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पाकिस्तान ने नौवें दिन भी तोड़ा सीजफायर

जम्मू-कश्मीर के जम्मू, कठुआ और सांबा जिलों में बुधवार को लगातार नौंवें दिन पाक रेंजरों और सेना ने अग्रिम चौकियों...

Dainik Bhaskar

May 24, 2018, 05:35 AM IST
पाकिस्तान ने नौवें दिन भी तोड़ा सीजफायर
जम्मू-कश्मीर के जम्मू, कठुआ और सांबा जिलों में बुधवार को लगातार नौंवें दिन पाक रेंजरों और सेना ने अग्रिम चौकियों और गांवों पर मोर्टार दागे। फायरिंग और मोर्टार की चपेट में आकर पांच लाेगों की मौत हो गई। बीएसएफ के पांच जवानों सहित 40 लोग घायल भी हुए हैं। जान बचाने के लिए सीमावर्ती गांवों से करीब 76 हजार लोग पलायन कर चुके हैं। 100 से ज्यादा गांव सुनसान हो गए हैं। तीनों जिलों में अगले तीन दिन तक 200 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहेंगे। उधर, अनंतनाग जिले में आतंकियों के ग्रेनेड अटैक में 10 आम नागरिक घायल हो गए।

पाक ने दागे मोर्टार, 5 की मौत, 76

हजार लोगों ने घर छोड़े, 100 गांव सूने

सांबा सेक्टर के बेंगलाद गांव में गोलियों से छलनी मकान की दीवारें।

पाकिस्तानी उप उच्चायुक्त को विदेश मंत्रालय ने तलब किया, फायरिंग में 7 माह के बच्चे की मौत पर रोष जताया

विदेश मंत्रालय ने पाक के उप उच्चायुक्त सैयद हैदर को तलब कर पिछले दिनों फायरिंग में सात माह के बच्चे की मौत पर रोष जताया। उधर, जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने राज्य में आतंकियों के खिलाफ एकतरफा संघर्ष विराम की तरह बॉर्डर पर भी संघर्ष विराम रोकने की मांग की है।

अरनिया (जम्मू) से ग्राउंड रिपोर्ट

गोलियाें के निशान बयां कर रहे क्रूरता की दास्तां; बुजुर्ग बोले- ऐसा तो 1971 के युद्ध में भी नहीं हुआ

सीमावर्ती इलाकों में सुनसान पड़े 100 से ज्यादा गांवों में इन दिनों एक जैसा मंजर है। चारों तरफ तबाही के निशान दिखते हैं। फर्श पर खून के दाग, टूटी खिड़कियां, घायल मवेशी और दीवारों पर गोलियाें के निशान पाकिस्तान की क्रूरता की दास्तां बयां करते हैं। घर-बार छोड़कर शिविरों में जा बैठे बुजुर्ग कहते हैं कि पाकिस्तान की ऐसी हैवानियत तो 1971 की जंग में भी नहीं देखी। नौ दिन से पाकिस्तान की ओर से जारी गोलाबारी और फायरिंग का सबसे बुरा असर अरनिया इलाके पर दिखा। पाकिस्तान सीमा से महज पांच किमी दूर स्थित कस्बे की आबादी 18 हजार 500 है। लेकिन इन दिनों यह भुतहा कस्बा लगने लगा है। सीमा से सटे 100 से ज्यादा गांवों का भी हाल कुछ ऐसा ही है। अरनिया और आरएस पुरा सेक्टरों के 90 से ज्यादा गांवों से लोगों को बुलेट प्रूफ गाड़ियों में निकाला गया। करीब 3 हजार लोग प्रशासन के कैंपों में रुके हैं। बाकियों ने फायरिंग की जद से दूर रिश्तेदारों के घरों में शरण ली है।

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