ। विपक्षी पार्टियों का आरोप था कि भाजपा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। अब कैराना में हार के बाद उन्हीं दलों का कहना है कि राज्य में पहली बार भाजपा का ध्रुवीकरण कार्ड फेल हो गया। भाजपा को पश्चिमी यूपी की नूरपुर विधानसभा सीट पर भी हार का सामना करना पड़ा है। ये सीट भी भाजपा के पास थी। कैराना की 5 में से 4 विधानसभा सीटों पर भाजपा की हार हुई है। इनमें योगी सरकार के दो मंत्रियों की सीट भी शामिल है।

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